राष्ट्र निर्माण में हाउसवाइफ का अहम योगदान, 30 हजार आमदनी; SC ने दिया मुआवजा देने का आदेश

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस नियम का अक्षरशः पालन किया जाए और दुर्घटना के मुकदमों को आमतौर पर 1 वर्ष के भीतर तय किया जाना चाहिए, ताकि पीड़ितों को दशकों तक न्याय के लिए भटकना न पड़े।

राष्ट्र निर्माण में हाउसवाइफ का अहम योगदान, 30 हजार आमदनी; SC ने दिया मुआवजा देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसों में जान गंवाने वाली घरेलू महिलाओं के योगदान को सम्मान देते हुए एक ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील फैसला सुनाया है। अदालत ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत मिलने वाले मुआवजे में पत्नी की घरेलू देखभाल के नुकसान को एक बिल्कुल अलग और नया आधार माना है। अदालत ने साफ तौर पर कहा कि गृहणियों के इस अमूल्य योगदान को केवल घरेलू काम नहीं कहा जा सकता, बल्कि वे देश के निर्माण में भूमिका निभाती हैं।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. के. सिंह की पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा, "एक गृहणी इंसान और राष्ट्र दोनों के विकास में अपना अमूल्य योगदान देती है। हम उम्मीद और विश्वास करते हैं कि होममेकर शब्द को अब समाज में नेशन बिल्डर के रूप में पहचान और सम्मान मिलेगा।"

अदालत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि एक मां, पत्नी या गृहणी द्वारा परिवार के लिए की जाने वाली निस्वार्थ देखभाल और सेवा को पैसों में कैसे आंका जाए? इस पर ऐतिहासिक सिद्धांत तय करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी सड़क हादसे के मामले में एक गृहणी की घरेलू देखभाल के नुकसान की मासिक वैल्यू कम से कम 30,000 प्रति माह मानी जाएगी। यह राशि सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध नेशनल इंश्योरेंस कंपनी बनाम प्रणय सेठी (2017) मामले में तय किए गए मुआवजे के स्थापित नियमों के अलावा अतिरिक्त रूप से दी जाएगी।

क्या था मामला?

यह फैसला साल 2001 में पंजाब में हुए एक सड़क हादसे से जुड़े मामले में आया है, जिसमें दो जीपों की टक्कर में रेश्मा नामक महिला की मौत हो गई थी। मृतका के पति और तीन बच्चों ने मुआवजे के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की। दिसंबर 2024 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस परिवार को करीब 8 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस राशि को नाकाफी बताते हुए पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने मुआवजे की राशि में यह ऐतिहासिक बढ़ोतरी की है।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को निर्देश

2001 के हादसे का फैसला 2026 तक खींचने पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने देश के सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से अनुरोध किया है कि वे मोटर वाहन दुर्घटना दावों की प्रगति की खुद निगरानी करें।

कानून की धारा 169 के तहत यह प्रावधान है कि ऐसे मामलों का निपटारा संक्षिप्त प्रक्रिया के तहत तेजी से किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस नियम का अक्षरशः पालन किया जाए और दुर्घटना के मुकदमों को आमतौर पर 1 वर्ष के भीतर तय किया जाना चाहिए, ताकि पीड़ितों को दशकों तक न्याय के लिए भटकना न पड़े।

इस खबर पर आपकी क्या राय है?

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

और पढ़ें
Hindi News , इंडिया न्यूज़ , आज का मौसम , विधानसभा चुनाव और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से जुड़ी नवीनतम खबरों और पल-पल की जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहें। सभी बड़ी खबरें सबसे पहले पाने के लिए लाइव हिन्दुस्तान ऐप अभी डाउनलोड करें।