दो कारें, टोल प्लाजा और यूपीआई पेमेंट; पुलिस के जाल में कैसे फंस गए शुभेंदु के PA के हत्यारे
शुभेंदु अधिकारी के सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में उत्तर प्रदेश से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए मजबूत जाल बिछाया था। टोल प्लाजा पर यूपीआई पेमेंट करने के बाद उनकी पहचान का पता चल गया।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में कम से कम तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार पुलिस के संयुक्त अभियान में तीन लोगों को दबोचा गया है, जिनके नाम विशाल श्रीवास्तव, राज सिंह और मयंक मिश्रा हैं। इन तीनों को उत्तर प्रदेश और बिहार से गिफ्तार किया गया है। बता दें कि 6 मी की रात को 24 परगना जिले में चंद्रनाथ रथ की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को पड़ने के लिए जाल बिछाना शुरू किया और पुलिस एक हफ्ते के अंदर कामयाब भी हो गई।
यूपीआई पेमेंट और टोल प्लाजा से मिला सुराग
पुलिस को आरोपियों के बारे में बड़ा सुराग तब मिला जब टोल प्लाजा के सीसीटीवी खंगाले गए। शुरुआती जांच में यही पता चला कि रथ की एसयूवी के सामने एक रुपहले रंग की निसान माइक्रा कार आ गई थी। इसके बाद रथ ने अपनी गाड़ी रोकी और तबतक बाइकसवार बदमाशों ने उनपर गोलियां चला दीं। चंद्रनाथ रथ को तीन गोलियां लगीं और बाद में उनकी मौत हो गई। आरोपियों ने अपनी माइक्रा कार को वहीं छोड़ दिया और लाल रंग की दूसरी कार और एक बाइक से भाग निकले। इसके बाद से पुलिस ने इस कार की तलाश शुरू कर दी। रविवार को मयंक राज मिश्रा और विशाल को बिहार के बक्सर से गिरफ्तार किया गया। वहीं राज सिंह को उत्तर प्रदेश के बलिया से दबोचा गया है।
एक ही कार में थे तीनों आरोपी
पुलिस ने जब टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो पता लगा कि बरेली के पास एक टोल प्लाजा से यह कार निकली है। कार सवार लोगों ने यूपीआई पेमेंट भी किया है। इस कार में तीन लोग बैठे हुए थे। इससे पुलिस को एक बड़ा लिंक मिल गया और अभियान और भी तेज कर दिया गया। यूपीआई पेमेंट की वजह से पुलिस को पता चल चुका था कि आरोपी का नाम क्या है।
नामी बदमाश है विशाल
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों ही आरोपी प्रोफेशनल किलर हैं। वे सुपारी लेकर लोगों की हत्या करते हैं। इसमें से विशाल बक्सर बिहार का रहने वाला है और बाकी के दो उत्तर प्रदेश के हैं। विशाल के खिलाफ, हत्या और डकैती समेत कम से कम 15 केस दर्ज हैं। आज इन आरोपियों को बंगाल की बारासात कोर्ट में पेश किया जाएगा।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांचकर्ताओं ने मामले में डिजिटल साक्ष्यों और अंतरराज्यीय संबंधों पर नजर रखते हुए यह कार्रवाई की। उन्होंने कहा, "यह एक बड़ी सफलता है। जांच में संकेत मिले थे कि हमलावर पश्चिम बंगाल के बाहर के थे। तकनीकी निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और अन्य सूचनाओं के आधार पर एसआईटी के सदस्यों को उत्तर प्रदेश और बिहार भेजा गया था।' उन्होंने बताया कि हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने में कम से कम आठ लोग शामिल थे। पुलिस का मानना है कि हमलावरों ने रथ को निशाना बनाने से पहले विस्तार से रेकी की थी।
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लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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