सरकार की आलोचना करें, लेकिन... जेन-Z प्रोटेस्ट पर बोले वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे

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Harish Salve: भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने कहा कि लोगों को सरकार की आलोचना करना चाहिए, लेकिन इसका ध्यान रखें कि देश की छवि को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने कहा कि हम जो कुछ भी बोलते हैं,  करते हैं वह पूरी दुनिया में सुना जाता है।

Harish Salve
हरीश साल्वे

Harish Salve: पूरा देश इस समय जेन-जी प्रोटेस्ट की चर्चा कर रहा है। संसद में भी इसी प्रोटेस्ट के ऊपर बात हो रही है। सांसद लगातार जेन-जी की भाषा बोलने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इसी बीच भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि लोकतंत्र में सरकार और उसके संस्थानों की आलोचना करना जरूरी है। ताकि सत्ताधारी लोगों को जमीन पर रखा जा सके और उन पर नजर रखी जा सके। लेकिन हमें कुछ ही ऐसा करने से बचना चाहिए, जिससे भारत की छवि को नुकसान पहुंचे।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में हालिया घटनाक्रमों पर बात करते हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि सरकार की सार्वजनिक आलोचना जरूरी है, लेकिन यह देश की छवि को ताक पर रखकर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, "मैं ज्यादातर समय भारत से बाहर रहने वाला व्यक्ति हूं। एक बात कह सकता हूं कि इस समय पर भारत को दुनिया में बेहद सम्मान की नजर से देखा जा रहा है।"

भारत को लेकर पूरी दुनिया में असहज की स्थिति

साल्वे ने कहा कि पूरी दुनिया भारत की तरक्की देखकर असहज स्थिति में आ जाती है। उन्होंने कहा, "इस समय पश्चिमी देश चुनौतियों सो गुजर रहे हैं। यूरोप खुद को अकेला महसूस कर रहा है। अमेरिका में बैठे लोग भी यह सवाल कर रहे हैं कि आखिर उनके देश में अब संविधान की भावना कितनी मजबूत है। लेकिन जब यह भारत की तरफ देखते हैं, तो एक साथ आ जाते हैं। उनके लिए यह स्वीकार करना मुश्किल हो जाता है कि एक गैर-श्वेत देश कैसे दुनिया का नेतृत्व करने की आकांक्षा रख सकता है।"

कुछ भी करें, देश की छवि खराब नहीं होनी चाहिए- हरीश साल्वे

भारत के सॉलिसिटर जनरल रह चुके हरीश साल्वे ने कहा कि हम कुछ भी करें, लेकिन देश की छवि खराब नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा, "भारत के भीतर सरकार और उसके संस्थानों की कड़ी आलोचना करना जरूरी है। ताकि सरकार में बैठे लोग जवाबदेह बने रहें। लेकिन हमें बहुत सावधानी के साथ यह काम करना होगा। क्योंकि हम इस समय सोशल मीडिया के दौर में रह रहे हैं। हम जो कुछ भी करते हैं या कहते हैं। वह पूरी दुनिया में जाता है। इसलिए हमें देखना चाहिए कि हम जो कह रहे हैं कहीं उससे भारत की छवि को तो नुकसान नहीं पहुंच रहा है।"

आपको बता दें, हरीश साल्वे का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब पिछले नीट पेपर लीक के मामले में हुए प्रोटेस्ट की वजह से पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा है। कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले हुए इस प्रोटेस्ट में बड़ी संख्या में जेन-जी ने सड़कों पर उतर कर अपनी मांग को सामने रखा था। हालांकि, इस दौरान पीएम मोदी समेत कई लोगों को लेकर ऐसी भाषा बोली गई, जिसको लेकर लोगों ने आपत्ति जताई है।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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