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मरीज के साथ अस्पताल आया था मौलवी इरफान, फिर कैसे बना आतंकी डॉक्टरों गुरु?

मरीज के साथ अस्पताल आया था मौलवी इरफान, फिर कैसे बना आतंकी डॉक्टरों गुरु?

संक्षेप:

बैठकों के दौरान जैश के आतंकियों ने इस मॉड्यूल को दो असॉल्ट राइफलें भी दी थीं। एक राइफल शाहिना सईद की कार- मारुति स्विफ्ट डिजायर से बरामद हुई। शाहिना को इस मॉड्यूल में ‘मैडम सर्जन’ कोडनेम दिया गया था।

Nov 18, 2025 02:33 pm ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली के लाल किले के बाहर हुए कार बम धमाके की जांच में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इस पूरी साजिश को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी साधारण आतंकवादी नहीं थे, बल्कि अपने-अपने क्षेत्रों में पेशेवर, डिग्रीधारी डॉक्टर थे, जिनके मेडिकल लाइसेंस अब रद्द कर दिए गए हैं। इन्हें सुरक्षा एजेंसियों ने ‘टेरर डॉक्टर्स’ का नाम दिया है।

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मौलवी इरफान अहमद से मुलाकात बन गई मोड़

एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इन ‘टेरर डॉक्टर्स’ की कट्टरपंथी सोच की शुरुआत मौलवी इरफान अहमद से हुई, जो जम्मू-कश्मीर के शोपियां का रहने वाला है। इरफान अहमद का नाम पहली बार पिछले सप्ताह खुफिया एजेंसियों ने सामने रखा था, हालांकि तब इससे जुड़ी जानकारी सीमित थी।

अब सामने आया है कि 2023 में सरकारी मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर में इरफान की पहली मुलाकात डॉ. मुज्जमिल शकील और उमर-उन-नबी उर्फ उमर मोहम्मद से हुई। इरफान उस समय एक मरीज के साथ अस्पताल आया था। यहीं से बातचीत शुरू हुई, फोन नंबरों का आदान-प्रदान हुआ और अगले दो साल में इरफान ने दोनों को लगातार मैसेज, कॉल और ऑनलाइन कट्टरपंथी सामग्री के जरिए पूरी तरह कट्टर बना दिया।

फरीदाबाद बना साजिश का केंद्र

मुज्जमिल शकील हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह अस्पताल में काम करता था। जांच में सामने आया कि यहीं, दो किराए के कमरों में, वह बड़ी मात्रा में विस्फोटक जमा कर रहा था। छापेमारी में पुलिस ने 2950 किलो विस्फोटक बरामद किए- जिनमें बड़ा हिस्सा अमोनियम नाइट्रेट का था। उसी का उपयोग लाल किले के बाहर कार बम में किया गया। यह बरामदगी उस विस्फोट से मात्र कुछ घंटे पहले हुई, जिसमें उमर-उन-नबी ने एक कार दिल्ली में लाकर लाल किले के बाहर विस्फोट कर दिया।

टेलीग्राम चैनल के जरिए कट्टरवाद की सप्लाई

खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इरफान अहमद ने न सिर्फ शकील और उमर-उन-नबी को, बल्कि अल-फलाह अस्पताल में उनके अन्य सहयोगियों को भी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित करने की कोशिश की। इसके लिए वह टेलीग्राम पर एक विशेष चैनल चलाता था, जहां चरमपंथी सामग्री साझा की जाती थी। इसके अलावा, इरफान ने इन डॉक्टरों की मुलाकात पाकिस्तान समर्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकियों से भी करवाई। दक्षिण कश्मीर में हुई इन बैठकों में साजिश का पहला खाका तैयार हुआ।

जैश ने दिए दो असॉल्ट राइफल

अधिकारी बताते हैं कि इन बैठकों के दौरान जैश के आतंकियों ने इस मॉड्यूल को दो असॉल्ट राइफलें भी दी थीं। एक राइफल शाहिना सईद की कार- मारुति स्विफ्ट डिजायर से बरामद हुई। शाहिना को इस मॉड्यूल में ‘मैडम सर्जन’ कोडनेम दिया गया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि शाहिना जैश-ए-मोहम्मद की महिला शाखा- जामियत उलेमा-ए-हिंद में एक वरिष्ठ पद पर थी। यह शाखा ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश के संस्थापक ने बनाई थी। दूसरी राइफल श्रीनगर के GMC के लॉकर से बरामद हुई, जो डॉक्टर अदिल अहमद राथर का था।

CCTV ने खोला राज, फिर हुआ बड़ा भंडाफोड़

इस मॉड्यूल का पर्दाफाश तब शुरू हुआ जब अदिल राथर CCTV में जैश समर्थक पोस्टर लगाते हुए पकड़ा गया। राथर को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से गिरफ्तार किया गया और उसकी पूछताछ में पूरा मॉड्यूल पुलिस के सामने खुलने लगा-

  • मुज्जमिल शकील की गिरफ्तारी
  • 2950 किलो विस्फोटक की बरामदगी
  • शाहिना सईद की पहचान
  • लेकिन इन सबके बावजूद पुलिस धमाके को रोक नहीं पाई।

वाइट-कॉलर टेरर इकोसिस्टम

जम्मू-कश्मीर पुलिस का कहना है कि यह मामला एक नई और बेहद चिंताजनक प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है- वाइट-कॉलर टेरर इकोसिस्टम यानी बेहद पढ़े लिखे पेशेवर का आतंकवादी नेटवर्क में शामिल होना। इस मॉड्यूल में शामिल 10 प्रमुख नामों की सूची भी जांच एजेंसियों ने तैयार की है। इनमें उमर-बिन-खत्ताब उर्फ हंजुल्ला भी शामिल है, जो पाकिस्तान में बैठा एक जैश ऑपरेटिव है और इरफान अहमद से लगातार संपर्क में था।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें
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