एके एंटनी ने कैसे बदल दिया राहुल गांधी का मन और सीएम की रेस से बाहर हुए वेणुगोपाल; इनसाइड स्टोरी
सूत्रों का कहना है कि खुद सोनिया गांधी ने एके एंटनी से बात की तो उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर वीडी सतीशन के नाम पर ज्यादा लोग सहमत हैं। अंत में जब सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने चर्चा की तो फिर मन बदल गया। एके एंटनी की राय जानने के बाद राहुल गांधी का पलड़ा भी वीडी सतीशन की ओर ही झुका।

केरल के मुख्यमंत्री पद की रेस के विजेता वीडी सतीशन बनकर उभरे हैं। राहुल गांधी के बेहद करीबी लोगों में शुमार केसी वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया है। इस तरह केरल में कांग्रेस ने कठिन फैसला लिया और कहा जा रहा है कि भले ही इसमें वक्त लगा, लेकिन यह दुरुस्त निर्णय है। ऐसा इसलिए क्योंकि केरल में वीडी सतीशन के नाम पर जमीनी स्तर पर ज्यादा सहमति थी। केरल का संगठन उन्हें चाहता था। इसके अलावा जनता में भी उनकी पकड़ है और सहयोगी दल भी उनके नाम पर सहमत हैं। इन सभी फैक्टर्स के बाद भी राहुल गांधी कई दिनों तक केसी वेणुगोपाल के नाम पर ही सहमत थे, लेकिन अंत में उनकी राय को एके एंटनी ने बदल दिया।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि जब सीएम की रेस को लेकर मामला उलझ गया तो कांग्रेस लीडरशिप ने केरल से ही आने वाले दिग्गज नेता एके एंटनी से संपर्क साधा। वह सोनिया गांधी के भी करीबी माने जाते हैं। कहा जा रहा है कि खुद सोनिया गांधी ने एके एंटनी से बात की तो उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर वीडी सतीशन के नाम पर ज्यादा लोग सहमत हैं। अंत में जब सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने चर्चा की तो फिर मन बदल गया। एके एंटनी की राय जानने के बाद राहुल गांधी का पलड़ा भी वीडी सतीशन की ओर ही झुका। इस तरह केरल में सीएम की रेस की रस्साकशी खत्म हुई और कांग्रेस को अपना नया नेता मिल गया।
यूपीए सरकार के कार्यकाल में एके एंटनी रक्षा मंत्री जैसे अहम पद पर थे। उन्हें सोनिया गांधी के भरोसेमंद लोगों में माना जाता है और वह खुद केरल के ही रहने वाले हैं और राज्य के सीएम भी रहे हैं। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के नाम पर मतभेद गहराने के बाद एके एंटनी की ही राय ली गई। एके एंटनी केरल के तीन बार सीएम रहे हैं। आखिरी बार 2001 में वह मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन 2004 के लोकसभा चुनाव में केरल में हार के बाद उन्होंने जिम्मेदारी लेते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद कांग्रेस की ओर से ओमान चांडी केरल के सीएम बने थे। वहीं एंटनी को केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया था।
2014 में भी एके एंटनी ने दी थी एक रिपोर्ट, जिससे बदला कांग्रेस का रुख
एंटनी की कांग्रेस के संगठन में पकड़ को इसी से समझा जा सकता है कि जब 2014 में पार्टी की सत्ता से विदाई हुई थी तो समीक्षा के लिए एक कमेटी का गठन हुआ था। इसका नाम ही एके एंटनी कमेटी था। इस कमेटी ने एक रिपोर्ट दी थी, जिसमें कहा गया था कि ऐसा संदेश गया था कि कांग्रेस हिंदुओं की पार्टी नहीं है। अल्पसंख्यकों का ज्यादा तुष्टिकरण करती है और यही हार की वजह भी बना। माना जाता है कि उनकी इस रिपोर्ट के बाद ही कांग्रेस ने सॉफ्ट हिंदुत्व की राह भी पकड़ी थी।
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