जहां रखा खामेनेई का ताबूत, वहां खड़े होकर भारत के धर्मगुरुओं ने पढ़ीं प्रार्थनाएं
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई का अंतिम संस्कार तेहरान में शुरू हो गया है। महबूबा मुफ्ती समेत कई भारतीय नेता श्रद्धांजलि देने पहुंचे। जानें 4 महीने तक कैसे सुरक्षित रखा गया था उनका शव।
ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामनेई के राजकीय अंतिम संस्कार की प्रक्रिया राजधानी तेहरान में शुरू हो चुकी है। इस मौके पर दुनिया भर के कई देशों के साथ-साथ भारत के प्रमुख नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है। भारत में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कई तस्वीरें और वीडियो शेयर कर इसकी जानकारी दी। तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में दुनियाभर के मेहमानों का पहुंचना जारी है।
भारत से कौन-कौन से नेता पहुंचे ईरान?
ईरानी दूतावास की ओर से शेयर की गई तस्वीर में पीडीपी (PDP) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद नजर आ रहे हैं। पीडीपी प्रमुख गुरुवार शाम नई दिल्ली से तेहरान पहुंचीं। खास बात यह है कि वह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से आमंत्रित एकमात्र गैर-शिया राजनेता हैं।
इन राजनीतिक चेहरों के अलावा भारत सरकार का आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भी ईरान रवाना हुआ है। विदेश राज्य मंत्री (MoS) पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन शुक्रवार सुबह दिल्ली से तेहरान के लिए रवाना हुए।
इनके अलावा, भारत के विभिन्न धर्मों के धार्मिक नेता भी ईरान पहुंचे हैं। ईरानी मीडिया द्वारा शेयर किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि जहां अली खामनेई का जनाजा रखा है वहीं भारत के हिंदू, मुस्लिम और सिख धर्मगुरू प्रार्थनाएं कर रहे हैं।
तेहरान में उमड़ा भारी जनसैलाब
तेहरान की सड़कों पर दिवंगत नेता को अंतिम विदाई देने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। लोग काले कपड़ों में ईरानी झंडे लहराते और धार्मिक भजन गाते हुए सड़कों पर उतरे हैं। अयातुल्ला खामनेई का पार्थिव शरीर शुक्रवार तड़के राजधानी के ग्रैंड मोसल्ला (मुख्य प्रार्थना कक्ष) में लाया गया।
उनके ताबूत को इमाम हुसैन की दरगाह से लाए गए एक पवित्र लाल झंडे से ढका गया है, जिसे ईरान सरकार ने 'प्रतिरोध, बलिदान और सच्चाई' का प्रतीक बताया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इस मौके पर गहरा दुख जताते हुए इसे 'राष्ट्रीय एकता और लचीलेपन के एक नए अध्याय की शुरुआत' करार दिया है।
4 जुलाई से 9 जुलाई तक चलने वाली अंतिम संस्कार की यह प्रक्रिया ईरान और इराक के कई प्रमुख शहरों- तेहरान, कोम, मशहद, नजफ और कर्बला में पूरी की जाएगी।
4 महीने तक कैसे सुरक्षित रखा गया पार्थिव शरीर?
अयातुल्ला खामनेई की मृत्यु 4 महीने पहले 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायली सेनाओं के बीच हुए संघर्ष के दौरान एक हवाई हमले में हुई थी। आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद उमर ने फॉक्स न्यूज को बताया कि शव को सुरक्षित रखने के लिए रासायनिक लेप (एम्बामिंग) की जगह 'कम तापमान वाले कोल्ड स्टोरेज' का इस्तेमाल किया गया।
इस्लाम में रसायनों के इस्तेमाल पर रोक है, जबकि शिया कानून विशेष परिस्थितियों में अंतिम संस्कार में देरी और शव को कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखने की इजाजत देता है।
सुरक्षा कारणों से बेटे मोजतबा अंतिम संस्कार से रहेंगे दूर
यह अंतिम संस्कार ईरान के इतिहास की सबसे बड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हो रहा है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विमानों और हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरों के कारण वर्तमान सर्वोच्च नेता और खामनेई के बेटे मोजतबा खामनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। भारत में उनके प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही ने इसकी पुष्टि की है।
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज की भड़काऊ बयानबाजी के बाद ईरानी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची और सैन्य कमांडरों ने दुश्मनों को सख्त चेतावनी दी है कि किसी भी दुस्साहस का कड़ा और पछतावे वाला जवाब दिया जाएगा।
बता दें कि 28 फरवरी के हवाई हमले के बाद मोजतबा खामनेई की सेहत को लेकर भी सस्पेंस बरकरार है। ईरानी अधिकारियों ने इसे 'मामूली चोट' बताया था, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खुफिया जानकारी का हवाला देते हुए दावा किया था कि उनके चेहरे पर गंभीर जलन हुई है, जिससे उन्हें बोलने में दिक्कत है। हमले के बाद से उनकी कोई नई तस्वीर सामने नहीं आई है।
100 देशों के मेहमान ले रहे हैं हिस्सा
ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस राजकीय शोक में करीब 100 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। इनमें इंडोनेशिया और अफगानिस्तान के धार्मिक व सांस्कृतिक प्रतिनिधियों के अलावा ईरान के मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक समुदायों के नेता भी शामिल हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, चीन की नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति के उपाध्यक्ष हे वेई और अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन के उप प्रधानमंत्री और कार्यवाहक विदेश मंत्री भी इस समारोह में हिस्सा ले रहे हैं।


