सोनिया-राहुल से जुड़े AJL और भूपिंदर सिंह हुड्डा को बड़ी राहत, HC ने दी क्लीन चिट; आरोप खारिज

Feb 25, 2026 08:16 pm ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, चंडीगढ़
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जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने कहा कि हुड्डा के 2005 के उस फैसले को, जिसमें प्लॉट को दोबारा अलॉट करने का फैसला किया गया था, हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (HUDA) ने 2006 में एक्स-पोस्ट फैक्टो में एकमत से मंज़ूरी दी थी।

सोनिया-राहुल से जुड़े AJL और भूपिंदर सिंह हुड्डा को बड़ी राहत, HC ने दी क्लीन चिट; आरोप खारिज

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बुधवार (25 फरवरी) को एक महत्वपूर्ण फैसले में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के खिलाफ लगे आपराधिक आरोपों को रद्द करते हुए उन्हें क्लीन चिट दे दी है। यह मामला पंचकूला में एक संस्थागत प्लॉट के पुनः आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। जस्टिस त्रिभुवन दहिया की पीठ ने कहा कि वर्ष 2005 में हुड्डा द्वारा लिया गया पुनः आवंटन का निर्णय बाद में 2006 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA) द्वारा सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया था और अब तक किसी भी अदालत ने इस निर्णय को अवैध घोषित नहीं किया है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि AJL ने पुनः आवंटन की पूरी राशि और अन्य शुल्क जमा किए थे और निर्माण कार्य पूरा कर 2014 में अधिभोग प्रमाणपत्र भी प्राप्त कर लिया था। साथ ही, किसी प्रकार के वित्तीय नुकसान की शिकायत भी दर्ज नहीं की गई और सरकारी ऑडिटरों ने भी इस संबंध में अपनी आपत्ति वापस ले ली थी। नेशनल हेराल्ड की प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (AJL) है और इसका स्वामित्व यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के पास है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास यंग इंडियन कंपनी के 38-38 फीसदी शेयर हैं।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

बार एंड बेंच के मुताबिक, हाईकोर्ट ने कहा, “आज की तारीख में अलॉटमेंट वैलिड है, इसे कैंसिल भी नहीं किया गया है, न ही इसे गैर-कानूनी या मनमाना घोषित किया गया है। इसके बजाय, AJL ने री-अलॉटमेंट प्राइस और एक्सटेंशन फीस का पेमेंट करने के बाद कंस्ट्रक्शन शुरू कर दिया है, और 14.08.2014 को अथॉरिटी ने उसे ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट दे दिया है। अथॉरिटी को हुए किसी भी नुकसान के बारे में कोई शिकायत नहीं की गई है; न ही AJL या किसी दूसरे आरोपी को किसी कथित नुकसान की भरपाई के लिए कहा गया है। यहां तक ​​कि सरकारी ऑडिटर्स ने भी इस री-अलॉटमेंट की वजह से अथॉरिटी को हुए फाइनेंशियल नुकसान के बारे में अपनी आपत्ति वापस ले ली है।”

2021 में ट्रायल कोर्ट ने आरोप तय किए थे

बता दें कि इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था, जिसके आधार पर 2021 में ट्रायल कोर्ट ने आरोप तय किए थे। हालांकि, हाई कोर्ट ने कहा कि CBI द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य प्रथम दृष्टया भी आरोपों को साबित नहीं करते। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में अभियोजन जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। इसलिए सभी आरोप और उससे जुड़ी कार्यवाही को रद्द करते हुए याचिकाकर्ताओं को बरी किया जाता है।

साजिश या धोखाधड़ी का कोई ठोस प्रमाण नहीं

फैसले में यह भी कहा गया कि न तो AJL और न ही हुड्डा के खिलाफ किसी साजिश या धोखाधड़ी का कोई ठोस प्रमाण मिला। केवल इस आधार पर कि वर्तमान दरों पर प्लॉट का मूल्य अधिक हो सकता था, यह मान लेना कि सरकारी एजेंसी को नुकसान हुआ, पूरी तरह काल्पनिक है और आपराधिक मामला बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। यह फैसला AJL और हुड्डा के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर यह मामला चर्चा में रहा है।

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लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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