बॉयफ्रेंड ने की मदद, गहरी खाई; राजा रघुवंशी से कितनी मिलती है केतन अग्रवाल मर्डर की कहानी?
इन दोनों मामलों की समानता यह सबक देती है कि शादियों के इस भव्य तामझाम के बीच दो इंसानों के बीच की आपसी सहमति, ईमानदारी और उनके मानसिक झुकाव को परखना कितना जरूरी हो गया है।

Ketan Agrawal Murder Case: वक्त का फासला करीब एक साल का और दूरी सैकड़ों किलोमीटर की, लेकिन जब इन दोनों घटनाओं के पन्ने खुले तो इनके पीछे की समानता देखकर पुलिस और समाज दोनों दंग रह गए। दो रईस और रसूखदार परिवारों के नौजवान लड़के अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करने जा रहे थे। दोनों को ही यह गुमान था कि वे अपनी जीवनसंगिनी के साथ सुनहरे भविष्य की नींव रख रहे हैं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिन्हें वे हमसफर समझ रहे हैं वही उनकी मौत की पटकथा लिख रही थीं।
2 जून 2025 को मेघालय की एक गहरी खाई में एक दूल्हे की लाश मिलती है जो वहां अपना हनीमून मनाने गया था। ठीक इसके एक साल बाद जून 2026 में महाराष्ट्र के एक मशहूर किले की खाई से एक और नौजवान का शव बरामद होता है, जिसकी कुछ ही महीनों बाद आलीशान शादी होने वाली थी। राजा रघुवंशी और केतन अग्रवाल इन दोनों की मौत की कड़ियां एक ही खौफनाक हकीकत से जुड़ी हैं। इन दोनों की हत्या का आरोप उन्हीं महिलाओं पर है जिनके साथ वे सात जनम बिताने के वादे कर चुके थे।
राजा रघुवंशी हत्याकांड की कहानी
इंदौर के सहकार नगर का एक प्रतिष्ठित और जाना-माना नाम है रघुवंशी परिवार। तीन भाइयों में सबसे छोटे राजा रघुवंशी अपने भाइयों सचिन और विपिन के साथ मिलकर पारिवारिक बिजनेस 'रघुवंशी ट्रांसपोर्ट' संभालते थे। साल 2007 से चल रहा यह बिजनेस इंदौर के कई बड़े स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को बसें मुहैया कराता है। तभी इस कहानी में एंट्री होती है सोनम रघुवंशी की। सोनम कुशवाहा नगर के एक बड़े प्लाईवुड फैक्ट्री मालिक देवी सिंह रघुवंशी की बेटी है। सोनम सिर्फ नाम की बेटी नहीं है, बल्कि अपने पिता के पूरे बिजनेस यानी कि बिलिंग, अकाउंट्स और सुपरविजन को अकेले संभालती थी।
पारंपरिक रिश्ते से शुरू हुआ सफर
दोनों परिवारों की मुलाकात समाज की वैवाहिक डायरेक्ट्री के जरिए हुई थी। दोनों का पहले से कोई संबंध नहीं था। मुलाकात हुई, बातचीत जमी और दोनों ने शादी के लिए हां कह दिया। 11 मई को बड़े ही धूमधाम से दोनों की शादी संपन्न हुई। शादी के महज 9 दिन बाद दोनों हनीमून के लिए मेघालय रवाना हो गए। लेकिन 2 जून 2025 को वह खबर आई जिसने रघुवंशी परिवार को ताउम्र का दर्द दे दिया। मेघालय की एक गहरी खाई में राजा रघुवंशी का लहूलुहान शव मिला। उसके सिर पर गहरे जख्म थे, जो किसी तेज धारदार हथियार के वार के थे। राजा का फोन बंद था। कोई आखिरी मैसेज या कॉल नहीं था। और सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि सोनम वहां से गायब थी।
प्रेमी के साथ मिलकर दी वारदात को अंजाम
जब पुलिस ने तफ्तीश शुरू की तो परतें खुलती चली गईं। यह कोई हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी और क्रूर हत्या थी। पुलिस जांच में सामने आया कि सोनम का अपनी पिता की फैक्ट्री के बिलिंग डिपार्टमेंट में काम करने वाले राज कुशवाहा नाम के लड़के से प्रेम प्रसंग था। सोनम ने अपने इसी प्रेमी के साथ मिलकर राजा की हत्या की पूरी साजिश रची थी। आज सोनम और उसका प्रेमी राज कुशवाहा दोनों सलाखों के पीछे हैं, लेकिन रघुवंशी परिवार का इकलौता चिराग हमेशा के लिए बुझ गया।
केतन अग्रवाल हत्याकांड
