सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दुनिया से विदा हो सकेंगे हरीश राणा, क्या हुआ था 20 अगस्त 2012 को
पीठ ने यह भी कहा था कि चिकित्सकों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हरीश राणा के ठीक होने की कोई संभावना नहीं है। पीठ ने कहा, हमें अब कुछ करना होगा। हम उसे इस तरह की स्थिति में जीवित रखने की अनुमति नहीं दे सकते।'

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया और 13 साल से कोमा में हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी है। शीर्ष न्यायालय ने जनवरी में इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। खास बात है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने 13 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से राणा के माता-पिता और उनके छोटे भाई से मुलाकात की थी, जिन्होंने कहा था कि वे नहीं चाहते कि हरीश को और दुख सहना पड़े।
कैसे इस हाल में पहुंचे हरीश राणा
घटना साल 2012 की है। उस समय हरीश राणा (Harish Rana Case) चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग कर रहे थे। पढ़ाई के दौरान वह पीजी यानी पेयिंग गेस्ट के तौर पर रह रहे थे। 20 अगस्त को राखी के त्योहार पर वह हादसे का शिकार हो गए। दरअसल, वह अपने पीजी की चौथी मंजिल का बालकनी से गिर गए थे। इस हादसे में उन्हें सिर में गंभीर चोट आईं थीं, जिसके चलते उनका शरीर का चलना 100 प्रतिशत बंद हो गया था।
डॉक्टरों नहीं चला पाए
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉक्टरों ने कहा कि हरीश न तो अपनी आंखें खोल पा रहे थे और न ही हाथ पैर हिला पा रहे थे। तब से ही वह परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट में हैं। PVS ऐसी स्थिति को कहा जाता है, जहां व्यक्ति की आंखें तो शायद खुली हो सकती हैं, लेकिन वह अपने आसपास होने वाली गतिविधियों को समझने, कुछ भी सोच नहीं पाता। साथ ही वह गतिविधियां करने में भी असमर्थ हो जाता है।
बीते साल दिसंबर ने जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने नोएडा के एक अस्पताल के प्राथमिक बोर्ड की रिपोर्ट देखकर दुख जताया था। पीठ ने यह भी कहा था कि चिकित्सकों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हरीश राणा के ठीक होने की कोई संभावना नहीं है। पीठ ने कहा, हमें अब कुछ करना होगा। हम उसे इस तरह की स्थिति में जीवित रखने की अनुमति नहीं दे सकते।'
परिवार से मिलकर क्या बोले जज
जनवरी में परिवार से मिलने के बाद पीठ ने कहा था, 'उन्होंने अपने तरीके से यह बताने की कोशिश की कि लगभग दो वर्षों की अवधि में दिए गए चिकित्सा उपचार को बंद कर दिया जाए और प्रकृति को अपना काम करने दिया जाए।'
शीर्ष अदालत ने कहा, 'उनके अनुसार, यदि उपचार प्रभावी साबित नहीं हो रहा है, तो इस तरह का उपचार जारी रखने और हरीश को बेवजह कष्ट देने का कोई तुक नहीं है। उनका मानना है कि हरीश अति कष्ट में है और उसे हर तरह के दर्द और पीड़ा से मुक्ति मिलनी चाहिए।'
13 साल से सो रहे हरीश राणा दुनिया से विदा हो जाएंगे
32 साल के राणा को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव युथनेसिया या निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी है। पीठ ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि उपचार को एक सुनियोजित तरीके से बंद किया जाए ताकि गरिमा बनी रहे। बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड की रिपोर्ट के हवाले से कहा था कि राणा बेहद दयनीय स्थिति में हैं। उनके इलाज का खर्च भी परिवार को उठाना मुश्किल हो रहा था।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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