
आठ महीने में ही ऑपरेशन सिंदूर की तबाही भूल गया पाक या फिर नई साजिश? बार-बार क्यों भेज रहा ड्रोन
रक्षा सूत्रों के मुताबिक हालिया घटनाओं में सीमा पार से भेजे गए ड्रोन आत्मघाती (कामिकाज़े) ड्रोन नहीं हैं बल्कि ये ड्रोन अधिकतर छोटे और टोही (रिकॉनिसेंस) उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
पिछले साल मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान करारी शिकस्त झेलने और भारी तबाही झेलने के आठ महीने बाद पाकिस्तान ने एक बार फिर से उकसावे की कोशिश शुरू कर दी है। पिछले कुछ दिनों से पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से ड्रोन भेजकर उकसावे की कोशिश कर रहा है। 9 जनवरी से अब तक जम्मू-कश्मीर के कई सीमाई क्षेत्रों में पाकिस्तानी ड्रोन देखे जा चुके हैं, जिस पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इसके बावजूद पाकिस्तान की ओर से ड्रोन भेजने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा।
गुरुवार रात भी पुंछ और सांबा के रामगढ़ सेक्टर में पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए। इससे पहले नौशेरा और राजौरी में भी इसी तरह की गतिविधियां सामने आई थीं, जिसके बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने एंटी-ड्रोन सिस्टम सक्रिय कर दिए। हालांकि, नई दिल्ली ने इस्लामाबाद से घुसपैठ रोकने का आग्रह किया है लेकिन पड़ोसी बेफिक्र लग रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार पाकिस्तान ने अचानक सीमा पार से ड्रोन क्यों भेजना शुरू कर दिया है?
आत्मघाती नहीं, टोही ड्रोन भेज रहा पाकिस्तान
संभावित कारणों पर जाने से पहले, यह ध्यान रखना जरूरी है कि पाकिस्तान द्वारा भेजे जा रहे ड्रोन उस तरह के कामिकेज़-क्लास के नहीं हैं, जिन्हें पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन देश ने तैनात किया था। कामिकेज़-क्लास ड्रोन को आत्मघाती ड्रोन भी कहा जाता है। ये, ऐसे UAV होते हैं जिन्हें किसी इलाके में मंडराने, सही टारगेट खोजने और फिर हमला करने के लिए डिजाइन किया जाता है।
रक्षा सूत्रों के मुताबिक हालिया घटनाओं में सीमा पार से भेजे गए ड्रोन आत्मघाती (कामिकाज़े) ड्रोन नहीं हैं। ये ड्रोन अधिकतर छोटे और टोही (रिकॉनिसेंस) उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आर्मी डे पर मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि ये ड्रोन बहुत छोटे हैं, कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और कई बार लाइट जलाकर भेजे जाते हैं। जनरल द्विवेदी ने कहा, “15 जनवरी (आर्मी डे) और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के आसपास पाकिस्तान को आशंका रहती है कि भारत कोई कदम उठा सकता है। ऐसे समय में वह ड्रोन गतिविधियां बढ़ा देता है।”
अब तक कहां-कहां दिखे ड्रोन?
9 जनवरी से, पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा (IB) और नियंत्रण रेखा (LoC) के साथ अलग-अलग सेक्टरों में कम से कम 10-12 ड्रोन भेजे हैं। गुरुवार को पुंछ और सांबा के रामगढ़ सेक्टर में ड्रोन देखे गए। इससे पहले, नौशेरा और राजौरी सेक्टरों में भी ड्रोन गतिविधि देखी गई थी, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने एंटी-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (एंटी-UAS) डिफेंस को एक्टिवेट किया और गोलियां चलाईं। शक है कि 9 जनवरी को पाकिस्तान से आए एक ड्रोन ने सांबा जिले में दो पिस्तौल, तीन मैगज़ीन, 16 गोलियां और एक ग्रेनेड गिराया था। गणतंत्र दिवस समारोह से पहले कड़ी निगरानी के बीच तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने इन्हें बरामद किया। सोमवार रात को राजस्थान के जैसलमेर के ऊपर एक संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन भी देखा गया।
पाकिस्तान ड्रोन क्यों भेज रहा है?
