Explainer: रोटी, कपड़ा, बिजली... भारत समेत पूरी दुनिया में ईरान युद्ध ने क्या बदला; 11 बड़े असर
ईरान में जारी जंग के चलते फर्टिलाइजर्स की कमी देखी जा रही है। इसका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। इसके अलावा वेनेजुएला की सप्लाई पर भी अमेरिका ने पाबंदियां लगा दी हैं। इसी का असर है कि बड़े पैमाने पर गेहूं का उत्पादन करने वाले ऑस्ट्रेलिया में इसकी खेती का रकबा घटा दिया गया है।

ईरान युद्ध का भारत पर सीधा असर दिख रहा है। अब तक 8 भारतीय मिडल ईस्ट के देशों में मारे जा चुके हैं। इसके अलावा गैस और तेल की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। यही नहीं फर्टिलाइजर्स की कमी की भी आशंकाएं हैं। इससे खेती पर भी असर पड़ सकता है। यह हालत भारत में ही नहीं बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और चीन समेत दुनिया भर में है। पाकिस्तान ने तो सरकारी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम के आदेश दिए हैं और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी बड़ा इजाफा कर दिया है। इस बीच ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, साउथ कोरिया, थाईलैंड, बांग्लादेश समेत तमाम देशों पर असर है। आइए जानते हैं, दुनिया पर दिख रहे हैं कौन से 11 बड़े असर...
1. ईरान में जारी जंग के चलते फर्टिलाइजर्स की कमी देखी जा रही है। इसका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है। इसके अलावा वेनेजुएला की सप्लाई पर भी अमेरिका ने पाबंदियां लगा दी हैं। इसी का असर है कि बड़े पैमाने पर गेहूं का उत्पादन करने वाले ऑस्ट्रेलिया में इस साल की इसकी खेती का रकबा घटा दिया गया है। किसानों को चिंता है कि फर्टिलाइजर महंगा हो जाएगा। बता दें कि दुनिया का एक तिहाई फर्टिलाइजर होर्मुज के रास्ते से ही होकर गुजरता है।
2. साउथ कोरिया को संकट भी दिलचस्प है। वहां सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे कम पानी में नहाएं। ऐसा इसलिए क्यों वहां पानी गर्म करने के लिए जिस ऊर्जा का इस्तेमाल होता है, उसका ज्यादातर आयात पश्चिम एशिया के देशों से ही होता है।
3. थाईलैंड की सरकार ने कर्मचारियों से अपील की है कि वे हाफ शर्ट या टीशर्ट पहनकर ऑफिस आएं। उसने दफ्तरों से अपील की है कि वे एसी का इस्तेमाल कम करें। ऊर्जा बचाने के लिए ऐसा फैसला लिया गया है।
4. फिलीपींस ने ऊर्जा बचाने के लिए एस्केलेटर का प्रयोग कम करने की सलाह दी है। सरकारी कर्मचारियों से इनका कम से कम इस्तेमाल करने को कहा गया है। मिस्र ने तो शॉपिंग के दिन ही घटा दिए हैं।
5. बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कपड़ों के कारोबार को माना जाता है। अब हालात ऐसे हैं कि माल बनकर तैयार है और एयरपोर्ट्स में पड़ा है। इसलिए क्योंकि फ्लाइट्स कैंसिल हो रही हैं।
6. कैंसर की दवाओं की सप्लाई पर भी सीधा असर है। ऐसा इसलिए क्योंकि दुबई और दोहा जैसे शहरों में कार्गो हब बंद किए गए हैं।
7. पार्टी बलून्स की दुनिया में कमी हो सकती है। दुनिया की एक तिहाई हिलीयम गैस का उत्पादन कतर में होता है। अब इसकी कमी आई है तो गैस भरकर बनने वाले ये बलून्स भी कम बन रहे हैं।
8. सऊदी अरब और बहरीन ने फॉर्मूला 1 रेस को हमलों के डर से स्थगित कर दिया है। इसके अलावा शकीरा और क्रिस्टीना जैसी पॉप स्टार्स के दुनिया भर में शो स्थगित हुए हैं।
9. अमेरिका में मकानों के दाम बढ़ गए हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा होने से महंगाई बढ़ रही है। इसमें और इजाफे का डर है।
10. दुनिया में चीनी की कीमत बढ़ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सबसे ज्यादा उत्पादन करने वाले ब्राजील में बायोफ्यूल तैयार करने की दिशा में ज्यादा काम हो रहा है। फिलहाल उसे यही चिंता है कि एनर्जी के संकट से बचा जाए। भले ही चीनी के उत्पादन को कम कर लिया जाए।
11. सोने को सुनहरा निवेश माना जाता था, लेकिन अब इसमें भी गिरावट है। वहीं श्रीलंका ने बुधवार को भी अवकाश घोषित कर दिया है। इसके अलावा लाओस में तो तीन दिन के स्कूल की नीति लागू हो गई है।
लेखक के बारे में
Surya Prakashदुनियादारी में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। समकालीन राजनीति पर लिखने के अलावा सामरिक मामलों, रणनीतिक संचार और सभ्यतागत प्रश्नों के अध्ययन में रुचि रखते हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले सूर्यप्रकाश को पत्रकारिता जगत में करीब डेढ़ दशक का अनुभव है। 10 वर्षों से ज्यादा समय से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं। लाइव हिन्दुस्तान के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं राज्यों से संबंधित खबरों का संपादन करते हैं एवं डेस्क इंचार्ज के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। समाचारों के त्वरित प्रकाशन से लेकर विस्तृत अध्ययन के साथ एक्सप्लेनर आदि में भी रुचि रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज प्रकाशित करने और खबरों के अंदर की खबर को विस्तार से समझाने में रुचि रखते हैं। हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को समझते हैं और उसके अनुसार ही पाठकों को खबरें देने के लिए तत्परता रखते हैं।
अकादमिक योग्यता: एक तरफ डेढ़ दशक का सक्रिय पत्रकारिता करियर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ सूर्यप्रकाश अकादमिक अध्ययन में भी गहरी दिलचस्पी रखते रहे हैं। पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन और मास्टर्स की पढ़ाई के साथ ही 'हाइब्रिड वारफेयर में मीडिया के इस्तेमाल' जैसे महत्वपूर्ण एवं उभरते विषय पर पीएचडी शोध कार्य भी किया है। पत्रकारिता, समाज, साहित्य में रुचि के अलावा वारफेयर में मीडिया के प्रयोग पर भी गहरा अध्ययन किया है। इसी कारण डिफेंस स्टडीज जैसे गूढ़ विषय में भी वह रुचि रखते हैं। इस प्रकार सूर्यप्रकाश का एक लंबा पेशेवर अनुभव रहा है तो वहीं गहरी अकादमिक समझ भी रही है।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय महत्व के समाचारों में गहरी दिलचस्पी रखते हैं तो वहीं नैरेटिव वारफेयर के बारे में भी गहरा अध्ययन है। खबरों के अंदर की खबर क्या है और किसी भी समाचार के मायने क्या हैं? ऐसी जरूरी चीजों को पाठकों तक पहुंचाने में भी रुचि रखते हैं। लाइव हिन्दुस्तान में बीते 5 सालों से जुड़े हैं और गुणवत्तापूर्ण समाचार देने की मुहिम को बल प्रदान किया है। सूर्यप्रकाश को पाठकों की पसंद को समझने और उसके अनुसार समाचारों के प्रस्तुतिकरण में भी महारत हासिल है। कठिन विषयों को सरल शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने की रुचि है और इसी कारण एक्सप्लेनर आदि भी लिखते हैं।
और पढ़ें

