मुझे पता होना चाहिए कि पेट्रोल में कितना एथेनॉल है, SC ने सुनते ही खारिज की याचिका

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एक याचिका में मांग की गई थी कि पेट्रोल डलाते वक्त ग्राहकों को पता होना चाहिए कि पेट्रोल में एथेनॉल कितना मिला है। डिस्पेंसिंग नेजल और रसीद पर भी इसकी जानकारी होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

Supreme court
याचिका में की गई थी पेट्रेल में एथेनॉल की मात्रा रसीद पर दर्ज करने की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है जिसमें कहा गया था कि डिस्पेंसिंग नोजल के ऊपर ग्राहकों को दिए जाने वाले पेट्रोल में मिलाए गए एथेनॉल की मात्रा लिखी होनी चाहिए। याचिका में यह भी कहा गया था कि पेट्रोल भराने के बाद बिल पर भी एथेनॉल के प्रतिशत की जानकारी होनी चाहिए। ऐडवोकेट एनके गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका फाइल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहे तो हाई कोर्ट जा सकते हैं।

सुनते ही खारिज हो गई याचिका

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी की बेंच इस मामले में सुनवाई कर रही थी। वहीं याचिकाकर्ता का कहना था कि ग्राहकों को यह जानने का अधिकार है कि वह जो फ्यूल खरीद रहे हैं उसमें क्या-क्या और कितना मिलाया गया है। ऐसे में उन्हें इसकी स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, रसीद में इस बात की जानकारी नहीं होती है कि पट्रोल में क्या मिलाया गया है और ग्राहक क्या खरीद रहे हैं। उनकी याचिका पर अटॉर्नी जनरल ने आपत्ति जताई थी।

क्या है याचिकाकर्ता की मांग

गोस्वामी का कहना था कि यह याचिका उनके निजी लाभ के लिए नहीं बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकार से जुड़ी है। उन्होंने कहा, हर नागरिक को जानने का अधिकार है कि जिसके लिए वह पैसे दे रहे हैं वह क्या है और उसमें क्या मिला है। वहीं अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इस तरह की याचिका सुप्रीम कोर्ट में पहले भी आ चुकी है और उसपर सुनवाई हो चुकी है और याचिका खारिज कर दी गई थी।

कोर्ट में जब वकील ने कहा, यह याचिका ई-20 से संब्धित है। इसपरो कोर्ट ने कहा, आप कौन हैं और आप कहां प्रैक्टिस करते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप यह याचिका लेकर हाई कोर्ट जा सकते हैं। इसपर गोस्वामी ने कहा, हमें जानने का हक है। अगर हम पेट्रोल खरीदते हैं तो कहीं लिखा नहीं रहता है कि यह ई-20 है। उन्होंने कहा, मैं किसी भी पॉलिसी को चुनौती नहीं दे रहा हूं। मैं बस इतना चाहता हूं कि ग्राहकों को सही बात पता हो। हम बिस्किट भी खरीदते हैं तो उसमें लिखा होता है कि यह किन चीजों से मिलकर बना है। हालांकि कोर्ट ने याचिका सुनते ही खारिज कर दी।

याचिका में सड़क एवं परिवहन राजमार्ग मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो. ऑटोमोबाइल इंजीनियरों उपभोक्ता संगठनों. पर्यावरण के जानकारों और जल संसाधन के जानकारों को शामिल करके एक समिति बनाने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपनी मांग वह हाई कोर्ट में रख सकते हैं।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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