1981 की वो घटना जिसने शिवराज पाटिल को ला दिया था सोनिया गांधी के करीब, राष्ट्रपति बनने से कैसे गए चूक

1981 की वो घटना जिसने शिवराज पाटिल को ला दिया था सोनिया गांधी के करीब, राष्ट्रपति बनने से कैसे गए चूक

संक्षेप:

Shivraj Patil: 2007 में जब राष्ट्रपति का चुनाव होने लगा तो पाटिल इस पद के मजबूत दावेदार बनकर उभरे थे। माना जाता है कि सोनिया गांधी ने उन्हें राष्ट्रपति भवन भेजने के प्लान बना लिया था लेकिन यूपीए सरकार में सहयोगी वाम दलों ने शिवराज के नाम पर अड़ंगा लगा दिया

Dec 12, 2025 11:04 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share

Shivraj Patil: बात 1980 की है। जनवरी में हुए लोकसभा चुनावों में प्रचंड जीत के बाद इंदिरा गांधी की फिर से केंद्र सरकार में वापसी हुई थी। तब कांग्रेस पार्टी को 353 सीटें मिली थीं। इस जीत के बाद संगठन और सत्ता पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी की पकड़ मजबूत हो रही थी। उनकी सरकार में भी तूती बोल रही थी लेकिन जून में एक विमान हादसे में उनकी मौत हो गई। इस हादसे से इंदिरा टूट गई थीं। संजय उस वक्त अमेठी से सांसद थे। लिहाजा, उनकी विधवा मेनका गांधी इंदिरा गांधी से अमेठी सीट पर अपना राजनीतिक विरासत चाहती थीं लेकिन इंदिरा गांधी इसके लिए तैयार नहीं थीं।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

दूसरी तरफ, इंदिरा चाहती थीं कि बड़े बेटे राजीव गांधी पायलट का करियर छोड़कर राजनीति में आ जाएं। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी थी कि संजय गांधी की मौत के बाद बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वरूपानंद ने इंदिरा गांधी से उनके आवास पर पहुंचकर ये सलाह दी थी कि वे राजीव को विमान न उड़ाने दें। इससे इंदिरा घबराई हुई थीं। वह नहीं चाहती थीं कि दूसरा बेटा भी विमान हादसे का शिकार हो। इंदिरा चाहती थीं कि राजीव अमेठी से चुनाव लड़ें लेकिन मेनका गांधी परिवार में खुद को संजय का राजनीतिक वारिस बनाने की मांग कर रही थीं। लिहाजा, इंदिरा अजीब सी उलझन में थीं।

read moreये भी पढ़ें:
आज तक नहीं हुआ ऐसा स्पीकर, केसी वेणुगोपाल ने शिवराज पाटिल को बताया सबसे सफल HM

50 सांसदों का एक दल लेकर इंदिरा के पास पहुंच गए थे

यह वही समय था, जब कांग्रेस पार्टी के युवा सांसद और तत्कालीन रक्षा राज्यमंत्री शिवराज पाटिल फरवरी 1981 में करीब 50 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल लेकर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पास पहुंच गए थे और मांग की थी कि राजीव गांधी को राजनीति में लाया जाए। उस प्रस्ताव पर तब 70 सांसदों ने दस्तखत किए थे। हालांकि, तब इंदिरा ने उनसे कहा था कि राजनीति में आना है या नहीं, यह राजीव को तय करना है। जब राजीव से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जवाब दिया था, "अगर इससे मेरी माँ को मदद मिलती है, तो मैं राजनीति में आऊँगा।" उस समय राजीव गांधी एयर इंडिया के पायलट थे। इस तरह शिवराज पाटिल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के अनुरोध पर राजीव गांधी ने 16 फरवरी 1981 को राजनीति में कदम रखा। इसके बाद वह अमेठी उपचुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।

read moreये भी पढ़ें:
पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल का निधन, 91 साल की उम्र में ली आखिरी सांस

सोनिया गांधी बहुत खुश हुई थीं

कहा जाता है कि शिवराज पाटिल के इस कदम से सोनिया गांधी बहुत खुश हुई थीं। 1981 की इस घटना के बाद शिवराज पाटिल सोनिया गांधी के करीबी हो गए। इसकी बानगी कई मौकों पर देखने को मिली। 2004 के लोकसभा चुनावों के बाद केंद्र में UPA की सरकार बनी, तो सोनिया गांधी ने लातूर सीट से लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद शिवराज पाटिल को केंद्रीय गृह मंत्री बनाया था। यह केंद्रीय कैबिनेट में पीएम के बाद दूसरा बड़ा पद था। इसके बाद जुलाई 2004 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया लेकिन जब मुंबई पर 26/11 का आतंकी हमला हुआ तो तत्कालीन यूपीए चेयरपर्सन और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सख्त फैसले का कोपभाजन शिवराज पाटिल को बनना पड़ा और उन्हें गृह मंत्री का पद छोड़ना पड़ा। तब उन पर आरोप लगे थे कि मुंबई में आतंकी हमले हो रहे थे और पाटिल ड्रेस पर ड्रेस बदल रहे थे।

राष्ट्रपति भवन भेजने का था प्लान

2007 में जब राष्ट्रपति पद का चुनाव होने लगा तो वह इस पद के मजबूत दावेदार बनकर उभरे थे। माना जाता है कि सोनिया गांधी ने उन्हें राष्ट्रपति भवन भेजने का प्लान बना लिया था लेकिन यूपीए सरकार में सहयोगी वाम दलों ने शिवराज के नाम पर अड़ंगा लगा दिया और उनकी जगह किसी दूसरे पाटिल की तलाश करने को कहा। तब राजस्थान की तत्कालीन गवर्नर प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया और वह जीतीं।

बाद में शिवराज पाटिल का नाम उप राष्ट्रपति पद के लिए भी चला लेकिन बात नहीं बन पाई। कहा जाता है कि गृह मंत्री के पद से छुट्टी किए जाने के बाद भी शिवराज पाटिल और सोनिया गांधी के रिश्ते खराब नहीं हुए। यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में शिवराज पाटिल को 2010 में पंजाब का गवर्नर और चंडीगढ़ का एडमिनिस्ट्रेटर बनाया गया था। शिवराज पाटिल का 91 साल की उम्र में आज (शुक्रवार, 12 दिसंबर, 2025 को) निधन हो गया।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।