पाकिस्तान से हुआ नहीं, अब भारत से ही ईरान को उम्मीद; बताया महान राष्ट्र
आपको बता दें कि ब्रिक्स बैठक के इतर ईरानी विदेश मंत्री अराघची भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

Iran-US: पश्चिम एशिया में जारी तनाव को रोकने के पाकिस्तान के प्रयासों का असर नहीं दिख रहा है। अब भारत पर दुनिया की निगाहें टिकी हैं। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी को भी भारत से उम्मीद है। उन्होंने बुधवार को कहा कि ईरान शांति और सुरक्षा बहाल करने के लिए भारत जैसे महान राष्ट्र की किसी भी पहल का स्वागत करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत जैसे स्वतंत्र और विकासशील देशों की यह जिम्मेदारी है कि वे युद्ध को रोकने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करें।
गरीबाबादी का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची 14-15 मई को होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। गरीबाबादी ने खुलासा किया कि ब्रिक्स का एक सदस्य देश ईरान की निंदा करने वाले प्रस्ताव को शामिल करने पर अड़कर साझा घोषणापत्र पर सहमति नहीं बनने दे रहा है। उनका इशारा यूएई की तरफ था।
उन्होंने कहा कि चूंकि यह बैठक भारत की अध्यक्षता में हो रही है, इसलिए ईरान चाहता है कि यह सफल हो और दुनिया को ब्रिक्स के विभाजित होने का संकेत न जाए।
अब जहाजों को देना होगा टैक्स
28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जहां लगभग एक दर्जन भारतीय जहाज फंसे हुए हैं। गरीबाबादी ने स्पष्ट किया कि अब इस जलमार्ग का उपयोग करने वाले प्रत्येक जहाज को शुल्क देना होगा। उन्होंने इसे टोल कहने से इनकार करते हुए कहा कि यह ईरान और ओमान द्वारा प्रदान की जाने वाली नेविगेशन और बचाव सेवाओं के लिए लिया जाने वाला सर्विस चार्ज होगा। उन्होंने कहा कि चूंकि ईरान 1982 के 'यूएन कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ द सी' (UNCLOS) का सदस्य नहीं है, इसलिए उस पर कोई अंतरराष्ट्रीय बाध्यता नहीं है।
पड़ोसी देशों पर हमले के आरोप
उप विदेश मंत्री ने पुष्टि की कि यूएई और सऊदी अरब जैसे पड़ोसी देशों की धरती से ईरान पर हमले हुए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान ने इन हमलों के दस्तावेजी प्रमाण उन देशों को भेजे हैं और चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अपने पड़ोसियों पर हमला नहीं किया, बल्कि पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जहां से ईरान पर हमले किए गए थे।
भारत की भूमिका पर जोर
गरीबाबादी ने विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज से मुलाकात के दौरान भारत से इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए नेतृत्व करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के इस युद्ध के वैश्विक परिणाम हैं और भारत जैसा महत्वपूर्ण देश शांति स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
आपको बता दें कि ब्रिक्स बैठक के इतर ईरानी विदेश मंत्री अराघची भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
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लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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