हाईवे पर हादसा होते ही चालक के पास चला जाएगा एडवांस अलर्ट, होने वाली है 'हाईटेक' की शुरुआत
देश में नेशनल हाई-वे और एक्सप्रेसवे पर अब हाईटेक युग शुरू होने जा रहा है। इसकी खासियत होगी कि देश का समूचा रोड नेटवर्क एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा, जिससे सड़क यात्रियों को सफर के दौरान अपनी कार की स्क्रीन पर मौसम, गति और ट्रैफिक का एडवांस अलर्ट मिलता रहेगा।
अरविंद सिंह। देश में नेशनल हाई-वे और एक्सप्रेस-वे पर सफर का अनुभव पूरी तरह बदलने जा रहा है। भारत में जनवरी 2027 से डिजिटल ग्रीन हाई-वे इंफ्रा का नया युग शुरू होगा।इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि देश का समूचा रोड नेटवर्क एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा, जिससे सड़क यात्रियों को सफर के दौरान अपनी कार की स्क्रीन पर मौसम, गति और ट्रैफिक का एडवांस अलर्ट मिलता रहेगा। सड़क हादसे की जानकारी वाहन चालकों को तुरंत मिल जाएगी।
हाइवे एआई सर्विलांस और ईवी चार्जर से लैस
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नई नीति तैयार की है। इसके तहत एक जनवरी 2027 के बाद बनने वाले किसी भी नए फोर लेन नेशनल हाई-वे या एक्सप्रेस-वे को प्रोविशनल कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (पीसीओडी) और टोल टैक्स वसूलने का अधिकार तब तक नहीं मिलेगा, जब तक कि वह पूरी तरह से एआई सर्विलांस और ईवी चार्जर से लैस न हो।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 2027 से बनने वाले हाई-वे और एक्सप्रेस-वे केवल डामर और कंक्रीट के रास्ते नहीं होंगे, बल्कि पूरे देश का रोड नेटवर्क एक केंद्रीय एकीकृत क्लाउड डेटा बैंक से जुड़ा होगा। यात्रा के दौरान चालकों को अपनी गाड़ियों की डैशबोर्ड स्क्रीन या जीपीएस ऐप (जैसे गूगल मैप्स या एनएचएआई ऐप) पर रियल-टाइम में मौसम, स्पीड लिमिट, खाली चार्जिंग स्लॉट और आगे के ट्रैफिक का अपडेट मिलता रहेगा।
कोहरे, धुंध या रात के अंधेरे में भी काम करने वाले एआई-सक्षम थर्मल एनपीआर कैमरे पूरे हाई-वे पर तैनात रहेंगे। सड़क पर कोई दुर्घटना होने पर एआई सिस्टम पीछे आ रही गाड़ियों क स्क्रीन पर अलर्ट भेज देगा।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस रहेगा हाईवे
सर्विलांस और निगरानी के मामले में जहां पुराने और मौजूदा हाई-वे असंगठित नेटवर्क, सामान्य सीसीटीवी कैमरों और मैन्युअल चेकिंग पर निर्भर रहते थे, वहीं, 2027 के बाद बनने वाले नए डिजिटल-ग्रीन हाईवे एआई थर्मल एनपीआर कैमरों और एकीकृत क्लाउड डेटा बैंक से लैस होंगे। पुराने हाई-वे पर हादसों या ट्रैफिक जाम की जानकारी घटना घटने के काफी देर बाद मिलती थी। वर्ष 2027 से नए एक्सप्रेस-वे पर हर 40 से 50 किलोमीटर पर 100 किलोवॉट क्षमता के अल्ट्रा-फास्ट चार्जिंग प्वाइंट मिलेंगे। डेवलपर्स को हाई-वे की कुल निर्माण लागत का तीन से पांच फीसदी हिस्सा डिजिटल सर्विलांस, सेंसर ग्रिड और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करना होगा।
योजना में चार एक्सप्रेस-वे से शुरुआत की जाएगी
यह योजना पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, गंगा एक्सप्रेस-वे, द्वारका एक्सप्रेस-वे और चारधाम ऑल-वेदर रोड पर लागू होगी। नए प्रोजेक्ट्स पर यह 100 फीसदी लागू होगा, जबकि पुराने टोल हाई-वे पर रेट्रोफिटिंग मॉडल के जरिए तकनीक अपडेट करानी जरूरी है।


