तमिलनाडु में ‘विजय फैक्टर’ से DMK-AIADMK की लड़ाई कैसे बदल रही? 5 प्वाइंट में पूरी कहानी
आमतौर पर चुनाव नतीजों से पहले ही माहौल बता देता है कि लहर किसके पक्ष में है- कभी DMK तो कभी AIADMK। लेकिन इस बार कहानी अलग है। विजय सबसे बड़ा फैक्टर बनकर उभरे हैं। उनकी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) तीसरी बड़ी ताकत बनकर उभरी है।

तमिलनाडु में वोटों की गिनती जारी है। विजय की TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती दिख रही है। 11.26 बजे तक पार्टी 109 सीटों पर बढ़त बनाए हुए थी। इस बार माहौल बीते चुनावों से काफी अलग दिखाई दे रहा है। आमतौर पर चुनाव नतीजों से पहले ही माहौल बता देता था कि लहर किसके पक्ष में है- कभी DMK तो कभी AIADMK। लेकिन इस बार कहानी अलग है। विजय सबसे बड़ा फैक्टर बनकर उभरे हैं। उनकी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) तीसरी बड़ी ताकत बनकर उभरी है। मौजूदा समय में ‘विजय फैक्टर’ DMK-AIADMK की लड़ाई को बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। 5 प्वाइंट में समझिए पूरी कहानी।
1- कितने अंतर से कौन जीत रहा, ये है असली खेल
तमिलनाडु की राजनीति में आमतौर पर नतीजे निर्णायक होते हैं। 2011 में AIADMK की लहर आई थी, तो 2021 में DMK ने जोरदार वापसी करते हुए 234 में से 159 सीटें जीत ली थीं। लेकिन उस जीत के पीछे भी एक सच छिपा था- कई सीटों पर जीत का अंतर बेहद कम था।
इस बार अब तक की काउंटिंग में तीसरी ताकत बनकर विजय की TVK उभरती दिख रही है। इसलिए आज भी छोटे-छोटे अंतर बड़ा फर्क पैदा कर सकते हैं। अगर DMK धीरे-धीरे हर क्षेत्र में बढ़त बनाती दिखती है, तो इसका मतलब होगा कि सत्ता विरोधी माहौल नहीं बना। लेकिन अगर AIADMK शुरुआती रुझानों में ही अंतर कम रखती है, तो मुकाबला लंबा खिंच सकता है।
2- विजय फैक्टर: सीट नहीं, वोट शेयर से बनेगा खेल
इस चुनाव का सबसे बड़ा सवाल सीटों का नहीं, बल्कि विजय के वोट शेयर का है। अलग-अलग आकलनों में उनका वोट प्रतिशत 15% से लेकर 25% तक बताया जा रहा है। खासकर चेन्नई जैसे शहरी इलाकों में यह और ज्यादा हो सकता है।
लेकिन असली बात यह नहीं कि उन्हें कितने वोट मिले, बल्कि यह है कि ये वोट कहां से आए। अगर उनका समर्थन हर सीट पर थोड़ा-थोड़ा बंटा है, तो वे बिना सीट जीते भी पूरी राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। और अगर कुछ सीटों पर यह वोट केंद्रित हुआ, तो TVK सीधे गेम में एंट्री कर सकती है।
3- DMK मजबूत, लेकिन सहयोगी बना सकते हैं फर्क
DMK इस चुनाव में मजबूत स्थिति में दिख रही है, क्योंकि सरकारी योजनाएं, संगठन और बड़ा चुनावी नेटवर्क उसके पक्ष में दिखाई दे रहा है। लेकिन ये बात नहीं भूलना चाहिए कि गठबंधन की अपनी चुनौतियां भी होती हैं।
सीट बंटवारे से नाराजगी, कमजोर उम्मीदवार और वोट ट्रांसफर में कमी ये सारे फैक्टर जीत का अंतर कम कर सकते हैं। अगर DMK और उसके सहयोगी एक साथ अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो बड़ी जीत मिल सकती है। लेकिन अगर सहयोगी कमजोर रहे, तो जीत तो होगी मगर उतनी प्रभावशाली नहीं।
4- AIADMK के लिए अस्तित्व की लड़ाई
AIADMK के लिए यह चुनाव सिर्फ जीत-हार का नहीं, बल्कि अपनी प्रासंगिकता साबित करने का है। Edappadi K Palaniswami के नेतृत्व में पार्टी ने वापसी की कोशिश की है, लेकिन असली परीक्षा सीटों में दिखेगी।
एक बड़ा सवाल यह भी है कि विजय के वोट किसे नुकसान पहुंचा रहे हैं। AIADMK का मानना है कि इससे DMK का शहरी वोट कटेगा, जबकि DMK का दावा है कि यह एंटी-DMK वोट को बांटेगा। सच शायद हर सीट पर अलग-अलग होगा।
5- पहली तस्वीर चेन्नई से होगी साफ
अगर शुरुआती ट्रेंड देखना है, तो चेन्नई पर नजर रखनी होगी। 2021 में DMK ने यहां की सभी 16 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार यहां असमंजस ज्यादा दिख रहा है। यही शहर बताएगा कि क्या DMK का किला बरकरार है या कहीं पहली दरार पड़ चुकी है।
यह चुनाव ‘कौन जीतेगा’ से ज्यादा ‘कैसे जीतेगा’ का है
तमिलनाडु का यह चुनाव परंपरागत दो-तरफा मुकाबले से हटकर एक जटिल समीकरण बन गया है। DMK बढ़त में दिख रही है, AIADMK वापसी की कोशिश में है। तीसरा उभरता दल ‘विजय का फैक्टर’ पूरी कहानी को बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। इस लिहाज से कहा जा रहा है कि इस चुनाव में कोई स्पष्ट लहर नहीं है।
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लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।
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