13000 करोड़ के निकोबार एयरपोर्ट को मंजूरी, धरा रह गया राहुल गांधी का विरोध
Great Nicobar Project Airport: राहुल गांधी के कड़े विरोध के बीच सरकार ने ग्रेट निकोबार में 13,000 करोड़ रुपये के नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को मंजूरी दे दी है। वहीं INS बाज के विस्तार का प्लान ड्रॉप कर दिया गया है। जानिए क्या है पूरा मामला।

Great Nicobar Project Airport: केंद्र सरकार ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के तहत एक बड़ा फैसला लेते हुए 13000 करोड़ रुपये के नए ग्रीनफील्ड सिविल-मिलिट्री एयरपोर्ट को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही, भारतीय नौसेना के मौजूदा 'आईएनएस बाज' एयर स्टेशन के रनवे विस्तार के प्लान को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस 81,000 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध किया था।
कहां बनेगा नया एयरपोर्ट और क्या होगी खासियत?
यह नया डुअल-यूज (नागरिक और सैन्य) एयरपोर्ट गैलाथिया बे के पास चिनगेन में बनाया जाएगा। इसकी रणनीतिक अहमियत काफी ज्यादा है। यह पूर्वी हिंद महासागर में भारत के रणनीतिक ढांचे का एक प्रमुख हिस्सा होगा। इसकी स्थिति अहम समुद्री व्यापारिक मार्ग 'मलक्का स्ट्रेट' के बेहद करीब है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस एयरपोर्ट का निर्माण अगले पांच साल में पूरा होने की उम्मीद है। इसका संचालन भारतीय नौसेना के पास रहेगा, लेकिन यह आम नागरिकों की विमानन जरूरतों को भी पूरा करेगा।
अधिकारियों का तर्क है कि नई जगह पर भविष्य में विस्तार की अधिक गुंजाइश है। इससे रणनीतिक रूप से अहम अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भारत की सैन्य पहुंच, निगरानी क्षमताओं और लॉजिस्टिक्स को मजबूती मिलेगी।
INS बाज का विस्तार क्यों किया गया ड्रॉप?
कैंपबेल बे स्थित आईएनएस बाज के 4,500 फीट लंबे रनवे को 10,000 फीट तक बढ़ाने में भौगोलिक सीमाएं और नेविगेशनल चुनौतियां आ रही थीं। इसके लिए भारी-भरकम सपोर्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की भी जरूरत थी।
अधिकारियों ने अध्ययन में पाया कि नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की तुलना में, मौजूदा रनवे के विस्तार से आदिवासी बस्तियों, जंगलों और वन्यजीवों के आवास पर कहीं ज्यादा गहरा और विपरीत प्रभाव पड़ता।
राहुल गांधी ने लगाया था 'सबसे बड़े घोटाले' का आरोप
नए एयरपोर्ट का यह ऐलान राहुल गांधी के उस कड़े हमले के कुछ ही दिनों बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने इन द्वीपों का दौरा किया था और कोरल रीफ के पास स्कूबा-डाइविंग की थी। राहुल गांधी ने इस मेगा प्रोजेक्ट को देश के "सबसे बड़े घोटालों में से एक" और "देश की प्राकृतिक व आदिवासी विरासत के खिलाफ सबसे गंभीर अपराध" करार दिया था।
उन्होंने आरोप लगाया था कि इस विकास कार्य से वर्षावनों का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हो जाएगा और 1.5 करोड़ से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने कोरल रीफ को नुकसान पहुंचने और 'शोम्पेन' (Shompen) जैसी संवेदनशील और कमजोर आदिवासी जनजातियों के विस्थापन की आशंका जताई थी।
81 हजार करोड़ रुपये का है पूरा 'ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट'
यह नया एयरपोर्ट 'ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना' के तहत प्रस्तावित चार प्रमुख बुनियादी ढांचों में से एक है। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 81,000 करोड़ रुपये है। एयरपोर्ट के अलावा इस मेगा प्लान में एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, पावर इंफ्रास्ट्रक्चर और एक टाउनशिप का विकास शामिल है। इसका मुख्य उद्देश्य इस द्वीप को एक प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक केंद्र में तब्दील करना है।
विरोध पर सरकार का क्या है तर्क?
प्रोजेक्ट को लेकर हो रहे राजनीतिक और पर्यावरणीय विरोध के बीच सरकार लगातार अपना पक्ष रखती आई है। सरकार का स्पष्ट तर्क है कि यह एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक निवेश है। इससे न सिर्फ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की मौजूदगी मजबूत होगी, बल्कि देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों में से एक की कनेक्टिविटी में भी क्रांतिकारी सुधार आएगा।
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