
'हराम का पैसा मिले तो ले लो और बनवा लो शौचालय', क्यों बोले AIMIM चीफ ओवैसी?
ओवैसी ने कहा कि अगर हमने उम्मीदवार नहीं उतारे होते, तो पैसा नहीं बांटा जाता... पैसा ले लीजिए और अगर आपको लगता है कि यह अनैतिक और 'हराम' (अवैध) है, तो इसका इस्तेमाल शौचालय बनाने में कीजिए।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) चीफ और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को कहा कि अगर चुनाव के दौरान राजनीतिक दल पैसा बांटते हैं तो उसे ले लेना चाहिए और उस हराम के पैसे से शौचालय बनवा लेना चाहिए। महाराष्ट्र के लातूर जिले में आगामी लातूर नगर निगम चुनाव के सिलसिले में एक रैली को संबोधित करते हुए ओवैसी ने नरेन्द्र मोदी सरकार पर उसकी विदेश नीति को लेकर भी हमला किया। उन्होंने वक्फ (संशोधन) अधिनियम की भी आलोचना की।
उन्होंने कहा, ‘‘एआईएमआईएम के चुनाव मैदान में उतरने के साथ ही प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों ने मतदाताओं के बीच नकद राशि बांटना शुरू कर दिया। अगर हमने उम्मीदवार नहीं उतारे होते, तो पैसा नहीं बांटा जाता... पैसा ले लीजिए और अगर आपको लगता है कि यह अनैतिक और 'हराम' (अवैध) है, तो इसका इस्तेमाल शौचालय बनाने में कीजिए।’’
दलितों-मुसलमानों तक विकास अब भी नहीं पहुंचा: ओवैसी
ओवैसी ने यह कहते हुए मुसलमानों से मजबूत राजनीतिक नेतृत्व बनाने का आह्वान किया कि अफसोस है कि अल्पसंख्यकों को छोड़कर हर समुदाय के पास राजनीतिक शक्ति है। उन्होंने कहा कि दलित और मुसलमान गरीब आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं लेकिन अबतक विकास उनके क्षेत्रों तक नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा,‘‘भाजपा राष्ट्रवाद की बात करती है, लेकिन किसान मर रहे हैं, युवा बेरोजगार हैं और वह सिर्फ लव जिहाद की बात करती है।’’
पीएम मोदी पर भी साधा निशाना
ओवैसी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर चुप हैं,‘‘जो एक हवाई जहाज में कहते हैं कि मोदी मुझे खुश करने के लिए निर्णय लेते हैं।’’ ओवैसी ने दावा किया कि महाराष्ट्र सरकार की 'माझी लाडकी बहिन' योजना के लाभार्थियों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। उन्होंने पूछा, “सरकार ने 9.30 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इस कर्ज को कौन चुकाएगा?”
अजित पवार पर भी निशाना
उन्होंने उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने चाचा और राजनीतिक गुरु शरद पवार के प्रति वफादार नहीं रहा, वह जनता के प्रति कैसे वफादार हो सकता है? वक्फ (संशोधन) अधिनियम पर ओवैसी ने आरोप लगाया कि इस कानून का दुरुपयोग मस्जिदों को बंद करने और सदियों पुरानी दरगाहों के स्वामित्व को चुनौती देने के लिए किया जा रहा है।
हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने 2006 के मुंबई ट्रेन बम धमाकों के एक दोषी की जेल में हुई मौत के हालात पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों में 185 लोगों की जान चली गई थी, जिसके चलते 11 मुसलमानों को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने (अदालत द्वारा बरी किए जाने से पहले) 19 साल जेल में बिताए। उनमें से एक की मौत हो गई, लेकिन कोई भी यह बताने को तैयार नहीं है कि उसकी मौत कैसे हुई।’’

लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।




