मुंबई के ब्रीच कैंडी क्लब पर अब भी यूरोपियन का अधिकार, शशि थरूर को भी फेंक दिया गया था बाहर

Ankit Ojha लाइव हिन्दुस्तान
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मुंबई का ब्रीच कैंडी क्लब अब भी यूरोपीयन चलाते हैं। इसके ट्रस्ट में कोई भारतीय नहीं है। हालांकि अब भारतीयों को मेंबरशिप मिलती है। बचपन में शशि थरूर को एक बार यहां स्विमिंग पूल से बाहर फेंक दिया गया था।

मुंबई के ब्रीच कैंडी क्लब पर अब भी यूरोपियन का अधिकार, शशि थरूर को भी फेंक दिया गया था बाहर

दिल्ली का जिमखाना एलीट क्लब इस समय विवाद का विषय बना हुआ है। राजधानी के सबसे पॉशि इलाके में 27 एकड़ में फैला यह जिमखाना क्लब केवल स्पोर्ट्स और इंजॉयमेंट का सेंटर नहीं है बल्कि यह स्टेटस दिखाने का एक जरिया है। इसे ब्रिटिशर्स ने शुरू किया था। आज इसकी मेंबरशिप के लिए लोगों को सालों तक इंतजार करना पड़ता है। इसकी मेंबरशिप बड़े नौकरशाहों, जजों, रसूखदार बिजनेसमैन और जाने-माने लोगों को ही मिलती है। इसकी नींव ब्रिटिश अधिकारियों और कई रियासतों ने मिलकर रखी थी। सरकार ने इसे खाली करने का नोटिस जारी कर दिया है। सरकार का कहना है कि इतनी बड़ी पब्लिक प्रॉपर्टी का इस्तेमाल महज कुछ लोग कर रहे हैं।

मुंबई में भी है ऐसा क्लब, अब भी यूरोपियन का अधिकार

दिल्ली के जिमखाना क्लब की तरह ही मुंबई में भी ब्रीच कैंडी क्लब है जिसे आज भी यूरोपियन ही चलाते हैं। एक बार तो कांग्रेस के सांसद शशि थरूर को भी यहां से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।दक्षिण मुंबई स्थित बीच कैंडी स्विमिंग बाथ ट्रस्ट जिसे ब्रीच कैंडी क्लब के नाम से जाना जाता है, दिल्ली के जिमखाना क्लब से कम नहीं है।

1878 में मुंबई के बीच कैंडी क्लब की शुरुआत हुई थी। इसमें केवल यूरोपीय लोगों को ही जाने की अनुमति थी। 1960 में तमाम दबाव के बाद भारतीयों को भी इसमें एंट्री मिलने लगी। हालांकि इसका पावर स्टरक्चर यूरोपियन लोगों के ही हाथ में था। 1967 मे सिटी सिविल कोर्ट के आदेश के बाद अलग-अलग कैटिगरी के सदस्यों को लेकर फैसला सुनाया गया। आज इसके कुल 4000 के करीब सदस्य हैं जिनमें ज्यादातर भारतीय हैं। हालांकि ट्र्स्ट के चुनाव में कोई भी भारतीय वोट नहीं डाल सकता।

इस क्लब में कम से कम चार एकड़ का स्विमिंग पूल है जो कि अरब सागर के कट पर है। यहां टेनिस के अलावा अन्य खेलों के मैदान हैं। आज भी केवल यूरोपीय या फिर यूरोप का पासपोर्ट रखने वाले लोग ही इसके ट्रस्ट में शामिल किए जाते हैं।

जब शशि थरूर को पूल से बाहर फेंक दिया गया

कांग्रेस सांसद शशि थरूर अपने बचपन का वाकया याद करते हुए लिखते हैं कि 1960 में उन्हें पूल से उठाकर इसलिए फेंक दिया गया था क्योंकि वह भारतीय थे। वह एक अमेरिकी दोस्त के साथ बीच कैंडी क्लब चले गए थे। उनके अमेरिकी दोस्त को लगा कि लोग उनपर ध्यान नहीं देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शशि थरूर को पूल से बाहर निकाला गया और फिर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इस क्लब में गोरे लोगों की ही चलती थी। यहां की विदेशी काले शख्स को भी एंट्री नहीं दी जाती थी।

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लेखक के बारे में

Ankit Ojha

विद्यालयी जीवन से ही कलात्मक अभिव्यक्ति, विचारशील स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व और सामान्य के अंदर डुबकी लगाकर कुछ खास खोज लाने का कौशल पत्रकारिता के लिए अनुकूल साबित हुआ। अंकित ओझा एक दशक से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले अंकित ओझा समाचारों की दुनिया में तथ्यों के महत्व के साथ ही संवेदनशीलता के पक्ष को साधने में निपुण हैं। पिछले चार साल से हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप के 'लाइव हिन्दुस्तान' के लिए चीफ कॉन्टेंट प्रड्यूसर पद पर कार्य कर रहे हैं। इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इंडियन एक्सप्रेस' ग्रुप के साथ भी कार्य कर चुके हैं।


राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राज्य और सामाजिक सरोकारों की खबरों के संपादन में लंबा अनुभव होने के साथ ही अपने-आसपास की घटनाओं में समाचार तत्व निकालने की अच्छी समझ है। घटनाओं और समाचारों से संबंधित फैसले लेने और त्वरित समाचार प्रकाशित करने में विशेष योग्यता है। इसके अलावा तकनीक और पाठकों की बदलती आदतों के मुताबिक सामग्री को रूप देने के लिए निरंतर सीखने में विश्वास करते हैं। अंकित ओझा की रुचि राजनीति के साथ ही दर्शन, कविता और संगीत में भी है। लेखन और स्वरों के माध्यम से लंबे समय तक आकाशवाणी से भी जुड़े रहे। इसके अलावा ऑडियन्स से जुड़ने की कला की वजह से मंचीय प्रस्तुतियां भी सराही जाती हैं।


अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।

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