तेल ही नहीं, होर्मुज बंद होने से भारत का हो रहा बड़ा नुकसान; आप पर भी असर
ईरान संकट अगर लंबा खिंचता है तो इसका असर भी बढ़ता चला जाएगा। भारत की बात करें तो ईरान युद्ध का असर केवल तेल तक सीमित नहीं है बल्कि समान्य व्यक्ति के जीवन और पूरी अर्थव्यवस्था पर इसका बोझ पड़ रहा है।
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता फेल होने के बाद पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल फिर मंडराने लगे हैं। होर्मुज के खुलने को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है। एक तरफ अमेरिका कह रहा है कि वह होर्मुज समेत ईरान के कई पोर्ट की नाकेबंदी कर देगा। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि वह अमेरिका के सहयोगियों के जहाज किसी कीमत पर पास नहीं होने देगा। ईरान की संसद में होर्मुज में टोल वसूलने का भी कानून मंजूर हो गया है। अब बात करें भारत की तो ईरान ने भारत के जहाजों की आवाजाही पर रोक नहीं लगाया है। युद्ध शुरू होने के बाद कई टैंकर भारत पहुंच चुके हैं। इसके बावजूद अब पहले वाली बात नहीं है। तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है और इस वजह से पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। आइए जानते हैं कि तेल के अतिरिक्त भारत पर ईरान संकट का क्या असर हो रहा है।
अमेरिका कर सकता है नाकेबंदी
ईरान में युद्ध के चलते तेल की कीमतें 100 डॉलर से भी ज्यादा पहुंच चुकी हैं। इसके अलावा शिपिंग कॉस्ट भी बढ़ गई है। यह बोझ भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। वार्ता फेल होने के बाद अमेरिका ने ईरान के पोर्ट से आन-जाने वाले जहाजों के लिए भी नाकेबंदी करने जा रहा है। इससे संकट और बढ़ जाएगा।
एलएनजी पर संकट, बिजली उत्पादन प्रभावित
इस संकट का सीधा असर तेल की मार्केट पर पड़ा है। तेल की कीमतों में वृद्धि, शिपिंग कॉस्ट और सीमित सप्लाई की वजह से यातायात से लेकर उद्योग तक प्रभावित हैं। भारत आने वाली 40 से 55 फीसदी तक एलएनजी होर्मुज से होकर ही आती है। ऐसे में भारत में बिजली उत्पादन, उर्वरक और गैस सप्लाई प्रभावित हो गई है।
आपकी रसोई पर असर
ईरान युद्ध का असर हर घऱ की रसोई पर पड़ा है। पहले जहां 15 दिन में ही आप दूसरा सिलेंडर ले सकते थे वहीं अब एलपीजी गैस सिलेंडर के लिए ही मारामारी है। अब तक एलपीजी की 90 फीसदी मांग आयात के जरिए ही पूरी होती थी और यह होर्मुज के रास्ते ही आती थी। इस संकट की वजह से सरकार पर एलपीजी की सब्सिडी का बोझ बढ़ गया है। इसके अलावा आम आदमी को भी रसोई गैस की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
आगे क्या होगा?
अगर यह संकट लंबे समय तक बना रहता है तो महंगाई चरम पर पहुंच सकती है। तेल और गैस की कमी की वजह से यातायात का खर्च बढ़ेगा। केमिकल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी इसका असर होगा। इसके अलावा रोजमर्रा का सामान भी महंगा होने लगेगा। वहीं तेल की बढ़ी हुई कीमतों की वजह से भारत का आयात पर खर्च बढ़ जाएगा जो कि अर्थव्यवस्था पर घाटा भी बढ़ा देगा। इसका असर भारत सरकार के बजट पर भी देखने को मिल सकता है।
खाड़ी में रहने वाले भारतीयों पर असर
खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं। वे हर साल अपनी अरबों डॉलर की कमाई भारत भेजते है। अगर इसी तरह की समस्या बनी रही तो खाड़ी देशों में भी रोजगार कम हो जाएंगे और ऐसे में भारतीयों के सामने भी वापस लौटने की मजबूरी होगी। इससे नौकिरियों पर भी खतरा आ जाएगा और विदेश से भारत में आने वाले धन में भी कमी आएगी।
लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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