क्या NOTA के कारण एक भी उत्कृष्ट नेता का चुनाव हुआ? नहीं भर सकता एक भी सीट, क्यों बोला SC?

भाषा, नई दिल्ली
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सुनवाई के दौरान, जस्टिस बागची ने पूछा, ''क्या नोटा के लागू होने से निर्वाचित नेताओं की उत्कृष्टता में सुधार हुआ है?'' न्यायाधीश ने कहा कि नोटा एक ​​व्यक्ति नहीं बन सकता है क्योंकि अधिकतम वोट मिलने के बावजूद यह एक भी सीट नहीं भर सकता।

क्या NOTA के कारण एक भी उत्कृष्ट नेता का चुनाव हुआ? नहीं भर सकता एक भी सीट, क्यों बोला SC?

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूछा कि क्या विधानसभा और आम चुनावों में नोटा (NOTA) विकल्प के प्रावधान से 'निर्वाचित नेताओं की उत्कृष्टता' में कोई सुधार हो पाया है? एकल उम्मीदवार वाले चुनावों सहित सभी चुनावों में 'नोटा' विकल्प को अनिवार्य बनाने का अनुरोध करने वाली एक याचिका की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि इस विकल्प से एक सीट भी नहीं भरी जा सकती है।

देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के एक प्रावधान को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह कहा गया कि संबंधित प्रावधान मतदाताओं को एकमात्र उम्मीदवार के मामले में 'नोटा' विकल्प चुनने से रोकता है। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज बनाम भारत संघ के मामले से संबंधित ऐतिहासिक फैसले में जारी निर्देश के मद्देनजर 2013 में 'नोटा' (उपर्युक्त में से कोई नहीं) को पेश किया गया था।

नोटा एक ​​व्यक्ति नहीं बन सकता

मंगलवार को संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, जस्टिस बागची ने पूछा, ''क्या नोटा के लागू होने से निर्वाचित नेताओं की उत्कृष्टता में सुधार हुआ है?'' न्यायाधीश ने कहा कि नोटा एक ​​व्यक्ति नहीं बन सकता है क्योंकि अधिकतम वोट मिलने के बावजूद यह एक भी सीट नहीं भर सकता। पीठ ने यह भी कहा कि चुनावों में मतदान को अनिवार्य बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि अच्छे उम्मीदवार जीतें।

इस तरह कानून की परीक्षा नहीं ली जा सकती

अदालत ने इस बात पर भी खेद व्यक्त किया कि चुनावों में शिक्षित और संपन्न मतदाता, अशिक्षित मतदाताओं और महिलाओं की तुलना में शायद ही कभी मतदान करते हैं। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा, ''हम बहुत सारे काल्पनिक आधारों पर विचार कर रहे हैं। कानून की परीक्षा इस तरह नहीं ली जा सकती। मतदान का अधिकार संवैधानिक अधिकार है।''

चुनाव आयोग को भी नोटिस

शीर्ष अदालत ने अब इस याचिका पर सुनवाई के लिए 17 मार्च की तारीख तय की है। इसने 21 अक्टूबर, 2024 को याचिका पर विचार करने की सहमति जताई थी और केंद्र तथा निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया था। 'विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी' नामक कानूनी थिंक-टैंक द्वारा दायर जनहित याचिका में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 53(2) की वैधता को चुनौती दी गई है। धारा 53(2) में कहा गया है कि यदि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या भरी जाने वाली सीटों की संख्या के बराबर है, तो चुनाव अधिकारी उन सभी उम्मीदवारों को उन सीटों को भरने के लिए विधिवत निर्वाचित घोषित करेगा। याचिका में यह भी कहा गया है कि चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 11 को प्रपत्र 21 और 21बी के साथ मिलाकर निरस्त किया जाए।

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Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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