'वो शाह हैं, शहंशाह नही'; कौन होते हैं संसद का एजेंडा तय करने वाले? HM पर क्यों भड़के पवन खेड़ा

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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20 जुलाई को आरंभ हुए संसद के मॉनसून सत्र के दौरान दोनों सदनों में जारी गतिरोध के बीच शाह ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा और आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा होने ही नहीं देना चाहता।

Pawan Khera and Amit Shah
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर जोरदार हमला बोला है और पूछा है कि वो कौन होते हैं संसद का एजेंडा और कार्यक्रम तय करने वाले। समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए खेड़ा ने अमित शाह के बयान पर कहा, "...वे(अमित शाह) अब मुहूर्त तय करेंगे? क्यों? क्या वे 'शहंशाह' हैं? वे केवल अमित शाह हैं, शहंशाह नहीं हैं.... आप कौन होते हैं एजेंडा तय करने वाले या मुहूर्त निकालने वाले? हम पिछले 18 दिन से यहां संघर्ष कर रहे हैं।"

दरअसल, पवन खेड़ा का यह बयान तब आया है, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर विपक्षी दल छात्रों से जुड़े विषय पर चर्चा के लिए तैयार हो जाएं तो वह हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं ताकि देश की जनता के सामने सब 'दूध का दूध, पानी का पानी' हो जाए, क्योंकि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।

गृह मंत्री का 'भाषण' और 'लेक्चर' सुनने में दिलचस्पी नहीं

दूसरी तरफ, विपक्ष ने कहा कि उसे गृह मंत्री का 'भाषण' और 'लेक्चर' सुनने में दिलचस्पी नहीं है, बल्कि उन्हें सिर्फ यह बताना चाहिए कि दिल्ली में छात्रों पर कथित बर्बरता का आदेश किसने दिया था। बता दें कि बीते 20 जुलाई को आरंभ हुए संसद के मॉनसून सत्र के दौरान दोनों सदनों में जारी गतिरोध के बीच शाह ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा और आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा होने ही नहीं देना चाहता। अमित शाह ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने के बाद से वह नियमित रूप से संसद आ रहे हैं और अपने कक्ष में बैठते हैं, लेकिन विपक्ष दोनों सदनों की कार्यवाही नहीं चलने दे रहा है।

सभी प्रकार से चर्चा के लिए तैयार

उन्होंने कहा, '' "लापता, भाग गए, भगोड़े.." इस प्रकार की भाषा भारत के सार्वजनिक जीवन और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ी है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ है, तब से लगातार मैं संसद में आता हूं, अपने कक्ष में बैठता हूं। चूंकि संसद भवन में विपक्ष दोनों सदनों में कार्यवाही चलने नहीं दे रहा है, तो कोई जाकर क्या करेगा?'' गृह मंत्री ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार नीट से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों के मुद्दे पर सभी प्रकार से चर्चा के लिए तैयार है, समय तय किया जाए और विपक्ष भी चर्चा के लिए तैयार हो जाए।

अब विपक्ष को तय करना है

उन्होंने कहा, ''मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सभी प्रकार के जवाब दूंगा, सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। मैं इस बात पर भी चर्चा करूंगा कि आपने (विपक्ष) चर्चा क्यों नहीं चाही।'' शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को संसद की कार्यवाही चलने देनी चाहिए। उनका कहना था, ''मैं हर चीज का जवाब दूंगा ताकि देश की जनता के सामने दूध का दूध, पानी का पानी हो जाए।'' गृह मंत्री ने कहा कि अब विपक्ष को तय करना है कि उन्हें चर्चा करनी है या हंगामा करना है।

स्पीकर ओम बिरला को शाह की चिट्ठी

बाद में, शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक चिट्ठी लिखकर उनसे नीट प्रश्नपत्र लीक मुद्दे को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर सदन में चर्चा के लिए विपक्ष से बातचीत करने करने का आग्रह किया और कहा कि वह सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। विपक्षी दलों ने गृह मंत्री पर निशाना साधा और कहा कि उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था।

देश भाषण सुनने के मूड में नहीं

दूसरी तरफ, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष को गृह मंत्री का 'लेक्चर' सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है, बल्कि उन्हें सिर्फ यह बताना चाहिए कि दिल्ली में छात्रों पर ''गोली चलाने'' का आदेश किसने दिया था। उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि यदि शाह ने आदेश दिया था तो वह दोषी हैं और यदि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं थी तो 'अक्षम' हैं तथा इन दोनों ही परिस्थितियों में उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शाह पर कटाक्ष करते हुए कहा कि देश भाषण सुनने के मूड में नहीं है। यादव ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''संसद में जवाब देने के लिए सरकार जो समय-सीमा तय करना चाहती है, वो स्वयं में अलोकतांत्रिक है। दरअसल ये जवाब नहीं होगा, थोथा बयान होगा। सच तो ये है कि भाजपा चाह ही नहीं रही है कि कोई जवाब दिया जाए, वो तो सत्र का समापन करने के लिए उतावली है। ज़िम्मेदारी और जवाबदेही समय की किसी शर्त से नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व के तर्क से निभाई जाती है।'' (भाषा इनपुट्स के साथ)

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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