Hindi NewsIndia NewsHow did the Indus Valley Civilization end thousands of years ago IIT scientists make claim
अचानक नहीं खत्म हुई थी सिंधु घाटी सभ्यता, IIT के वैज्ञानिकों का बड़ा दावा; बताई यह वजह

अचानक नहीं खत्म हुई थी सिंधु घाटी सभ्यता, IIT के वैज्ञानिकों का बड़ा दावा; बताई यह वजह

संक्षेप:

आईआईटी गांधीनगर के वैज्ञानिकों का दावा है कि सिंधु घाटी सभ्यता अचानक नहीं बल्कि सैकड़ों वर्षों में धीरे- धीरे नष्ट हुई। उनका कहना है कि मौसम में बदलाव की वजह से लगातार सूखे पड़ते थे। इस वजह से लोगों के सामने खाद्यान्न का संकट खड़ा हो गया था।

Nov 30, 2025 11:12 am ISTAnkit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

उन्नत, समृद्ध और बेहद रहस्यमय मानी जाने वाली प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के निशान भारत और पाकिस्तान में पाए जाते हैं। यह आज भी रहस्य बना हुआ है कि आखिर इतनी उन्नत सभ्यता गायब कैसे हो गई? हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल और राखीगढ़ी तक इस सभ्यता के नमूने पाए गए हैं। सभ्यता के खात्मे को लेकर अब तक कई तरह के दावे किए गए हैं। इनमें महामारी, बाढ़, भूकंप और उल्कापात जैसी कई बातें की जाती रही हैं। अब आईआईटी गांधीनगर के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि लंबे समय तक सूखे के प्रकोप के चलते यह सभ्यता नष्ट हो गई।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

सिंधु घाटी सभ्यता को सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से भी जानते हैं। यह सभ्यता 5000 से 3500 ईसा पूर्व तक फलती-फूलती थी। यह सभ्यता अपने शहरों के लिए जानी जाती है। खुदाई में मिले अवशेषों और शहरों को देखकर पता चलता है कि उनके शहर और पानी निकासी का सिस्टम और सड़कें कितनी उन्नत थीं। इसके अलावा वे धातु का भी उपयोग जानते थे। रोजमर्रा के इस्तेमाल में मिट्टी के बर्तन ही लाए जाते थे। इस सभ्यता के लोग खेती पर निर्भर थे और वे अनाज को लंबे समय तक सुरक्षित रखना भी जानते थे।

आईआईटी गांधीनगर में विमल मिश्रा की अगुआई में शोध में पाया गया कि इस सभ्यता को लगातार सूखे का सामना करना पड़ा। सभ्यता का पतन अचानक नहीं हुआ बल्कि यह धीरे-धीरे समाप्त हो गई। 11 पन्ने के रिसर्च पेपर में दावा किया गया है कि पानी की कमी की वजह से ही बहुत सारे लोगों की मौत हो गई और कुछ पलायन भी कर गए।

लगातार पड़ने लगे सूखे

सिंधु सभ्यता सिंधु नदी पर ही आधारित थी। इस पानी से वे खेती करते थे। मॉनसून और मौसम की गतिविधियों में परिवर्तन की वजह से बारिश में 10 से 20 फीसदी की गिरावट आ गई थी। वहीं औसत तापमान 0.5 डिग्री बढ़ गया। 85 साल में कम से कम चार बेहद गंभीर सूखे पड़े। एक बार तो 164 साल का सूखा पड़ गया जिसमें सभ्यता नष्ट हो गई।

नदियों में पानी की कमी

बारिश कम होने की वजह से नदियां भी सूखने लगी थीं। आर्कियो बोटैनिकल तथ्यों के मुताबिक पानी की कमी की वजह से सिंधु सभ्यता के लोगों ने गेहूं और अन्य अनाजों को छोड़कर दूसरी फसलों को उगाने की कोशिश की लेकिन वे नाकामयाब हो गए। पुरानी झीलों और गुफाओं के सर्वे से पता चलता है कि इस क्षेत्र में पानी की तेजी से कमी हो रही थी। लगभग दो शताब्दी तक चले सूखे ने पूरी सभ्यता को हिलाकर रख दिया। धीरे-धीरे बड़े-बड़े शहर छोटे कबीलों में बदल गए।

रिसर्च में पाया गया है कि उत्तरी अटलांटिक में ठंड बढ़ने से भारत का मॉनसून कमजोर होने लगा था। प्रशांत और हिंद महासागर का तापमान बढ़ने की वजह से बारिश कम होने लगी। समुद्र गर्म होने की वजह से धरती से तापमान का अंतर कम हो गया और मॉनसून कमजोर होने लगा। ऐसे में मौसम पूरी तरह बदल गया। लोग कम बारिश की वजह से सिंधु नदी के पास ही बसने लगे। धीरे-धीरे कम होती आबादी, कृषि की बर्बादी और खाद्यान्न की कमी की वजह से सभ्यता का पतन होता चला गया।

Ankit Ojha

लेखक के बारे में

Ankit Ojha
अंकित ओझा पिछले 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। अंकित ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से स्नातक के बाद IIMC नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया है। इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर डिग्री हासिल की है। राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर कार्य करने का उनके पास अनुभव है। इसके अलावा बिजनेस और अन्य क्षेत्रों की भी समझ रखते हैं। हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही पंजाबी और उर्दू का भी ज्ञान है। डिजिटल के साथ ही रेडियो और टीवी के लिए भी काम कर चुके हैं। और पढ़ें
इंडिया न्यूज़ , विधानसभा चुनाव और आज का मौसम से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में | लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।