कितने बांग्लादेशी घुसपैठिए भेजे वापस? असम के सीएम हिमंता सरमा ने बताया दो साल का आंकड़ा
असम से पिछले दो साल में कितने बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजा गया है? मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को विधानसभा में यह आंकड़ा सामने रखा।

असम से पिछले दो साल में 1600 से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजा गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार को विधानसभा में यह जानकारी दी। एआईयूडीएफ विधायक बदरुद्दीन अजमल के एक सवाल का जवाब देते हुए, सरमा ने सदन में कहाकि यह राज्य नागरिकता के मामले में केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन करता है। इस संबंध में कानूनों को लागू करते समय मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो, इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए गए हैं। गृह और राजनीतिक विभाग भी संभाल रहे सरमा ने कहाकि पिछले दो साल में असम से कुल 1,679 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश भेजा गया है या निर्वासित किया गया है।
कुछ का हुआ निष्कासन
सदन में सूची साझा करते हुए असम के सीएम ने कहाकि अवैध प्रवासियों की पहचान के बाद एक जुलाई 2024 और 30 जून 2026 के बीच उन्हें वापस भेजा गया। जहां कुछ को वापस भेजा गया, वहीं कुछ को निष्कासन का सामना करना पड़ा। जबकि कुछ अवैध प्रवासियों को ‘निर्वासन’ की प्रक्रिया के जरिए उनके देश भेजा गया। हिमंता ने कहाकि अगर उच्च न्यायालय या शीर्ष अदालत में कोई अपील लंबित है, तो संबंधित अवैध प्रवासी को वापस नहीं भेजा जाता है। घुसपैठियों को वापस भेजने के लिए सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहाकि नागरिकता का विषय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।
केंद्र के कानूनों का होता है पालन
हिमंता ने कहाकि राज्य सरकार अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय कानून के मौजूदा प्रावधानों और केंद्र द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन करती है। उन्होंने कहाकि असम सरकार केंद्र की अनदेखी करके किसी अन्य देश के साथ सीधे संपर्क नहीं करती है। सरमा ने कहाकि राज्य सरकार नागरिकता संबंधी मामलों में केंद्र द्वारा जारी किए गए कानूनों और निर्देशों का पालन करती है। इन कानूनों और निर्देशों को लागू करते समय पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए जाते हैं, ताकि किसी व्यक्ति के मानवाधिकारों का उल्लंघन न हो।
सुप्रीम कोर्ट ने पलटा गुवाहाटी हाई कोर्ट का फैसला
गौरतलब है कि सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने कहाकि नागरिकता की स्थिति का निर्धारण एक निष्पक्ष, कानूनी और तर्कसंगत प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के उन फैसलों को रद्द कर दिया, जिनमें कुछ व्यक्तियों को विदेशी घोषित करने के आदेशों की पुष्टि की गई थी।
इसने इस बात पर जोर दिया कि कानून के समक्ष समानता, कानूनों का समान संरक्षण, जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार भारतीय क्षेत्र के भीतर हर व्यक्ति को प्राप्त है। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि उसने अपीलकर्ताओं द्वारा किए गए नागरिकता संबंधी दावों के गुण-दोष की पड़ताल नहीं की है। न्यायालय ने संबंधित न्यायाधिकरणों को निर्देश दिया कि वे उच्च न्यायालय या न्यायाधिकरणों द्वारा की गई किसी भी पिछली टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना, इन मामलों पर नए सिरे से निर्णय लें।
लेखक के बारे में
Deepak Mishraमूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।
आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।
यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।
जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।
अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।


