BJP से बड़ा हिमंत सरमा का ब्रांड, बंगाल की फाइटर ममता; 4 राज्यों में विचारधारा पर चेहरा भारी
असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनाने के लिए चुनाव हो रहे हैं। चुनावी दंगल में इस बार मुकाबला पार्टियों के बीच कम और इन राज्यों के कद्दावर मुख्यमंत्रियों के व्यक्तित्व के बीच अधिक हो गया है।

असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनाने के लिए चुनाव हो रहे हैं। चुनावी दंगल में इस बार मुकाबला पार्टियों के बीच कम और इन राज्यों के कद्दावर मुख्यमंत्रियों के व्यक्तित्व के बीच अधिक हो गया है। इन चारों राज्यों में मुख्यमंत्री अपनी पार्टियों से भी बड़े 'ब्रांड' बनकर उभरे हैं, जहां वोट विचारधारा के बजाय सीधे चेहरे के नाम पर मांगे जा रहे हैं।
बंगाल की 'फाइटर' के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा
पश्चिम बंगाल में चुनावी पारा अपने चरम पर है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह अब तक की सबसे कठिन लड़ाई मानी जा रही है। उनके समर्थकों का कहना है कि यह मुकाबला 'ममता बनाम चुनाव आयोग' (EC) बन चुका है। आपको बता दें कि एसआईआर के बाद बंगाल में अब तक मतदाता सूची से 91 लाख नाम हटा दिए गए हैं। यदि ममता इस बार भी भाजपा के विजय रथ को रोकने में सफल रहती हैं, तो वह 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए विपक्ष की ओर से INDIA गठबंधन के नेतृत्व का दावा ठोक सकती हैं।
महिला वोट बैंक की जंग
भाजपा 16-18 अप्रैल के विशेष सत्र में 'महिला आरक्षण (संशोधन) विधेयक' लाकर ममता के महिला कार्ड की काट ढूंढने की कोशिश में है। हालांकि, ममता का भरोसा अब भी उनके मजबूत महिला और अल्पसंख्यक वोट बैंक पर टिका है।
हिमंत बिस्वा सरमा- असम में भाजपा के संकटमोचक
असम में चुनावी तस्वीर काफी हद तक मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के इर्द-गिर्द बुनी गई है। कांग्रेस के गौरव गोगोई ने कड़ी टक्कर देने की कोशिश की है, लेकिन 'मामा' के नाम से लोकप्रिय हिमंत ने भाजपा के हिंदुत्व और विकास के एजेंडे को जमीन पर उतारकर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। भाजपा ने राज्य की 126 सीटों में से 103 हिंदू-बहुल सीटों पर पूरा ध्यान केंद्रित किया है, जबकि 23 मुस्लिम-बहुल सीटों को लगभग कांग्रेस के खाते में छोड़ दिया है। हिमंता भाजपा के उन गिने-चुने मुख्यमंत्रियों में से हैं जिन्हें आलाकमान ने काम करने की पूरी स्वायत्तता दी है, जो आमतौर पर केवल योगी आदित्यनाथ या देवेंद्र फडणवीस जैसे नेताओं को ही मिलती है।
पिनाराई विजयन- केरल के प्रैग्मैटिक नेता
केरल का इतिहास रहा है कि वहां हर पांच साल में सरकार बदल जाती है, लेकिन 2021 में पिनाराई विजयन ने इस परंपरा को तोड़कर दोबारा सत्ता हासिल की थी। इस बार वह तीसरी पारी की उम्मीद कर रहे हैं, जो केरल की राजनीति में एक असाधारण उपलब्धि होगी। एक कम्युनिस्ट नेता होने के बावजूद विजयन ने बाजार की शक्तियों और भाजपा शासित केंद्र के साथ व्यवहारिक तालमेल बिठाकर शासन चलाया है। विजयन के लिए यह हार देश में वामपंथी राजनीति को हाशिए पर धकेल सकती है। दिलचस्प बात यह है कि राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा अक्सर कांग्रेस की तुलना में विजयन को प्राथमिकता देती दिखती है।
एम के स्टालिन
तमिलनाडु में एम के स्टालिन ने खुद को एक शालीन और मिलनसार नेता के रूप में स्थापित किया है। हालांकि उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता बढ़ी है। अभिनेता विजय की पार्टी 'टीवीके' (TVK) इस चुनाव में 'एक्स-फैक्टर' साबित हो सकती है। यदि विजय युवाओं और बदलाव चाहने वालों का 15% से अधिक वोट काट लेते हैं, तो द्रमुक (DMK) के लिए त्रिशंकु विधानसभा का खतरा पैदा हो सकता है।
मतदान के चौंकाने वाले आंकड़े
इस बार के चुनावों में मतदाताओं का उत्साह चरम पर देखा गया है। चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, असम में 85%, पुडुचेरी में 90% और केरल में 78% मतदान हुआ है।
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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