हमारे दामाद हैं क्या? जल्दी-जल्दी भगाओ, अवैध बांग्लादेशियों पर सीएम शुभेंदु का कड़क अंदाज

लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी बांग्लादेशी घुसपैठियों पर काफी सख्त हैं। मंगलवार को उन्होंने 24 परगना में जुटे अवैध बांग्लादेशियों को लेकर कहाकि इन्हें जल्दी-जल्दी भगाओ। यह हमारे दामाद हैं क्या…

हमारे दामाद हैं क्या? जल्दी-जल्दी भगाओ, अवैध बांग्लादेशियों पर सीएम शुभेंदु का कड़क अंदाज

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को कहाकि उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट उपमंडल में हकीमपुर सीमा चौकी पर बड़ी संख्या में कथित अवैध बांग्लादेशी नागरिक जमा हो गए हैं। उन्होंने अधिकारियों से इन सभी के निर्वासन में तेजी लाने का आग्रह किया। कल्याणी में नदिया, हुगली और उत्तर 24 परगना जिलों के अधिकारियों की उपस्थिति में हुई एक प्रशासनिक बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, अधिकारी ने दावा किया कि सीमा चौकी पर एकत्रित लोग बांग्लादेश लौटने के इच्छुक हैं। साथ ही सीएम ने यह भी कहाकि इनके ऊपर खर्च क्यों करना, क्या ये हमारे दामाद हैं।

विदेशी अधिनियम का जिक्र
विदेशी अधिनियम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें पहले से ही प्रावधान मौजूद हैं और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहाकि यह एक मौजूदा विदेशी अधिनियम है, कोई नया नहीं। और इन लोगों को यहां से जाना ही होगा। बांग्लादेशियों को वापस लेना उनकी जिम्मेदारी है। मुझे याद है कि उनके (बांग्लादेशी) प्रवक्ता ने कहा था कि वे अपने नागरिकों को वापस ले लेंगे। मैंने इसे सोशल मीडिया और यूट्यूब पर देखा है। हमने पुलिस को पहले ही कह दिया है कि उन्हें जेल न भेजें। उनके खाने-पीने और दवाइयों पर खर्च करने का कोई मतलब नहीं है। क्या वे हमारे दामाद हैं?

जल्दी-जल्दी भागो
अधिकारी ने सीमा चौकी पर जमा भीड़ का जिक्र करते हुए कहाकि जल्दी-जल्दी भागो नहीं तो जो करना है सरकार करेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वहां मौजूद लोगों को जल्द से जल्द उनके देश वापस भेजा जाए। अधिकारी ने दावा किया कि पुलिस को निर्देश दिया गया था कि वह अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को अदालत में न भेजे और इसके बजाय द्विपक्षीय समझौतों का हवाला देते हुए उन्हें सीधे बीएसएफ को सौंप दे।

उन्होंने कहाकि हम उन्हें जेलों में खाना खिलाना या उन पर जनता का पैसा बर्बाद करना नहीं चाहते। इससे वास्तव में भारतीयों को, विशेषकर पश्चिम बंगाल में, नुकसान हो रहा है। कानून तो था, लेकिन कुछ लोगों ने वोट बैंक के लिए इसका इस्तेमाल किया। हम वोट बैंक से ऊपर उठकर देश और राज्य के हित में इसे लागू करेंगे।

सख्त है सरकार की नीति
राज्य सरकार ने सभी जिलों में गिरफ्तार किए गए विदेशियों और रिहा किए गए विदेशी कैदियों को तब तक रखने के लिए निरुद्ध केंद्र स्थापित किए हैं जब तक कि निर्वासन की औपचारिकताएं पूरी नहीं हो जातीं। हालांकि इसे केंद्रीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप एक प्रक्रियात्मक अभ्यास के रूप में प्रस्तुत किया गया है, लेकिन यह निर्देश अधिकारी द्वारा सार्वजनिक रूप से एक सख्त घुसपैठ-विरोधी ढांचा पेश करने और यह घोषणा करने के कुछ दिनों बाद आया है कि उनकी सरकार ने बांग्लादेशियों की पहचान करने और उन्हें सीमा पार वापस धकेलने के लिए पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो की नीति अपनाई है।

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Deepak Mishra

लेखक के बारे में

Deepak Mishra

मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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