पिता के अंतिम संस्कार के लिए बेटियों के पास वक्त नहीं; 5100 भेजें, वीडियो कॉल पर देख ली मुखाग्नि
रिपोर्ट्स के मुताबिक शिवचरण जी का कोई बेटा नहीं था। उन्होंने अपनी तीनों बेटियों को बेटों से बढ़कर माना, उन्हें अच्छी से अच्छी शिक्षा दी और काबिल बनाया। लेकिन उनकी मौत के बाद जो हुआ उसने सबको झकझोर दिया है।

एक पिता अपनी पूरी जिंदगी खुद को तिल-तिल जलाकर अपनी संतानों के सुनहरे भविष्य की नींव रखता है। लेकिन जब वही पिता दुनिया से रुखसत हो जाए और उसकी आखिरी सांसों के वक्त उसके अपने ही पास न हों, तो इसे किस्मत का मारा ही कहा जाएगा। सोनीपत के एक वृद्धाश्रम से एक ऐसी ही घटना सामने आई है। यह कहानी उस बदनसीब बाप की है जिसने अपनी तीनों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर काबिल तो बना दिया, लेकिन उनके पास अपने पिता को अंतिम विदाई देने तक का वक्त नहीं था।
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक मूल रूप से मुंबई के रहने वाले और पूर्व कपड़ा व्यापारी शिवचरण राम रतन गुप्ता अपनी पत्नी मीना के साथ पिछले डेढ़ साल से सोनीपत के वेस्ट राम नगर स्थित वृद्धाश्रम में रह रहे थे। पत्नी का निधन कुछ समय पहले ही हो गया था। रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार तड़के करीब साढ़े 3 बजे राम रतन जी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इसके बाद उनकी 3 बेटियों को निधन की जानकारी दी गई। हालांकि बेटियों ने कहा कि वे वहां नहीं आ सकती।
बेटियों को पहले से थी जानकारी
वृद्धाश्रम के संचालक आनंद कुमार के मुताबिक, "शिवचरण जी की तबीयत खराब होने की जानकारी 20 दिन पहले ही उनकी बेटियों को दे दी गई थी। हमने उनसे आने की गुजारिश भी की, लेकिन कोई नहीं आया। बीमारी के दिनों में बेटियों के फोन आने भी बंद हो गए थे।" निधन के बाद वृद्धाश्रम प्रबंधन ने उनसे दोबारा संपर्क किया और कहा कि अगर वे आ रही हैं तो अंतिम संस्कार की व्यवस्था थोड़ी देर के लिए रोक दी जाएगी। हालांकि बेटियों ने समय न होने की बात कहकर आने से असमर्थता जता दी।
भेज दिए 5100 रुपये
जानकारी के मुताबिक शिवचरण जी का कोई बेटा नहीं था। तीनों बेटियों की बात की जाए तो अनीता जहां नेपाल में शिक्षिका है, वहीं दूसरी बेटी निशा यूपी के आजमगढ़ में है। सबसे छोटी बेटी प्रिया मुंबई में रहती है। तीनों शादीशुदा हैं और अपने-अपने परिवारों में सेटल हैं। जब उनसे पिता के अंतिम संस्कार के लिए संपर्क किया गया तो अनीता ने ऑनलाइन 5,100 रुपये भेज दिए और कहा कि रीति रिवाज से अंतिम संस्कार कर दिया जाए। तीनों बेटियों ने नेपाल, यूपी और मुंबई में बैठकर अपने-अपने मोबाइल पर वीडियो कॉल के जरिए ही पिता का अंतिम संस्कार देखा।
इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में एक बेटी अंतिम संस्कार की कुछ वीडियोज भेजने की बात करती नजर आ रही है। वह यह भी पूछती है कि अंतिम संस्कार में और कितना वक्त लगेगा। जानकारी के मुताबिक बेटियों ने पहले पिता की अस्थियों को संभालकर रखने को कहा था, लेकिन बाद में फिर फोन करके कहा कि उनके पास आने का वक्त नहीं है, इसलिए वृद्धाश्रम वाले ही उन अस्थियों को गंगा जी में प्रवाहित कर दें।
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Jagriti Kumariजागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।
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