Hindi NewsIndia NewsHumayun Kabir may become Asaduddin Owaisi for West Bengal why TMC and Mamata Banerjee in trouble with new announcement
कहीं बंगाल के ओवैसी न बन जाएं हुमायूं कबीर, नए ऐलान से ममता बनर्जी के लिए क्या मुश्किलें?

कहीं बंगाल के ओवैसी न बन जाएं हुमायूं कबीर, नए ऐलान से ममता बनर्जी के लिए क्या मुश्किलें?

संक्षेप:

चर्चा है कि हुमायूं कबीर अपने नई पार्टी लॉन्च कर 2026 के विधानसभा चुनावों में 135 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो हुमायूं कबीर तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के लिए राज्य का असदुद्दीन ओवैसी साबित हो सकते हैं।

Dec 04, 2025 06:17 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता/नई दिल्ली
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पश्चिम बंगाल के विधायक और सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित नेता हुमायूं कबीर ने गुरुवार को कहा कि वह कल (शुक्रवार, 5 दिसंबर को) पार्टी से इस्तीफा दे देंगे। 6 दिसंबर को मुर्शीदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने का ऐलान कर सुर्खियों में आए हुमायूं कबीर ने कहा है कि वह 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी की घोषणा कर सकते हैं। TMC से निलंबित विधायक ने कहा, "मैं कल टीएमसी से इस्तीफा दे दूंगा। अगर जरूरत पड़ी तो मैं 22 दिसंबर को नई पार्टी की घोषणा करूंगा।"

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कबीर ने कहा कि उन्हें पार्टी जिला अध्यक्ष ने बैठक के लिए बुलाया था। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "मैं यहां जिला अध्यक्ष के साथ बैठक के लिए आया हूं, बाद में प्रतिक्रिया दूंगा। लेकिन मुझे पार्टी से निलंबित किया गया है, विधायक के तौर पर नहीं, पहले बैठक तो होने दीजिए।" इससे पहले आज, टीएमसी ने कबीर को उनकी उस टिप्पणी के लिए निलंबित कर दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि वह 6 दिसंबर को राज्य के मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे।

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अचानक बाबरी मस्जिद क्यों?

कोलकाता के मेयर और टीएमसी नेता फिरहाद हकीम के मुताबिक, कबीर को उनके बयानों के बारे में पहले ही 'चेतावनी' दी गई थी और ऐसे में उनके इरादों पर सवाल उठाते हुए पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया है। कोलकाता के मेयर और राज्य मंत्री ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "हमने देखा कि मुर्शिदाबाद के हमारे एक विधायक ने अचानक घोषणा की कि वह बाबरी मस्जिद का निर्माण करेंगे। अचानक बाबरी मस्जिद क्यों? हमने उन्हें पहले ही चेतावनी दी थी। हमारी पार्टी, टीएमसी के फैसले के अनुसार, हम विधायक हुमायूं कबीर को निलंबित कर रहे हैं।"

सत्ताधारी तृणमूल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं

हुमायूं कबीर के नए सियासी दांव से सत्ताधारी तृणमूल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि उनके नए दल के गठन से पार्टी को मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लग सकती है। ऐसी चर्चा है कि हुमायूं कबीर अपने नई पार्टी लॉन्च कर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में 135 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो हुमायूं कबीर तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के लिए राज्य का असदुद्दीन ओवैसी साबित हो सकते हैं। यानी मुस्लिम वोट तोड़ सकते हैं क्योंकि उनकी बाबरी मस्जिद बनाने के ऐलान से मुस्लिम जमात का एक बड़ा हिस्सा खुश है। उन्हें लगता है कि हुमायूं कबीर उनके दिल की मुराद पूरी कर सकते हैं। हालांकि, यह तब तक संभव नगीं है, जब तक कि राज्य सरकार उन्हें जमीन मुहैया न करवा दे।

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मुर्शीदाबाद में 70 फीसदी मुस्लिम

बता दें कि मुर्शीदाबाद राज्य के उन जिलों में शामिल है जहां मुसलमानों की आबादी 70 फीसदी से ज्यादा है। हुमायूं मुर्शीदाबाद में ही बाबरी मस्जिद बनाने की बात कर चुके हैं। जानाकारों का कहना है कि हुमायूं कबीर खुद को मुस्लिमों के कट्टर नेता के रूप में पेश कर रहे हैं और बाबरी मस्जिद के बहाने कई मुस्लिम संगठनों का साथ उन्हें मिल रहा है। अगर मुस्लिमों के बीच हुमायूं लोकप्रिय होते हैं तो वह ममता का यह वोट बैंक बंट सकता है।

2019 में भाजपा में हुए थे शामिल

दरअसल,ममता की जीत में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी भूमिका रही है। भाजपा लंबे समय से इस वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश करती रही है। इसी कड़ी में भाजपा ने हुनायूं कबीर पर भी दाने डाले थे। हुमायूं कबीर 2019 में टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे और लोकसभा चुनाव भी लड़े थे लेकिन हार के बाद फिर से टीएमसी में शामिल हो गए और 2021 में भरतपुर से विधायक बने थे।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
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