इस बार एकनाथ शिंदे के बेटे लगा गए उद्धव गुट में सेंध, ऐसे दिखाया पिता की बगावत का रीप्ले

लाइव हिन्दुस्तान, मुंबई
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शनिवार को कोल्हापुर में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि पहले लोगों को शिंदे के नेतृत्व वाले गुट का अलग से ज़िक्र करना पड़ता था, लेकिन 'अब कोई गुट नहीं बचा है और सिर्फ़ एक ही शिवसेना है, जिसके प्रमुख एकनाथ शिंदे हैं।'

इस बार एकनाथ शिंदे के बेटे लगा गए उद्धव गुट में सेंध, ऐसे दिखाया पिता की बगावत का रीप्ले

शिवसेना का कहना है कि सोमवार को दोपहर 3 बजे 6 सांसद उनके दल में शामिल हो जाएंगे। खास बात है कि लोकसभा के ये सदस्य शिवसेना (UBT) यानी उद्धव ठाकरे का गुट छोड़कर दल बदल कर रहे हैं। अब कहा जा रहा है इस टूट के सूत्रधार सांसद श्रीकांत शिंदे हैं। वह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने कुछ महीनों में ही इस पूरी योजना को तैयार किया था। हालांकि, इसपर उन्होंने आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है।

महाराष्ट्र के मंत्री और शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक का कहना है, 'आज दोपहर 3 बजे छह सांसद आधिकारिक तौर पर शिवसेना में शामिल होंगे। इससे हमारे सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो जाएगी। इसने शिवसेना की ताकत को और बढ़ा दिया है।' इससे पहले शिंदे भी कह चुके हैं कि ऑपरेशन सफल हुआ है। वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी उनकी तारीफ की थी।

क्या था प्लान

मई के अंत में ही ऑपरेशन टाइगर की चर्चाओं ने जोर पकड़ा था। सीएनएन न्यूज18 की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि इसे लेकर तैयारियां करीब एक साल पहले ही शुरू हो चुकी थीं। हालांकि, कहा जा रहा है कि बीते कुछ महीनों में इस योजना में तेजी आई थी और इसकी अगुवाई श्रीकांत शिंदे कर रहे थे।

सांसदों से साधा संपर्क

चैनल से बातचीत में सूत्रों ने बताया कि जूनियर शिंदे ने ही सांसदों से संपर्क साधा और बातचीत करते रहे। कहा यह भी जा रहा है कि उन्होंने ही मुंबई और दिल्ली के बीच जारी बातचीत में भी अहम मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। रिपोर्ट के अनुसार, सबसे पहले सांसद अशोक आष्टिकर ने दल बदल पर सहमति जताई थी।

उद्धव ठाकरे के सक्रिय होने के पहली ही टूटने लगी थी पार्टी

सांसदों को दल बदल की अटकलों के बीच बीते रविवार को शिवसेना यूबीटी की एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें 9 सांसदों को बुलाया गया था। खास बात है कि तब व्यक्तिगत रूप से महज 4 ही सांसद पहुंचे थे। पार्टी का दावा था कि मीटिंग में 5 सांसद ऑनलाइन शामिल हुए थे। साथ ही उद्धव गुट का दावा था कि सभी सांसद उनके संपर्क में हैं और एकजुट हैं।

अब रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि इस बैठक से पहले ही पांच सांसदों ने शिंदे गुट के समर्थन पत्र पर साइन कर दिए थे। खास बात है कि इस दौरान पार्टी टूटने की चर्चाओं को बेहद गोपनीय रखा गया था। कहा जा रहा है कि डिप्टी सीएम शिंदे समेत चार से पांच लोगों को इस पूरी योजना की जानकारी थी।

ऐसे टूटी उद्धव सेना

रिपोर्ट के मुताबिक, 16 जून को इस सिलसिले की शुरुआत हुई थी। तब बागी 6 सांसद अलग-अलग शहरों से होते हुए राजधानी पहुंचे थे और नोएडा के एक होटल में ठहरे हुए थे। इसके बाद 17 जून को बगावत का मन बना चुके सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की थी और समर्थन पत्र सौंपा था।

क्या कांग्रेस से विलय थी वजह

कहा जा रहा है कि बगावत का समर्थन कर रहे विधायकों का कहना था कि शिवसेना यूबीटी विचारधारा से भटक रही है, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया। साथ ही ये भी आरोप लगाए गए कि पार्टी कांग्रेस के साथ विलय करने की भी योजना बना रही थी। हालांकि, इसे लेकर शिवसेना यूबीटी ने आधिकारिक रूप से इसे लेकर कुछ नहीं कहा है।

ये हैं बागी सांसद

सांसद संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-अष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर 17 जून को दिल्ली में शिवसेना (UBT) संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे अटकलें तेज हो गईं कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में जा रहे हैं। 9 लोकसभा सांसद वाली शिवसेना यूबीटी से अलग होने पर दल बदल से बचने के लिए कम से कम छह सांसदों यानी कुल संख्या के दो-तिहाई की जरूरत है।

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Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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