
गुलशन कुमार को गोलियों से किया था छलनी, जेल में हार्ट अटैक से हो गई रऊफ की मौत
गुलशन कुमार को गोलियों से छलनी करने के दोषी रऊफ दाऊद मर्चेंट की हरसुल जेल में हार्ट अटैक से मौत हो गई। नमाज पढ़ते वक्त उसके सीने में दर्द हुआ था जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया था।
संगीत कंपनी ‘टी-सीरीज’ के मालिक गुलशन कुमार की हत्या मामले में महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित हरसुल जेल में बंद 60 वर्षीय दोषी की शनिवार को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पड़ोसी ठाणे जिले के मुंब्रा के अमृत नगर निवासी मोहम्मद रऊफ दाऊद मर्चेंट सनसनीखेज मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद से 2002 से यहां से लगभग 350 किलोमीटर दूर हरसुल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था।
उन्होंने बताया, "आठ जनवरी की सुबह जेल की बैरक में नमाज पढ़ते समय मर्चेंट को सीने में तेज दर्द हुआ और वह बेहोश हो गया। उसे तुरंत सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण गंभीर दिल का दौरा बताया गया है। मुंब्रा में उसके परिजन उसी शाम उसका शव ले गए और अंतिम संस्कार किया।"
अधिकारी ने बताया कि हरसुल थाने में आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया गया है। मुंबई के पश्चिमी हिस्से में अंधेरी स्थित एक मंदिर के बाहर 12 अगस्त 1997 को तीन लोगों ने गुलशन कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 16 राउंड गोलियां चलाई गईं, जिनमें कुमार के चालक को भी गंभीर चोटें आईं। रऊफ को सेशन कोर्ट ने ही उम्रकैद की सजा सुनाई थी जिसे बाद में हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
क्यों हुई थी गुलशन कुमार की हत्या
डॉन अबु सलेम ने गुलशन कुमार से पांच लाख रुपये मांगे थे। गुलशन कुमार ने वसूली की यह रकम देने से इनकार कर दी। उन्होंने कहा कि इस पैसे से वह वैष्णो देवी में भंडारा कराएंगे। इसी से भड़के अबू सलेम ने शूटर राजा को हत्या की सुपारी दे दी और दिन दहाड़े गुलशन कुमार की हत्या करवा दी।
इस केस में संगीतकार नदीम का नाम आने के बाद वह इंग्लैंड चले गए थे। हालांकि उनके खिलाफ कोई सबूत ना होने की वजह से 2002 में उनके खिलाफ केस रद्द कर दिया गया। हालांकि गिरफ्तारी का वॉरंट नहीं वापस लिया गया।
गुलशन कुमार एक पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखते थे। दिल्ली के देशबंधु कॉलेज से ग्रैजुशन करने के बाद वह दरियागंज स्थित अपने पिता की जूस की दुकान पर काम करने लगे थे। हालांकि उनका मन इस काम में नहीं लगता था। ऐसे में उन्होंने कैसेट्स और रिकॉर्ड्स की दुकान खोल ली। यहीं से वह इसी दिशा में आगे बढ़े और कैसेट्स की इंडस्ट्री खड़ी कर दी। उन्हें कैसेट किंग कहा जाता था। उन्होंने टी सीरीज की स्थापना की। भक्ति गीतों और भजन के चलते उनकी कंपनी फेमस हो गई।
गुलशन कुमार ने दिल्ली पहुंचकर खूब नाम कमाया। उन्होंने करीब 15 फिल्में प्रोड्यूस कीं। 1990 में आई फिल्म आशिकी से उन्हें काफी पहचान मिली। फिलहाल उनके बेटे भूषण कुमार उनका काम संभाल रहे हैं।