यह घटना अभी हाल ही की यानी 18 जून 2026 की है। पुणे के पास पिंपरी-चिंचवड़ के एक बेहद रसूखदार और बड़े कंस्ट्रक्शन बिजनेसमैन विशाल अग्रवाल के बेटे केतन अग्रवाल अपनी मंगेतर सिया गोयल का जन्मदिन मनाने के लिए लोनावला के पास ऐतिहासिक लोहगढ़ किले पर ट्रैकिंग के लिए गए थे। शुरुआती कहानी जो सिया ने पुलिस को सुनाई वो यह थी कि किले के किनारे फोटो खिंचवाते वक्त केतन का पैर फिसल गया और वह गहरी घाटी में गिर गया। स्थानीय रेस्क्यू टीम को केतन का शव बाहर निकालने में तीन घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
मोबाइल डेटा ने खोल दिया मंगेतर का राज
पुलिस को सिया के बयानों पर कुछ शक हुआ। जब पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की तो मोबाइल डेटा खंगाला, कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) निकाले और मौके पर मौजूद चश्मदीदों से बात की तो सिया की गढ़ी हुई कहानी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। असल में सिया इस शादी से खुश नहीं थी और वह केतन से शादी नहीं करना चाहती थी। सिया का अपने सहकर्मी चेतन चौधरी के साथ अफेयर चल रहा था। जन्मदिन के बहाने रचे गए इस ट्रैकिंग ट्रिप के दौरान सिया को मौका मिल गया। पुलिस के मुताबिक, सिया और उसके प्रेमी चेतन ने मिलकर केतन को जानबूझकर उस गहरी खाई में धकेल दिया।
पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस के एसएसपी संदीप सिंह गिल के मुताबिक, "जांच के दौरान यह साफ हो गया है कि वारदात के वक्त सिया का प्रेमी चेतन चौधरी भी उसी लोकेशन पर मौजूद था। दोनों आरोपियों ने केतन अग्रवाल की हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने की बात कबूल कर ली है।"
महलों में गूंजनी थी शहनाई पर छा गया मातम
केतन और सिया की शादी इसी साल नवंबर के महीने में उदयपुर में होनी थी। अग्रवाल परिवार ने इस शादी के लिए जयपुर में 17 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम देकर एक आलीशान महल बुक किया था। मेहमानों को लाने-ले जाने के लिए दो प्राइवेट जेट तक बुक हो चुके थे। तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही थीं, दोनों परिवार बेहद खुश थे। लेकिन किसे पता था कि शहनाई गूंजने से पहले ही मौत का मातम पसर जाएगा। सिया गोयल अब पुलिस की गिरफ्त में है और अपने किए की सजा भुगतने की राह पर है।
इन दोनों ही मामलों ने अरेंज मैरिज और पारंपरिक पारिवारिक व्यवस्थाओं पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। समाजशास्त्रियों और अपराध विशेषज्ञों के मुताबिक, हाल के दिनों में ऐसे मामलों में तेजी आई है जहां युवाओं पर परिवार के दबाव में शादी करने का संकट होता है। अक्सर युवा अपने प्रेम संबंधों को परिवार के सामने जाहिर नहीं कर पाते या परिवार के रसूख और जातिगत बंधनों के आगे घुटने टेक देते हैं। सिया और सोनम दोनों ही मामलों में युवतियों ने शादी के लिए हां तो कह दिया, लेकिन वे मन ही मन अपने अतीत या प्रेम को छोड़ नहीं पाईं।
कई मामलों में देखा गया है कि आरोपी न सिर्फ अपने रास्ते का कांटा हटाना चाहते हैं, बल्कि पीड़ित परिवार की संपत्ति या स्टेटस का फायदा भी उठाना चाहते हैं। जैसे राजा के मामले में सोनम का बिजनेस बैकग्राउंड और केतन के मामले में करोड़ों की शादी।
इन दोनों मामलों की समानता यह सबक देती है कि शादियों के इस भव्य तामझाम के बीच दो इंसानों के बीच की आपसी सहमति, ईमानदारी और उनके मानसिक झुकाव को परखना कितना जरूरी हो गया है। वरना मंडप सजने से पहले ही जिंदगी की खाई तैयार हो जाती है।
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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