तिरुपति लड्डू मामले में SIT ने दे दी क्लीनचिट? TTD के चेयरमैन ने किया बड़ा दावा
तिरुपति लड्डू मामले की फाइनल चार्जशीट एसआईटी ने फाइल की है। वाईएसआरसीपी का दावा है कि इस जार्जशीट में उसे क्लीनचिट दी गई है। जबकि टीटीडी के चेयरमैन ने कहा कि YSRCP झूठ बोल रही है।
तिरुपति में लड्डू प्रसाद में मिलावटी घी के विवाद पर टीटीडी (तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम) के अध्यक्ष बीआर नायडू ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में क्लीन चिट मिलने की झूठी जानकारी दी जा रही है। यह केवल श्रद्धालुओं को भरमाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं के इतने पवित्र मंदिर में इस तरह का मिलावटी प्रसाद बांटकर उनकी भावनओं के साथ खिलवाड़ किया गया था और इसके लिए किसी को क्लीनचिट नहीं मिली है।
मीडिया से बात करते हुए बीआर नायडू ने कहा कि वाईएसआरसीपी की सरकार के दौरान मिलावटी घी से ही लड्डू प्रसाद तैयार किया जाता था। अब लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है कि मिलावटी घी को लेकर क्लीन चिट मिल गई है जो कि पूरी तरह से गलत है। एसआईटी की चार्जशीट में स्पष्ट तौर से कहा गया है कि लड्डू में मिलावटी घी का प्रयोग किया गया था और कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह सब किया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकार में कॉन्ट्रैक्ट के नियमों का उल्लंघन किया गया और ऐसे लोगों को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया जो कि योग्य ही नहीं थे।
उन्होंने कहा, जिस कंपनी के पास एक भी गाय नहीं है, दुग्ध उत्पादन का कोई जरिया नहीं है और शुद्ध घी बनाने की क्षमता ही नहीं है, उसे ठेका दे दिया गया। इसके बाद टीटीडी ने कंपनी से 60 लाख किलो घी जिसकी कीमत 250 करोड़ रुपये थी, खरीदा। नेशनल डेयरी डिवेलपमेंट बोल्ड की जांच में पता चला कि इसमें जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया गया है। बीआर नायडू ने कहा कि इस मिलावटी घी से करीब 20 करोड़ श्रीवरी लड्डू बनाए गए। यह देश में अशुद्धीकरण का सबसे बड़ा उदाहरण है। यह एक लापरवाही नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश थी। इससे करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंची है।
एसआईटी में थी चर्बी वाली बात?
बता दें कि एसआईटी ने अपनी फाइनल चार्जशीच कोर्ट में फाइल की है और दावा किया गया है कि इसमें जानवरों की चर्बी की बात नहीं कही गई है। इसके बाद वाईएसआरसीपी ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नाडयूड और डिप्टी सीएम पवन कल्याण को घेरा है। उनका कहना है कि दोनों मिलकर हिंदुओं की भावना के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। दावा किया गया कि फाइनल चार्जशीट में कहा गया है कि घी बनाने के लिए पाम तेल, पाम कर्नेल तेल और केमिकल एडिटिव्स का इस्तमाल किया गया था लेकिन इसमें जानवरों की चर्बी नहीं थी।
सीएम नायडू ने लगाए थे आरोप
सितंबर 2024 में यह मामला तब उठा था जब चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि जगन मोहन रेड्डी की सरकार में तिरुपति में लड्डू बनाने के लिए जानवरों की चर्बी वाले घी का इस्तेमाल होता था। इसके बाद खूब बवाल हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी बना दी थी। इस मामले में उत्तराखंड की भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के डायरेक्टर पोमिल जैन और विपिन जैन को भी आरोपी बनाया गया था। टीडीपी का कहना है कि एसआईटी की चार्जशीट में स्पष्ट कहा गया है कि यह घी मिलावटी थी। इसे बनाने में एक बूंद भी घी का इस्तेमाल नहीं किया गया था।

लेखक के बारे में
Ankit Ojhaविद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।
राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।
अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
और पढ़ें