सैन्य और रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के इन ड्रोन अभियानों के पीछे कई उद्देश्य हो सकते हैं। मसलन, भारतीय रक्षा प्रणाली की जांच करना, सीमा पार से घुसपैठ की संभावना तलाशना या हथियार और ड्रग्स की तस्करी की कोशिश करना। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा ड्रोन गतिविधियों में बढ़ोतरी मुख्य रूप से भारतीय सुरक्षा व्यवस्था में कमजोरियों का पता लगाने और भारत के प्रतिक्रिया समय का परीक्षण करने के लिए है। LoC के साथ आगे के इलाकों में ऊबड़-खाबड़ इलाका और कम निगरानी इंफ्रास्ट्रक्चर ड्रोन को गतिविधियों की निगरानी के लिए अहम हैं।
'पहचान अभियान' पर पाकिस्तान
भू-राजनीतिक विशेषज्ञ, सुमित राज ने ट्वीट किया, "पाकिस्तान 'पहचान अभियान' के लिए ड्रोन भेज रहा है। पाकिस्तान बिना पेलोड के जो ड्रोन भेजता है, वह भारत की प्रतिक्रिया की जांच करने के लिए है। पाकिस्तान यह जांच कर रहा है कि भारत द्वारा कौन सा रडार सिस्टम सक्रिय किया गया है। यह जांच कर रहा है कि किन सेक्टरों में भारतीय सेना की आवाजाही बढ़ रही है।" सेना प्रमुख ने भी इसी बात को दोहराया, जिन्होंने सुझाव दिया कि ड्रोन घुसपैठ पाकिस्तान द्वारा भारतीय सुरक्षा व्यवस्था में कमियों की जांच करने का एक प्रयास है, जिसके माध्यम से वे आतंकवादियों को भेज सकते हैं।
घुसपैठ की संभावनाएं तलाशना
सेना प्रमुख ने भी संकेत दिया कि पाकिस्तान यह देखने की कोशिश कर रहा है कि कहीं सीमा पर कोई सुरक्षा में ढील या खाली जगह तो नहीं है, जहां से आतंकियों को भेजा जा सके। जनरल द्विवेदी ने कहा, "यह संभव है कि वे देखना चाहते थे कि क्या भारतीय सेना में कोई कमी है, कोई ढिलाई है, कोई ऐसी कमी है जिसके माध्यम से वे आतंकवादियों को भेज सकें।" हालांकि उन्होंने साफ किया, “पाकिस्तान को नकारात्मक जवाब मिला है। आज की तारीख में कोई ऐसा गैप नहीं है, जहां से आतंकियों को भेजा जा सके।”

हथियार और नशे की तस्करी की कोशिश
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद का कहना है कि पाकिस्तान ड्रोन के ज़रिये हथियार और ड्रग्स भेजकर आतंकवाद को फिर से ज़िंदा करने की कोशिश कर रहा है, खासकर ऐसे समय में जब स्थानीय भर्ती लगभग खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत को पूरी तरह अधिकार है कि वह ड्रोन लॉन्चपैड्स और ठिकानों पर कार्रवाई करे।
भारत की चेतावनी, पाकिस्तान बेपरवाह
भारत ने पाकिस्तान को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि किसी भी दुस्साहस का कड़ा जवाब दिया जाएगा। इसके बावजूद ड्रोन गतिविधियों का जारी रहना इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान अपनी पुरानी उकसावे वाली रणनीति से बाज़ नहीं आ रहा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि गणतंत्र दिवस से पहले और बाद में भारत क्या अगला कदम उठाता है, और क्या पाकिस्तान को फिर किसी बड़े जवाब का सामना करना पड़ेगा?





