वानुआतु का रहने वाला हूं, आरोपी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट बोला- ऐसा तो कोई देश ही नहीं है
याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि वह करीब एक साल और तीन महीने से हिरासत में है। पीठ ने पूछा कि आप किस देश के नागरिक हैं? जब वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता वानुआतु का नागरिक है, तो पीठ ने पूछा, क्या आप कभी वहां गए हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को कहा कि वानुआतु जैसा कोई देश नहीं है। आरोपी ने दावा किया था कि वह प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश वानुआतु का रहने वाला है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ उस व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे एक धोखाधड़ी मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ को बताया कि वह करीब एक साल और तीन महीने से हिरासत में है। पीठ ने पूछा, ''आप किस देश के नागरिक हैं?'' जब वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता वानुआतु का नागरिक है, तो पीठ ने पूछा, ''क्या आप कभी वहां गए हैं?''
इस पर वकील ने जवाब दिया कि नहीं, तो पीठ ने टिप्पणी की, ''ऐसा कोई देश नहीं है। हम एक देश 'कैलासा' के बारे में भी जानते हैं। उसी जैसा।'' गौरतलब है कि स्वयंभू बाबा नित्यानंद ने 2019 में ''यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा'' नामक एक देश स्थापित करने का दावा किया था।
इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि आरोपी को पहले ही चार अन्य मामलों में जमानत मिल चुकी है। फिर पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील से पूछा, ''मुकदमे की सुनवाई पूरी करने में आपको कितना समय लगेगा?''
राज्य के वकील ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई संभवतः छह से आठ महीने में पूरा हो जाएगा। इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। पीठ ने कहा, ''याचिका वापस लेने के रूप में खारिज की जाती है।''
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