'हिंदू धर्म का भी रजिस्ट्रेशन नहीं', प्रियंक खरगे की मांग पर RSS चीफ मोहन भागवत का जवाब

पीटीआई
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आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने प्रियंक खरगे को जवाब देते हुए कहा कि हिंदू धर्म समेत कई ऐसी व्यवस्थाएं हैं जिनका कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर आरएसएस की पहचान नहीं है तो दो बार बैन क्यों किया गया।

'हिंदू धर्म का भी रजिस्ट्रेशन नहीं', प्रियंक खरगे की मांग पर RSS चीफ मोहन भागवत का जवाब

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने संघ के पंजीकरण की मांग को खारिज करते हुए कहा कि संगठन के पास न तो कुछ छिपाने के लिए है और न ही वह जनता की नजरों से बचकर काम करता है। भागवत रविवार को केरल के त्रिशूर में आरएसएस के शताब्दी संपर्क कार्यक्रम के तहत एक सभा को संबोधित करने के बाद सवालों का जवाब दे रहे थे। यह पूछे जाने पर कि कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने आरएसएस से अपना पंजीकरण कराने की मांग की है, भागवत ने कहा कि संगठन के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वह खुले तौर पर अपनी गतिविधियां संचालित करता है।

केवल राजनीतिक हथकंडा अपना रही कांग्रेस

संघ प्रमुख ने कहा, 'बहुत-सी अपंजीकृत चीजें संचालित हो रही हैं और हम कोई बात छिपाते नहीं हैं। हम खुलेआम काम करते हैं। हम लोगों को बुलाते हैं और उन्हें बताते हैं कि हम क्या करते हैं।'उन्होंने आरएसएस के पंजीकरण की मांग को राजनीति करार देते हुए कहा कि संगठन के लिए ऐसी कोशिशें कोई नई बात नहीं हैं। भागवत ने कहा, 'यह राजनीति है। इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं... हमें इसकी आदत हो गई है। संघ के अस्तित्व में आने के 10-15 साल बाद ही हमें इन सब चीजों का सामना करना पड़ा था। अगर ऐसा न हो, तो हमें लगता है कि कुछ गड़बड़ है।'

हिंदू धर्म का रजिस्ट्रेशन नहीं- भागवत

उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित यह संगठन सार्वजनिक बहस और आम सहमति की प्रक्रिया से उभरकर सामने आया। भागवत ने कहा, 'हिंदू धर्म पंजीकृत नहीं है। कई चीजें पंजीकृत नहीं होतीं। जो लोग सरकार से निधि चाहते हैं, उन्हें पंजीकरण कराने की जरूरत होती है। ऐसा तो होना ही चाहिए। लेकिन सरकार जानती है कि संघ का अस्तित्व है।'

दो बार संघ पर लगा प्रतिबंध- आरएसएस चीफ

संघ प्रमुख ने कहा कि पहले भी आरएसएस पर दो बार प्रतिबंध लगाया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि इन कार्रवाइयों से ही पता चलता है कि अधिकारियों को संगठन के अस्तित्व और पहचान के बारे में अच्छी तरह से जानकारी थी। भागवत ने कहा, 'सरकार ने हम पर दो बार प्रतिबंध लगाया। एक प्रतिबंध अदालत के आदेश के तहत और दूसरा सत्याग्रह के बाद हटाया गया। इसका मतलब है कि सरकार को आरएसएस के अस्तित्व के बारे में पता था।'

उन्होंने कहा कि संगठन ने 1950 में सरकार को अपना लिखित संविधान सौंपा था और किसी भी अधिकारी ने कभी इस बात पर जोर नहीं दिया कि मान्यता मिलने से पहले उसके लिए पंजीकरण कराना जरूरी है। भागवत ने कहा, 'पिछले 100 वर्षों में किसी ने हमसे नहीं कहा कि हमें पंजीकरण कराना होगा।' आरएसएस प्रमुख ने आरोप लगाया कि ऐसी मांगों का मकसद आरएसएस के काम में बाधा डालना और लोगों के मन में संदेह पैदा करना है।

उन्होंने कहा, 'वे किसी न किसी तरह एक तरफ तो संघ के काम में बाधा डालना चाहते हैं और दूसरी तरफ लोगों के मन में शक पैदा करना चाहते हैं। लेकिन अब ऐसा करना मुमकिन नहीं है, क्योंकि लोग हमें जानते हैं।' भागवत ने कहा, 'हमारे कार्यकर्ता हर इलाके में रहते हैं। लोग उन्हें रोज देखते हैं। हमारी शाखाएं खुले मैदानों में लगती हैं। हम सार्वजनिक कार्यक्रम करते हैं और हमारी पहुंच बहुत व्यापक है। अगर हम चीजें छिपाकर रखते, तो यह सब मुमकिन नहीं होता।'

प्रियंक खरगे ने आरएसएस से मांग की है कि वह संगठन का पंजीकरण कराए, अपनी कानूनी स्थिति स्पष्ट करे और वित्त पोषण, आय, खर्च एवं संपत्ति के स्रोतों का खुलासा करे।

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Ankit Ojha

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Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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