कमाई छिपाकर हाईकोर्ट को चुना लगा रहा था शख्स, अब पत्नी को देने पड़ेंगे 7 गुना ज्यादा पैसे

कमाई छिपाकर हाईकोर्ट को चुना लगा रहा था शख्स, अब पत्नी को देने पड़ेंगे 7 गुना ज्यादा पैसे

संक्षेप:

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शख्स को पत्नी को हर महीने साढ़े 3 लाख रुपए देने का आदेश दिया है। इससे पहले अदालत ने पाया कि उसका परिवार 1,000 करोड़ से ज्यादा वैल्यू के रियल एस्टेट और मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस चलाता था।

Nov 12, 2025 11:40 pm ISTJagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में एक शख्स की चालाकी पकड़कर कड़ी सजा दे दी है। दरअसल यह शख्स अदालत से अपनी असल कमाई छिपाने के फिराक में था ताकि उसे अपनी पत्नी को गुजारा भत्ते के रूप में कम पैसे देने पड़े। हालांकि कोर्ट ने उसकी चालाकी पकड़ ली और अब उसे पत्नी को हर महीने 3.5 लाख रुपए देने का आदेश दिया है। इससे पहले वह पत्नी को हर महीने 50 हजार रुपए देता था। पति को चार सप्ताह के अंदर एक साल के बकाया के रूप में 42 लाख रुपए जमा करने का आदेश भी दिया गया है।

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इससे पहले जस्टिस बीपी कोलाबावाला और जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन की पीठ ने पाया कि शख्स ने अपनी वित्तीय स्थिति छुपाई थी और अदालत को गुमराह किया था। पीठ ने पाया कि पति का केवल 6 लाख प्रति वर्ष कमाने का दावा हास्यास्पद है, जबकि उसके परिवार का 1,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य का विशाल रियल एस्टेट साम्राज्य है। इसके बाद कोर्ट ने मासिक भत्ते को 50,000 रुपए से बढ़ाकर 3.5 लाख रुपए कर दिया।

बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक दंपति की 1997 में हुई थी और वे 2013 में अलग होने से पहले 16 साल तक साथ रहे थे। फरवरी 2023 में, पुणे की एक पारिवारिक अदालत ने क्रूरता के आधार पर पति की तलाक की अर्जी मंजूर कर ली थी। कोर्ट ने स्थायी गुजारा भत्ता 50,000 रुपए प्रति माह तय किया था। इसके बाद दोनों पक्षों में अदालत में अपील की थी। जहां पत्नी ने गुजारा भत्ता बढ़ाने की मांग की, वहीं पति ने इस आधार पर गुजारा भत्ता रद्द करने की मांग की कि उसके पास भुगतान करने के साधन नहीं हैं।

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पति द्वारा वित्तीय संकट का चित्रण "हास्यास्पद" है। पीठ ने पाया कि उनका परिवार के रियल एस्टेट, मैन्युफैक्चरिंग और फाइनेंस के कई बिजनेस हैं जिनकी कुल कीमत 1,000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। कोर्ट ने पति के खातों से उसके भाई के खातों में 10 करोड़ रुपए से अधिक पैसे ट्रांसफर होने के भी प्रमाण भी पाए।

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हाईकोर्ट ने पति को इस दलील के लिए भी फटकार लगाई कि एक अलग हो चुकी महिला को अपनी बेटी के योग, म्यूजिक और बेकिंग क्लासेज के खर्चों में कटौती करनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा तर्क पितृसत्तात्मक सोच का उदाहरण है।

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari
जागृति ने 2024 में हिंदुस्तान टाइम्स डिजिटल सर्विसेज के साथ अपने करियर की शुरुआत की है। संत जेवियर कॉलेज रांची से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन करने बाद, 2023-24 में उन्होंने भारतीय जन संचार संस्थान नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा हासिल किया। खबरें लिखने के साथ साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय संबंध, खेल और अर्थव्यवस्था की खबरों को पढ़ना पसंद है। मूल रूप से रांची, झारखंड की जागृति को खाली समय में सिनेमा देखना और सिनेमा के बारे में पढ़ना पसंद है। और पढ़ें
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