Hindi NewsIndia NewsHigh Court expressed surprise installation of mobile charging point inside Colvale jail in Goa
अंतरात्मा को झकझोर देने वाली बात, जेल के भीतर मोबाइल चार्जिंग पॉइंट पर भड़का हाई कोर्ट

अंतरात्मा को झकझोर देने वाली बात, जेल के भीतर मोबाइल चार्जिंग पॉइंट पर भड़का हाई कोर्ट

संक्षेप:

जज ने कहा, ‘जेल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ त्वरित और व्यापक कड़े उपाय करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।’ आदेश में जेल प्रशासन से 20 जनवरी, 2026 को जवाब मांगा गया है।

Jan 09, 2026 03:12 pm ISTNiteesh Kumar भाषा
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बम्बई हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने कहा कि यह बात अंतरात्मा को झकझोर देने वाली है कि उत्तरी गोवा के कोलवाले स्थित केंद्रीय जेल के भीतर मोबाइल चार्जिंग पॉइंट बनाए गए थे। जज श्रीराम वी. शिरसाट ने हाल में एक आदेश में जेल परिसर में मोबाइल फोन और प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी का संज्ञान लिया। उन्होंने जेल अधिकारियों को मजबूत जैमर नेटवर्क स्थापित करने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने चंदू पाटिल के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए, जो एक बच्चे की हत्या के आरोप में जेल में है। आरोप है कि पाटिल ने जेल से पीड़ित परिवार को फोन करके अप्रत्यक्ष रूप से धमकी दी थी।

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जज ने कहा, ‘जेल अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ त्वरित और व्यापक कड़े उपाय करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।’ आदेश में जेल प्रशासन से 20 जनवरी, 2026 को जवाब मांगा गया है। आदेश में कहा गया, ‘यह बात स्पष्ट है कि चार्जिंग पॉइंट वहां थे, वे क्यों लगाए गए हैं।’ अदालत ने कहा कि उसके पास ऐसे ही कई मामले आए हैं जिनमें मादक पदार्थों के अलावा मोबाइल फोन भी जेल परिसर में तस्करी करके लाए गए थे। हालांकि, न्यायाधीश ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जेल के अंदर पहले भी मोबाइल फोन मिलने के बावजूद, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

अदालत ने दिए सख्त निर्देश

न्यायाधीश ने कहा, ‘केवल एक कैदी के खिलाफ मोबाइल या प्रतिबंधित सामान रखने के आरोप में कार्रवाई करना कोई निर्णायक समाधान नहीं होगा, बल्कि मामले की तह तक जाना आवश्यक है।’ उच्च न्यायालय ने कहा कि वह इस धारणा पर आगे बढ़ रहा है कि जेल में सिग्नल जैमिंग सिस्टम स्थापित नहीं हैं। न्यायाधीश ने कहा कि अब समय आ गया है कि अधिकारी इस मुद्दे को गंभीरता से लें। अदालत ने कहा कि वह इस बात को समझने में असमर्थ है कि मोबाइल फोन इतनी आसानी से अंदर कैसे ले जाए जा सकते हैं, खासकर तब जब जेल अधिकारी नियमित रूप से निरीक्षण करते हैं।

जांच और निगरानी पर उठे सवाल

जज ने पूछा, ‘क्या यह निरीक्षण सतही और दिखावा है या प्रवेश द्वार पर जानबूझकर ढिलाई बरती जाती है ताकि मोबाइल फोन बिना किसी रुकावट के जेल परिसर के अंदर पहुंच सकें?’ अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की घटनाएं नियमित अंतराल पर हो रही हैं, इसलिए कुछ जवाबदेही तय की जानी चाहिए। इसने कहा, ‘कुछ कड़े कदम उठाना समय की मांग है।’ चंदू पाटिल का जिक्र करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि सिर्फ कारण बताओ नोटिस से काम नहीं चलेगा। न्यायालय ने कहा कि संबंधित तिथि और समय के कॉल डेटा रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और सेल टावर लोकेशन का पता लगाना जरूरी है।

एससी के न्यायाधीश ने कहा, ‘इस तरह की गतिविधियों के लिए मामूली सजा से जेल के कैदियों का हौसला बढ़ता है। ’उच्च न्यायालय ने कहा कि जेल के उप अधीक्षक या अधीक्षक को यह सुनिश्चित करना होगा कि तत्काल मजबूत फोन जैमर या सेलुलर निरीक्षण प्रणाली स्थापित की जाए और इनका संचालन सख्ती से जेल परिसर तक ही सीमित रखा जाए ताकि आसपास के निवासियों पर इसका कोई प्रभाव न पड़े। इसने यह भी निर्देश दिया कि जांच बिंदुओं पर निरीक्षण मानदंडों का उल्लंघन करने वाले कर्मियों की जवाबदेही तय करने के लिए अतिरिक्त नियम बनाए जाएं।

Niteesh Kumar

लेखक के बारे में

Niteesh Kumar
नीतीश 7 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024 की कवरेज कर चुके हैं। पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से ग्रैजुएशन किया। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। और पढ़ें
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