‘F*** ऑफ’ बोलना यौन उत्पीड़न नहीं, महिला कर्मचारी को ईमेल में गाली देने वाले बॉस को HC ने दी राहत
आरोपी ने अदालत में दलील दी कि एक बहस के दौरान इस्तेमाल किया गया अपशब्द, जिसमें यौन शोषण का कोई यौन संकेत न हो, उसे यौन उत्पीड़न नहीं माना जा सकता।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान गुरुग्राम की एक कंपनी के डायरेक्टर के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले में दर्ज FIR को रद्द कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक डायरेक्टर पर आरोप था कि उसने अपनी पूर्व महिला कर्मचारी को लिखे ईमेल में ‘f*** off’ जैसे अपशब्द का इस्तेमाल किया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह भाषा भले ही असभ्य और अनुचित हो, लेकिन इसे भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354-A के तहत यौन उत्पीड़न नहीं माना जा सकता। हालांकि निदेशक को जुर्माना चुकाने का आदेश मिला है।
इससे पहले महिला कर्मचारी ने अपने बॉस के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। जानकारी के मुताबिक महिला ने मार्च 2018 में कंपनी में बिजनेस हेड (नॉर्थ) के तौर पर काम शुरू किया था। करीब एक साल बाद 10 मार्च 2019 को FIR दर्ज कराते हुए उसने आरोप लगाया कि निदेशक ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
मेडिकल लीव लेने से शुरू हुआ विवाद
विवाद अक्टूबर 2018 में शुरू हुआ, जब महिला कर्मचारी ने एक कंपनी इवेंट से ठीक पहले चार दिन की मेडिकल लीव ले ली। इस पर निदेशक ने ईमेल में जवाब देते हुए कहा कि वह मेडिकल प्रक्रिया इवेंट के बाद करवा सकती थीं। 17 अक्टूबर को ईमेल बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और निदेशक ने ‘f*** off’ लिख दिया। इसके बाद महिला ने नौकरी छोड़ दी, जिसे उसी दिन स्वीकार कर लिया गया। हालांकि मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। कंपनी ने 11 नवंबर 2018 को महिला को कॉन्ट्रैक्ट उल्लंघन का नोटिस भेजा। इसके जवाब में महिला ने बकाया वेतन, नोटिस पीरियड की सैलरी, 25,000 रुपए कानूनी खर्च और लिखित माफी की मांग की। जब कंपनी ने यह मांगें नहीं मानीं, तो महिला ने चार महीने बाद यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया।
हालांकि डायरेक्टर के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि FIR बदले की भावना से दर्ज की गई और इसका मकसद सिर्फ दबाव बनाना था। उन्होंने कहा कि एक बहस के दौरान इस्तेमाल किया गया अपशब्द, जिसमें कोई यौन संकेत न हो, उसे यौन उत्पीड़न नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट का क्या आदेश?
वहीं हाईकोर्ट ने भी माना कि धारा 354-A उन मामलों के लिए है, जहां व्यवहार में स्पष्ट रूप से यौन तत्व हो, जैसे अवांछित शारीरिक संपर्क, यौन संबंध की मांग, अश्लील सामग्री या यौन संकेत वाली टिप्पणी। कोर्ट ने कहा कि एक ईमेल में गुस्से में बोले गए एक शब्द से ऐसा अपराध साबित नहीं होता। HC ने कंपनी निदेशक की याचिका स्वीकार करते हुए FIR और उससे जुड़ी सभी कानूनी कार्यवाही को रद्द कर दिया। हालांकि, निदेशक को एक महीने के भीतर पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के ‘पुअर पेशेंट वेलफेयर फंड’ में 20,000 रुपए जमा करने का निर्देश दिया गया है।
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लेखक के बारे में
Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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