NTA कैसे तैयार करता है प्रश्नपत्र, क्वेश्नन बैंक से लेकर पैकिंग तक की पूरी प्रक्रिया
प्रश्न पत्र तैयार करने के लिए कई चरणों में काम होता है। हर एक चरण में एक्सपर्ट बदल दिए जाते हैं। परीक्षा में जितने प्रश्नों की जरूरत होती है उससे पांच गुना ज्यादा प्रश्नों का बैंक तैयार होता है। इसके बाद इनके उत्तर चेक किए जाते हैं।

यूजीसी नेट (UGC-NET) के तीन विषयों के प्रश्नपत्र में गड़बड़ी पाए जाने के बाद एनटीए ने इन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है। हालांकि इस तरह कमियों कि शिकायत मिलने के बाद एनटीए के पेपर तैयार करने का तरीका सवालों के घेरे में आ गया है। एनटीए साल में दो बार यूजीसी-नेट की परीक्षा करवाता है। यह परीक्षा 87 विषयों के लिए की जा रही है। अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्तर के पेपर में कमियां पाई गई थीं। इसके बाद अभ्यर्थियों ने विरोध किया और एनटीए से इसकी शिकायत की।
कैसे बनता है एनटीए का प्रश्नपत्र
एनटीए का प्रश्नपत्र कई चरणों से गुजरकर बनता है। सबसे पहले तो इसके लिए एक क्वेश्चन बैंक तैयार करवाया जाता है। यह क्वेश्चन बैंक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थाओं के एक्सपर्ट तैयार करतेहैं। उन्हें यह नहीं पता होता कि कौन सा प्रश्न फाइनल पेपर में शामिल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की तरफ से फाइल किए गए हलफनामे के मुताबिक क्वेश्चन बैंक में पेपर से पांच गुना ज्यादा प्रश्न होते हैं।
इसके बाद इन प्रश्नों को मॉडरेटर्स को दिया जाता है। मॉडरेटर अलग-अलग सेट के लिए प्रश्नों का चयन करते हैं। इसके बाद यह भी चेक कर करते हैं कि सिलेबस कवर हो रहा है या नहीं। उत्तरों के सही होने की भी जांच की जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि किसी एक व्यक्ति को पूरे पेपर की जानकारी ना हो।
प्रश्नपत्र का पुनरीक्षण
इसके बाद प्रश्नपत्र को हल किया जाता है। उत्तर को मॉडरेटर्स के उत्तर से मिलाया जाता है। अगर इसमें समानता नहीं होता है तो इस कमी को दूर किया जाता है। इसके लिए मॉडरेटर और पुनरीक्षकों के बीच बैठक होती है। सरकार ने बताया कि अलग-अलग चरणों में एक्सपर्ट भी अलग होते हैं। इसमें किसी भी एक शख्स को दो चरणों में शामिल नहीं किया जाता है।
पेपर का अनुवाद
इसके बाद प्रश्नपत्र का संबंधित भाषा में अनुवाद किया जाता है। एक बार इसे दूसरी भाषा में और फिर वापस अंग्रेजी में ट्रांसलेट करके चेक किया जाता है। एनटीए 13 भाषाओं में परीक्षा करवाता है। अब इसके लिए एआई टूल का भी इस्तेमाल होने लगा है। हालांकि एआई से ट्रांसलेट करने के बाद क्रॉस चेक किया जाता है। जहां पेपर का ट्रांसलेशन होता है वहां कोई भी इंटरनेट ऐक्सेस नहीं होता और ना ही कोई पर्सनल डिवाइस के साथ जाता है।
कैसे बनते हैं पेपर सेट
एनटीए पेपर सिटिंग के लिए सीनियर फैकल्टी के अलग-अलग पैनल बनाए जाते हैं। इसमें शामिल एक्सपर्ट्स के मोबाइल फोन और डिजिटल डिवाइस जमा करवा लिए जाते हैं। वहीं रेफरेंस मटीरियल मौजूद रहताह है। हर एक पैनल में एक कन्वेनर और चार एक्सपर्ट रहते हैं। सभी पैनल अलग-अलग काम करते हैं और उन्हें एक दूसरे के प्रश्नो की जानकारी नहीं रहोती है। इसके बाद रैंडमाइजेशन के जरिए प्रश्न चुने जाते हैं। फाइनल स्टेज तक किसी को पेपर के बारे में जानकारी नहीं होती है।
प्रिटिंग और पैकिंग
एक जानकार ने कहा कि कई बार टाइपो छूट जाती हैं। इसकी जिम्मेदारी प्रूफरीडिंग करने वालों के पास होती है। वे कॉन्ट्रैक्चुअल स्टाफ होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के बाद पेपर को प्रिंटिंग और पैकिंग के लिए भेजा जाता है। अगर एनटीए को किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलती है तो बाद में भी पेपर के सेट बदल दिए जाते हैं। पेपर सेट के बारे में फाइनल डिीजन परीक्षा वाले दिन ही सुबह लिया जाता है। इसके बाद पेपर सील कर दिए जाते हैं।


