सरकार बनना तय मान रहे थे थलापति विजय, फिर कैसे फंस गया मामला; इनसाइड स्टोरी

Surya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, चेन्नै
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विजय को VCK के समर्थन की बात कही जा रही थी, उसका कहना है कि हमने समर्थन पर आखिरी फैसला नहीं लिया है। इसके अलावा लेफ्ट पार्टियों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी समर्थन देने से इनकार किया है। विजय की पार्टी TVK को 108 सीटें मिली हैं और उसे सरकार बनाने के लिए 10 अतिरिक्त सीटों की जरूरत है।

सरकार बनना तय मान रहे थे थलापति विजय, फिर कैसे फंस गया मामला; इनसाइड स्टोरी

तमिलनाडु की राजनीति में उलटफेर कर राजनीतिक सुपरस्टार बनने वाले फिल्म ऐक्टर विजय सत्ता के सिंहासन से दूर हटते नजर आ रहे हैं। 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में 108 सीटें जीतने वाले थलापति विजय ने बुधवार को गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। लेकिन गवर्नर हाउस की ओर से सूत्रों ने बताया कि उनके दावे में दम नहीं दिख रहा है और उनके पास पर्याप्त नंबर नहीं है। इसके चलते मामला फंस गया है और फिलहाल थलापति विजय सत्ता से दूर होने की चिंता में हैं। अब सवाल है कि इतना भरोसा रखकर गवर्नर से मिलने वाले थलापति विजय की प्लानिंग पर आखिर ब्रेक कैसे लगता दिख रहा है।

इसका जवाब यह है कि जिस VCK के समर्थन की बात कही जा रही थी, उसका कहना है कि हमने अभी विजय की पार्टी TVK के समर्थन पर आखिरी फैसला नहीं लिया है। इसके अलावा लेफ्ट पार्टियों और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी समर्थन देने से इनकार किया है। विजय की पार्टी TVK को 108 सीटें मिली हैं और उसे सरकार बनाने के लिए 10 अतिरिक्त सीटों की जरूरत है। राज्य में वीसीके ने 2 सीटें जीती हैं। इसके अलावा कांग्रेस ने 5 सीटें जीती हैं और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, सीपीआई और सीपीएम ने भी 2-2 सीटें जीती हैं। यदि इन दलों का उसे समर्थन मिल जाए तो आसानी से विजय की सरकार बन सकती है। लेकिन कांग्रेस के अलावा किसी ने भी समर्थन की पुष्टि नहीं की है।

वीसीके के एक सीनियर नेता ने कहा कि हमारे पार्टी अध्यक्ष टी. तिरुमावलन की ओर से विजय को समर्थन के बारे में फैसला लिया जाएगा। इस बीच सूबे की राजनीति में कई उलटफेर होते दिख रहे हैं। सीपीएम के विधायक आर. चेलास्वामी और लता ने एमके स्टालिन से मुलाकात की। वहीं सीपीआई के भी दो विधायकों ने स्टालिन से मीटिंग की है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के दो विधायकों सैयद फारूक बाशा और ए.एम शाहजहां ने भी स्टालिन से मीटिंग की है। ऐसे में राज्य के समीकरणों को लेकर कयास लग रहे हैं कि आखिर तमिलनाडु में क्या होने वाला है। एक ऐसे दल के नेता से तमाम विधायकों का मिलना चर्चाओं को तेज कर रहा है, जो बुरी तरह हारे हैं।

5 सीटों वाली कांग्रेस आई साथ, अब भी पांच विधायक कम

विजय की पार्टी को 108 सीटें मिली हैं और 5 सीटों वाली कांग्रेस ने समर्थन का ऐलान किया है। इस तरह आंकड़ा 113 पहुंच गया है और 5 अन्य सीटों की जरूरत है। ऐसे में 2-2 सीटें जीतने वाले तीन दल यदि साथ देते हैं, तभी विजय सरकार बनाने की स्थिति में होंगे। अब जैसी स्थिति पैदा हो गई है। उसमें तमिलनाडु की राजनीति रोचक है और आने वाले कुछ दिन बेहद अहम हो सकते हैं। तमिलनाडु की राजनीति पर नजर रखने वाले मान रहे हैं कि डीएमके की ओर से भी कुछ खेल हो सकता है। फिलहाल सूबे की राजनीति में गवर्नर हाउस की भूमिका अहम हो गई है।

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दुनियादारी में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। समकालीन राजनीति पर लिखने के अलावा सामरिक मामलों, रणनीतिक संचार और सभ्यतागत प्रश्नों के अध्ययन में रुचि रखते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले सूर्यप्रकाश को पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। 10 वर्षों से ज्यादा समय से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं राज्यों से संबंधित खबरों का संपादन करते हैं एवं डेस्क इंचार्ज के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। समाचारों के त्वरित प्रकाशन से लेकर विस्तृत अध्ययन के साथ एक्सप्लेनर आदि में भी रुचि रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज प्रकाशित करने और खबरों के अंदर की खबर को विस्तार से समझाने में रुचि रखते हैं। हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को समझते हैं और उसके अनुसार ही पाठकों को खबरें देने के लिए तत्परता रखते हैं।


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