परिसीमन बिल पर संसद में फिर होगा घमासान, कांग्रेस ने बता दिया अपना प्लान; क्या है मांग
संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। इसे लेकर कांग्रेस के सांसदों ने बैठक की और रणनीति तैयार की। पार्टी का कहना है कि अगर परिसीमन बिल दोबारा लाने की कोशिश की जाती है, तो इसका विरोध किया जाएगा।

20 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद के मॉनसून सत्र से पहले विपक्ष ने अपने तेवर साफ कर दिए हैं। कांग्रेस ने विपक्षी एकजुटता का दावा करते हुए कहा कि सरकार सत्र के दौरान परिसीमन विधेयक फिर से पेश करती है, तो पार्टी इसका विरोध करेगी। पार्टी ने सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में अपने मुद्दे भी साफ कर दिए हैं। मॉनसून सत्र में पार्टी की रणनीति तय करने के लिए गुरुवार को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में संसदीय रणनीतिक समूह की बैठक हुई। इसमें विपक्षी एकता, सरकार की तरफ से पेश किए जाने वाले विधेयकों और संसद में सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा हुई।
क्या हुई चर्चा
बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि पार्टी ने उन विधेयकों पर विस्तार से चर्चा की है, जो सरकार की तरफ से सत्र के दौरान पेश हो सकते हैं। उन्होंने कहा, अभी सरकार की तरफ से आधिकारिक तौर पर एजेंडा नहीं मिला है, उम्मीद है कि सरकार 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक में इसकी जानकारी देगी।
जयराम ने कहा कि ऐसी चर्चा है गृहमंत्री अमित शाह एक बार फिर परिसीमन बिल लाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसे भाजपा 17 अप्रैल को दो तिहाई बहुमत न होने से पारित नहीं करा पाई थी। जयराम ने कहा, कांग्रेस इस बिल का विरोध करेगी। साथ विपक्षी एकता बरकरार रखने की भी कोशिश करेगी।
जयराम ने कहा, सरकार मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर महिला आरक्षण लागू कर 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना चाहती है, तो कांग्रेस इसका समर्थन करने को तैयार है, पर महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन की कोशिश मंजूर नहीं होगी।
PM मोदी को लिखा पत्र
उधर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि महिला आरक्षण व परिसीमन से संबंधित बिल को लेकर सरकार के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
भाजपा ने कांग्रेस के आरोप नकारे
भाजपा ने गुरुवार को दल-बदल को लेकर कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मॉनसून सत्र में परिसीमन पर संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के मकसद से भाजपा पार्टियों को विभाजित कर रही है। पार्टी ने कहा कि जो नेता विपक्ष छोड़कर दूसरी पार्टियों में शामिल हो रहे हैं और दल-बदल रोधी कानून का पालन कर रहे हैं। उनके इस कदम को गैर-कानूनी नहीं कहा जा सकता।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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