34 साल बंगाल में, 25 साल बाद त्रिपुरा और अब केरल भी, एक-एक कर कैसे ढह गए लेफ्ट के 3 सबसे मजबूत किले?

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भारत में लेफ्ट के तीन सबसे मजबूत किलों में केरल, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा माने जाते हैं। इन तीनों ही राज्यों में अब लेफ्ट का किला ढह चुका है। 2011 में प. बंगाल, 2018 में त्रिपुरा और अब 2026 में केरल भी लेफ्ट के हाथ से निकल गया।

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साल 1957 में केरल विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित किए गए। 126 सीटों पर हुए इन चुनावों में कन्यूनिस्ट पार्टी ने 63 सीटों पर जीत दर्ज की। इस जीत के बाद ही ई.एम.एस नंबूदरीपाद मुख्यमंत्री बने। देश में पहली बार किसी राज्य में लेफ्ट की सरकार बनी। इसके बाद कई राज्यों में लेफ्ट की सरकार बनी। इनमें पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में तो लेफ्ट ने लंबे समय तक सरकार चलाई। फिर केरला में भी 10 सालों तक लगातार मुख्यमंत्री रहने के बाद पिनाराई विजयन के नेतृत्व में लेफ्ट की हार हुई है। इस तरह पिछले 16 सालों में लेफ्ट के 3 सबसे मजबूत किले एक-एक कर ढह गए।

पश्चिम बंगाल में खत्म हुआ था 34 सालों का 'राज'

साल 1977 वो दौर था, जब कांग्रेस पूरे उत्तर भारत से लगभग साफ हो गई थी। लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। कांग्रेस 294 में से मात्र 20 सीटें जीत पाई। इन चुनावों में लेफ्ट को कुल 230 से ज्यादा सीटों पर जीत मिली थी और उसने सरकार बनाई थी। लेफ्ट ने सीएम पद के लिए ज्योति बसु को चुना था। साल 1977 से लेकर साल 2000 हजा तक ज्योति बसु पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद भी पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की सरकार रही और बुद्धदेव भट्टाचार्य ने अगले 11 साल तक अपने नेतृत्व में सरकार चलाई। साल 2011 में हुए विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की टीएमसी ने लेफ्ट को बुरी तरह हराया और 34 से लगातार चले आ रहे लेफ्ट शासन का पश्चिम बंगाल से अंत कर दिया। इस तरह भारत में सबसे ज्यादा दिनों तक शासन करने के बाद लेफ्ट का एक मजबूत किला ढह गया।

त्रिपुरा में 25 साल बीजेपी ने ढहाया लेफ्ट का किला

पश्चिम बंगाल में हुए 1977 के चुनावों के बाद 1978 में ही त्रिपुरा में भी लेफ्ट की सरकार बन गई थी। इस दौरान नृपेन चक्रवर्ती करीब 10 सालों तक मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद 1988 से लेकर 1993 तक लेफ्ट की सरकार त्रिपुरा में रही। 1993 में हुए चुनावों में लेफ्ट ने एक बार फिर से त्रिपुरा में जीत दर्ज की और इसके बाद लगातार साल 2018 तक त्रिपुरा में करीब 25 साल तक शासन किया। साल 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने लेफ्ट को हराया और लगातार 25 सालों से चले आ रहे शासन का अंत कर दिया। इस तरह भारत में लेफ्ट का दूसरा सबसे मजबूत किला भी ढह गया। अब बारी थी, आखिरी सबसे मजबूत किले की।

केरल में भी हार गए

1957 में केरल विधानसभा चुनावों में मिली जीत के बाद प्रदेश में कई बार लेफ्ट की सरकार बनी। इस दौरान अलग-अलग समय पर अलग-अलग मुख्यमंत्रियों ने कार्यकाल संभाला। साल 2016 के विधानसभा चुनावों में जीत मिलने के बाद लेफ्ट ने पिनाराई विजयन को केरल का सीएम बनाया और दो लगातार विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की। साल 2026 के चुनावी नतीजे लेफ्ट के खिलाफ गए, यहां कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन जीत रहा है। इस तरह एक-एक कर पूरे देश में लेफ्ट के तीन सबसे मजबूत किले ढह गए।

Mohammad Azam

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मोहम्मद आजम पिछले 3.5 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में बतौर कंटेंट प्रोडूसर काम कर रहे हैं।


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आजम ने ग्रेजुएशन तक विज्ञान की पढ़ाई की है, लेकिन राजनीतिक विषयों में रुचि उनको पत्रकारिता की तरफ खींच लाई। आजम ने अपना पोस्ट ग्रेजुएशन देश के अग्रणी संस्थानों में से एक भारतीय जनसंचार संस्थान से पूरा किया। विज्ञान बैकग्राउंड होने के चलते आजम को फैक्ट आधारित पत्रकारिता करने में महारत हासिल है।


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