यूसुफ पठान ने मंजूरी के बिना सरकारी जमीन पर कब्जा कैसे किया, हाई कोर्ट ने पूछा
न्यायमूर्ति अग्रवाल ने पठान के वकील शालिन मेहता से कहा, ‘यह आवंटन का केवल प्रस्ताव था जिसे राज्य सरकार को भेजा गया था और उसने मंजूरी देने से इनकार कर दिया। बस यह बताइए कि आप इस भूखंड पर कब्जा कैसे कर सकते हैं?’

गुजरात हाई कोर्ट ने सोमवार को सवाल किया कि पूर्व क्रिकेटर व तृणमूल कांग्रेस के नेता यूसुफ पठान ने राज्य सरकार से आवंटन प्रस्ताव खारिज किए जाने के बावजूद एक भी पैसा दिए बिना वडोदरा में सरकार जमीन पर कब्जा कैसे कर लिया। अदालत ने कहा कि कोई ऐसा नहीं कर सकता। मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी एन रे की खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता उक्त संपत्ति के उपयोग और कब्जे के लिए हर्जाना देने को तैयार रहे। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 15 जून के लिए निर्धारित की। मूल रूप से वडोदरा के रहने वाले पठान पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।
न्यायमूर्ति अग्रवाल ने पठान के वकील शालिन मेहता से कहा, 'यह आवंटन का केवल प्रस्ताव था जिसे राज्य सरकार को भेजा गया था और उसने मंजूरी देने से इनकार कर दिया। बस यह बताइए कि आप इस भूखंड पर कब्जा कैसे कर सकते हैं? हमारे लिए इसे खारिज करने के लिए यही पर्याप्त है। कोई ऐसा नहीं कर सकता।' पीठ ने मेहता से पूछा कि जब उनके मुवक्किल के पक्ष में कोई आवंटन नहीं हुआ था और आवंटन राशि का एक भी पैसा नहीं दिया गया था तो वह भूखंड पर कब्जा कैसे कर सकते हैं।
सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वाला
पीठ ने पठान की उस याचिका पर सुनवाई की जिसमें पिछले साल अगस्त में एकल न्यायाधीश से पारित आदेश को चुनौती दी गई है। उस आदेश में उन्हें सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वाला कहा गया था। उच्च न्यायालय ने पूछा कि क्या भूखंड खाली कर दिया गया है और यदि नहीं, तो पठान को इसे खाली करने के लिए कितना समय चाहिए। अदालत ने जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी। पीठ ने कहा कि पठान ने वडोदरा नगर निगम (VMC) की स्थायी समिति के प्रस्ताव के आधार पर कदम उठाया जिसे बाद में राज्य सरकार को भेजा गया और उसने इसे खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि आवंटन प्रक्रिया पूरी होने और भूखंड उनके कब्जे के लिए वास्तव में आवंटित किए जाने से पहले ही पठान ने जमीन पर कब्जा कर लिया। पीठ ने कहा, 'आप भूखंड का कब्जा कैसे ले सकते है? यही तथ्य आपको अदालत से राहत पाने के दायरे से बाहर कर देता है। सरकारी भूखंड पर औपचारिकताएं पूरी हुए बिना कब्जा करने वाले किसी भी व्यक्ति को कोई रियायत नहीं दी जा सकती।' उच्च न्यायालय ने सितंबर 2025 में पठान की वह याचिका खारिज कर दी थी जिसमें उन्होंने वडोदरा में अपने घर के पास 978 वर्ग मीटर के भूखंड को नीलामी के बिना उन्हें आवंटित करने के वीएमसी के प्रस्ताव को खारिज करने के राज्य सरकार के नोटिस को चुनौती दी थी।
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लेखक के बारे में
Niteesh Kumarपत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।
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