क्या है रैट-होल माइनर्स, कैसे करते हैं काम? नेपाल में सुरंग के अंदर फंसे 100 लोगों के रेस्क्यू में भारत करेगा मदद

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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रैट होल माइनर्स ऐसी टीम होती है जो छोटे रास्ते से अंदर जाकर फावड़े, कुदाल जैसे हाथ के औजारों से मिट्टी या चट्टान हटाते हैं और मलबे को धीरे-धीरे बाहर निकालते हैं। नेपाल में सुरंग के अंदर फंसे लोगों को बचाने भारतीय टीम मदद करेगी।

How Rat Hole Miners Work
नेपाल में सुरंग के अंदर फंसे 100 लोगों के रेस्क्यू में भारत करेगा मदद

नेपाल में भीषण बाढ़ ने 538 से ज्यादा लोगों की जिंदगियां लील ली है और मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस आपदा के दो दिन बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे 100 से ज्यादा लोगों को बचाने के लिए नेपाली सेना का रेस्क्यू अभियान जारी है। अब भारत ने भी नेपाल की मदद के लिए विशेषज्ञ सुरंग बचाव टीम भेजने की तैयारी कर ली है। इस टीम में सुरंगों में मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन का अनुभव रखने वाले भारतीय सेना के विशेषज्ञ शामिल होंगे। खास बात यह है कि इस तरह की मुश्किल परिस्थितियों में यह टीम 2023 उत्तराखंड के सिलक्यारा आपदा में 17 दिन से फंसे 41 मजदूरों को सुरक्षित निकाल चुकी है। इस खास तकनीक का नाम है- रैट-होल माइनिंग।

भारत के पास हिमालयी क्षेत्रों में कठिन सुरंग बचाव अभियानों का व्यापक अनुभव है। खासतौर पर रैट-होल माइनर्स की मदद से मुश्किल हालात में रेस्क्यू ऑपरेशन करने का। 2023 उत्तराखंड सिलक्यारा आपदा में 41 मजदूर रेस्क्यू हुए थे। 12 नवंबर 2023 की सुबह चमोली जनपद के सिलक्यारा में 200 मीटर अंदर सुरंग का एक हिस्सा ढह गया था। इससे सुरंग में मलबा भर गया था। 41 मजदूर 17 दिनों तक सुरंग के अंदर फंसे रहे। लंबे और बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भारतीय इंजीनियरों और सेना ने सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला था। इंजीनियरों ने रैट-होल माइनर्स तकनीक के जरिए मजदूरों को रेस्क्यू किया था।

क्या है रैट-होल माइनर

‘रैट-होल’ का मतलब होता है चूहे के बिल जैसी संकरी सुरंग। इसमें विशेषज्ञ टीम छोटे रास्ते से अंदर जाकर फावड़े, कुदाल जैसे हाथ के औजारों से मिट्टी या चट्टान हटाते हैं और मलबे को धीरे-धीरे बाहर निकालते हैं। क्योंकि रेस्क्यू के दौरान कई बार मलबा गिरने, सुरंग के दोबारा धंसने के खतरे और ड्रिलिंग मशीन में खराबी जैसी समस्याएं आती हैं। सिलक्यारा रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान भी ऐसा ही हुआ था। तब सेना के इंजीनियरों और रैट-होल माइनर्स ने सुरंग के आखिरी हिस्से में हाथ से खुदाई की थी। इसमें मजदूर एक मैटल की पाइप के अंदर जाकर चट्टान काटते हुए आगे बढ़े। अब यही अनुभव नेपाल में सुरंग के अंदर चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में काम आएगा।

त्रिशूली-3A प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोग

नेपाल के एक जिले रसुवा में स्थित त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में 100 से ज्यादा लोग फंसे हैं। बाढ़ के कारण इलाके में भारी तबाही हुई है। सुरंग के प्रवेश द्वार तक पहुंचना भी बेहद मुश्किल हो गया है। नेपाली सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए दो हेलीकॉप्टर भेजे हैं। नेपाल सेना के प्रवक्ता राजा राम ने बताया कि उनका मुख्य फोकस सुरंग में फंसे लोगों की तलाश और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। उन्होंने बताया कि सुरंग के एंट्री प्वाइंट्स का पता लगाना भी मुश्किल हो रहा है।

भारत भेजेगा रेस्क्यू टीम

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नेपाल के अनुरोध पर भारत सुरंग बचाव टीम भेजने की तैयारी कर रहा है। पहले एक टीम मौके पर जाकर हालात का आकलन करेगी और यह तय करेगी कि रेस्क्यू के लिए किस तरह के उपकरणों की जरूरत होगी। भारत नेपाल को एक मेडिकल टीम भी भेज रहा है। इसके अलावा भारतीय इंजीनियर एक पोर्टेबल बेली ब्रिज लेकर जाएंगे।

बाढ़ से नेपाल को भारी नुकसान

नेपाल में आई विनाशकारी जलप्रलय ने सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर को बर्बाद कर दिया है। नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सहायता की अपील भी की है। हालांकि, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि फिलहाल वह विदेशी रेस्क्यू टीमों के बिना अपने स्तर पर राहत और बचाव अभियान चला रहा है। जरूरत पड़ने पर विशेष मदद या विशेषज्ञता मांगी जाएगी।

Gaurav Kala

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गौरव काला: वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम सदस्य

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