प्यार करने वाले लड़के और लड़की के भागने को कैसे रोक सकती है सरकार, सुप्रीम कोर्ट में बहस

भाषा
Follow us on Google News
share

सुप्रीम कोर्ट में pocso act से जुड़े एक केस की सुनवाई चल रही थी, जिसमें न्यायाधीशों ने सहमति से संबंध बनाने वाले किशोरों पर इस कानून के दुरुपयोग पर चिंता जाहिर की है। साथ ही सुनवाई कर रहे जजों ने सवाल भी किया है।

Supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सवाल किया कि सरकार या प्रशासन प्रेम संबंधों के कारण लड़का-लड़की के घर छोड़कर भागने को कैसे रोक सकता है? इसके साथ ही अदालत ने आपसी सहमति से संबंध बनाने वाले किशोरों के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के दुरुपयोग पर चिंता जताई। जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने टिप्पणी की कि जब किशोर लड़कियां अपने साथियों के साथ भाग जाती हैं, तो माता-पिता अक्सर अपनी तथाकथित 'इज्जत' की रक्षा के लिए आपराधिक कार्यवाही का सहारा लेते हैं।

अदालत ने कहा, 'सरकार या प्रशासन किसी लड़की और लड़के के भागने को कैसे रोक सकता है? पॉक्सो बच्चों के यौन उत्पीड़न और शोषण के खिलाफ है।' पीठ ने कहा कि 15 से 18 वर्ष की आयु बेहद संवेदनशील होती है। पीठ ने कहा, 'यह प्रयोग करने की उम्र है। सवाल यह है कि क्या यह वास्तव में पॉक्सो का मामला बनता है?' शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी किशोरों के निजता के अधिकार से जुड़े एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान की।

पूरा केस समझें

यह मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय के 2023 के एक विवादास्पद फैसले के बाद शुरू हुआ था, जिसमें किशोर लड़कियों से रिश्तों में उलझने के बजाय अपनी यौन इच्छाओं पर 'नियंत्रण' रखने को कहा गया था। उच्च न्यायालय के इस फैसले को 2024 में शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था। तब शीर्ष अदालत ने किशोरों के निजता के अधिकार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया था और कई निर्देश जारी किए थे।

नाबालिग के वयस्क के साथ भागने से हुई शुरुआत

मामले में अदालत की सहायता कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने कहा कि इस मामले की शुरुआत एक नाबालिग लड़की के 25 वर्षीय पुरुष के साथ भागने से हुई थी। उन्होंने पीठ को बताया कि अदालत द्वारा गठित एक समिति द्वारा पीड़ित युवती से बातचीत करने के बाद इस व्यक्तिगत मामले को बंद कर दिया गया है।

माधवी ने कहा, 'पॉक्सो मामलों में व्यवस्था की विफलता को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल की गई थी।' उन्होंने यह भी बताया कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के तहत नाबालिग कुछ पुनर्वास उपायों के हकदार हैं।

कोर्ट के सवाल

पीठ ने उनसे पूछा कि क्या यह भागने का मामला था या अपहरण का, जिस पर दीवान ने जवाब दिया कि कथित पीड़िता उस पुरुष के साथ रहना चाहती थी और उनका एक बच्चा भी है। पीठ ने टिप्पणी की, '16 से 18 साल की उम्र में किशोर आपस में संबंध बनाकर घर से चले जाते हैं।' माता-पिता अपनी तथाकथित इज्जत बचाने के लिए उन पर आपराधिक मामला मढ़ देते हैं और अंत में हमें उन्हें बरी करना पड़ता है।

कानून की जरूरत

दीवान ने दलील दी कि कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक व्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आपसी सहमति से बने रिश्तों में शामिल किशोरों को पॉक्सो के तहत जेल भेज दिया जाता है। उन्होंने युवाओं को जागरूक करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा, 'पीड़ित लड़की अब अपने पति के साथ है और खुश है। व्यापक मुद्दा किशोरों के कल्याण और बाल संरक्षण के उपाय अपनाना है।'

पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 जुलाई की तारीख तय की। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि किशोरों के बीच ऐसे शारीरिक संबंध वर्ष 2012 में 'सहमति की उम्र' 16 से बढ़ाकर 18 वर्ष किए जाने से पहले भी बन रहे थे।

पीठ ने कहा, 'ऐसा नहीं है कि ये मामले 2012 के बाद ही शुरू हुए हैं। ये मामले बहुत पहले से होते आ रहे हैं; पहले बाल विवाह भी होते थे। लेकिन जब सहमति की उम्र बढ़ाकर 18 वर्ष कर दी गई, तो यह अवैध हो गया।' इसके साथ ही अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि उसके द्वारा दिए जाने वाले निर्देश व्यावहारिक होने चाहिए।

Nisarg Dixit

लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव और Sawan 2026 से जुड़ी ताज़ा खबरों व पल-पल के अपडेट के लिए लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े रहें। UP Chunav 2027 , UP Vidhan Sabha Seats और UP Vidhan Sabha Candisates से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें और जानकारी यहां पढ़ें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।