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योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत की भाजपा सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने 22 साल की उम्र में ही संन्यास ले लिया था। 26 की उम्र में 12वीं लोकसभा के सबसे युवा सांसद बने। गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ के शिष्य योगी आदित्य नाथ विज्ञान के छात्र रहे हैं। समागम में वह अपने संन्यास से सत्ता तक के अनुभव बांटेंगे।

उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ भाजपा के फायरब्रांड नेताओं में शुमार हैं। पूर्वांचल की राजनीति में उनकी पकड़ अच्छी मानी जाती है। सीएम बनने से पहले तक योगी आदित्यनाथ ने 1998 से लगातार गोरखपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 2014 के लोकसभा चुनाव में वह पांचवी बार सांसद बने थे। 26 मार्च, 2017 को वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

गोरक्षनाथ पीठ के महंत योगी आदित्यनाथ का वास्‍तविक नाम अजय सिंह नेगी है। पौड़ी के छोटे से गांव में जन्मे अजय सिंह के योगी से सीएम की कुर्सी तक पहुंचने का सफर दिलचस्प है।

उत्तराखंड गढ़वाल के एक राजपूत परिवार में जन्मे योगी आदित्यनाथ का नाम उनके माता-पिता अजय सिंह रखा था। बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के अजय ने गढ़वाल विश्वविद्यालय से बीएससी गणित की पढ़ाई की। बीएससी करने के बाद अजय सिंह ने भगवान गोरखनाथ के बारे में अध्ययन शुरू किया। इसी दौरान वह गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ के सम्पर्क में आए। नौजवान अजय सिंह के अध्यात्म की तरफ बढ़ते रुझान ने गोरक्षपीठाधीश्वर को प्रभावित किया। धीरे-धीरे एक-दूसरे के प्रति दोनों का स्नेह बढ़ता गया और अंतत: 26 साल की उम्र में उन्होंने सन्यास ले लिया। 

ऐसे आए राजनीति में 
अजय सिंह ने योगी आदित्यनाथ बनने के बाद आम सन्यासियों से अलग हटकर अपने लिए एक और कठिन रास्ता चुना। यह रास्ता उन्हें धर्म और राजनीति के बीच संतुलन साधते हुए मंदिर में साधना के साथ चौबीसों घंटे की जनसेवा के लिए बाध्य करता रहा। योगी को उत्तराधिकारी बनाने के चार साल बाद ही महंत अवैद्यनाथ ने सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही योगी के नौजवान कंधों पर गोरक्षपीठ की धार्मिक जिम्मेदारी के साथ-साथ राजनीतिक विरासत को संभालने की जिम्मेदारी भी आ गई। गोरक्षपीठ की परम्परा के अनुसार योगी ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में व्याप्क जनजागरण अभियान चलाया। सहभोज के जरिए छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया। इसी दौरान घरवापसी का अभियान छेड़ने के चलते योगी पर धर्मानान्तरण कराने के आरोप भी लगे। 

योगी 1998 का लोकसभा चुनाव जीतकर सबसे कम उम्र के सांसद बने। अपने विवादित बयानों के चलते योगी की छवि कट्टर हिन्दूवादी फायरब्रांड नेता की है। 2017 के विधानसभा चुनाव में वह भाजपा के स्टार प्रचारक रहे। उन्होंने यूपी पूर्वी और पश्चिमी इलाकों में 175 से ज्यादा सभाएं कीं। भाजपा को प्रचंड बहुमत दिलाने में उनका बड़ा योगदान माना जा रहा है।

हियुवा से नौजवानों को जोड़ा
योगी आदित्यनाथ ने हिन्दू युवा वाहिनी  (हियुवा) का गठन कर बड़ी तादाद में नौजवानों को अपने साथ जोड़ा। घरवापसी, गोरक्षा और हिन्दू पुनर्जागरण के अभियान में यह संगठन योगी आदित्यनाथ का बड़ा आधार बना। पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांवों में बड़े पैमाने पर हियुवा की इकाइयां बनीं। इन इकाइयों में बड़ी संख्या में नौजवान शामिल हुए। इसके कई नेता आगे चलकर भाजपा के जरिए सक्रिय राजनीति में भी आए। 

लेखक भी हैं योगी 
योगी आदित्यनाथ लेखक भी हैं। योगी नियमित डायरी भी लिखते हैं। उन्होंने 'राजयोग: स्वरूप एवं साधना', 'यौगिक षटकर्म', 'हठयोग: स्वरूप एवं साधना'और 'हिन्दू राष्ट्र नेपाल' शीर्षक से पुस्तकें लिखीं। वह गोरखनाथ मन्दिर की वार्षिक पुस्तक 'योगवाणी' के प्रधान संपादक हैं। 

व्यक्तिगत परिचय
जन्म 5 जून, 1972 को उत्तराखंड में पौढ़ी गढ़वाल के यमकेश्वर में हुआ
गढ़वाल विश्वविद्यालय में गणित में बीएसएसी की डिग्री हासिल की
सात भाई बहनों में पांचवें नंबर पर हैं योगी आदित्यनाथ
1993 में योगी आदित्यनाथ घर छोड़कर गोरखपुर चले आए

ऐसे शुरू हुआ राजनीतिक सफर
15 फरवरी 1994 को दीक्षा लेने के साथ ही योगी आदित्यनाथ के सियासी सफर की स्क्रिप्ट लिखनी शुरू हो गई थी। 
1996 में योगी आदित्यनाथ ने अपने गुरू को लोकसभा चुनाव जिताने के लिए प्रचार अभियान का नेतृत्व किया। 
2 साल बाद अवैद्यनाथ ने उन्हें अपनी राजनीतिक विरासत सौंप दी और वह सबसे युवा सांसद बने। 

पसंद
गोशाला में गायों के साथ समय बिताना पसंद है। उन्हें बच्चों के साथ मिलना-जुलना भी भाता है।
लिखने के शौक के साथ उन्हें बैडमिंटन खेलना भी अच्छा लगा है।
योगी आदित्यनाथ को अक्सर पशु—पक्षियों के साथ आत्मीय संवाद करते हुए भी देखा जा सकता है। 

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शादी के बाद मुझे कहीं घुमाने नहीं ले जाते

पत्नी- शादी से पहले तुम मुझे होटल, सिनेमा और ना जाने कहां-कहां घुमाते थे...
शादी हुई तो घर के बाहर भी नहीं ले जाते...
पति- कभी चुनाव के बाद प्रचार देखा है क्या...