FCRA बिल को लेकर बैकफुट पर सरकार? राहुल गांधी से साधा संपर्क, खत्म होगा हंगामा?
संसद का गतिरोध तोड़ने के लिए सरकार ने FCRA बिल पर नरमी के संकेत दिए हैं। किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से मुलाकात की, हालांकि विपक्ष अपनी मांगों और परिसीमन के विरोध पर अड़ा हुआ है।

संसद के मॉनसून सत्र में लगातार जारी हंगामे और गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार ने विपक्ष की ओर बातचीत का हाथ बढ़ाया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी FCRA बिल के प्रावधानों में नरमी बरतने को तैयार है और इसमें कोई भी ऐसा नियम लागू नहीं किया जाएगा जिसका असर पूर्व के मामलों या निवेशों पर पड़े।
इसी बीच, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से अहम मुलाकात की है। मॉनसून सत्र 13 अगस्त तक चलना है। माना जा रहा है कि इसी सत्र में इस बिल को पेश करना इस बात पर निर्भर करेगा कि विपक्ष चर्चा के लिए कितना तैयार है।
FCRA बिल को लेकर क्या है विवाद और सरकार का रुख?
सिविल सोसायटी और ईसाई संगठनों समेत कई धार्मिक समूहों ने FCRA बिल में 'संपत्ति-निहित' नियमों को लेकर गहरी चिंता जताई थी। कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के एक प्रतिनिधिमंडल ने इसी सिलसिले में गृह मंत्री से भी मुलाकात की थी।
बिल की धारा 14B में FCRA प्रमाणपत्र की 'समाप्ति' का नया कॉन्सेप्ट लाया गया है। आलोचकों और ईसाई संगठनों को डर था कि जिन संस्थाओं ने विदेशी चंदा लेना बंद कर दिया है, उनके प्रमाणपत्र 'समाप्त' मान लिए जाएंगे और विदेशी फंड से बने उनके स्कूल, अस्पताल या चर्च जैसी संपत्तियां सरकार द्वारा नियुक्त अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र में आ जाएंगी।
सरकार की सफाई
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि बिल का मकसद ऐसी स्थिति में संपत्तियों पर कब्जा करना नहीं, बल्कि सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि FCRA पंजीकरण टूटने या रद्द होने की स्थिति में संस्था का कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे। इसके तहत सिर्फ एक 'अंतरिम प्रबंधन' होगा। मूल मालिक या संस्था के वापस लौटने पर संपत्ति उसे ही सौंप दी जाएगी। साथ ही धार्मिक संस्थानों का प्रबंधन उनके अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार ही होगा।
राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के बीच 50 मिनट की मुलाकात
संसद में कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को राहुल गांधी से करीब 50 मिनट तक बातचीत की। बैठक के दौरान रिजिजू ने FCRA संशोधन बिल और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल जैसे लंबित पड़े विधायी कामकाज का मुद्दा उठाया।
रिजिजू ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद होने के बावजूद उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के सामने बातचीत का प्रस्ताव रखा है और वे विपक्ष की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
इन 2 मांगों पर अड़ा है विपक्ष
इस बैठक में विपक्ष ने सरकार को कामकाज चलाने को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। विपक्ष अपनी इन पुरानी मांगों पर कायम है।
पहली अमित शाह दें बयान- 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में गृह मंत्री अमित शाह संसद में आधिकारिक बयान दें।
दूसरी राम मंदिर विवाद पर चर्चा- अयोध्या के राम मंदिर में दान के पैसे की कथित चोरी के मामले पर संसद में चर्चा कराई जाए।
परिसीमन पर कांग्रेस का साफ इनकार
कांग्रेस नेतृत्व ने रिजिजू को बैठक में स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी मौजूदा समय में परिसीमन के सख्त खिलाफ है और उनके इस रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। हालांकि रिजिजू ने उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। इस बीच, कांग्रेस ने INDIA गठबंधन के बाहर के विपक्षी दलों और DMK जैसी पार्टियों के साथ भी इस मुद्दे पर एक साझा रणनीति बनाने के लिए अनौपचारिक चर्चा शुरू कर दी है।
एफसीआरए को लेकर अमेरिका तक चर्चा, भड़के विदेशी सांसद
भारत के प्रस्तावित एफसीआरए बिल को लेकर अमेरिका तक चर्चा जारी है। अमेरिकी सांसद रिले मूर ने भारत में गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), न्यासों, शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक संगठनों को मिलने वाले विदेशी चंदे से संबंधित कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता जताई और कहा कि इनका असर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है।
वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद मूर ने मंगलवार को कहा कि विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधन भारतीय सरकार को गिरजाघरों और धार्मिक परोपकारी संस्थाओं का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की अनुमति देंगे तथा यह ''ईसाइयों पर स्पष्ट हमला'' होगा।
मूर ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''प्रभु यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने के कुछ ही दशक बाद सेंट थॉमस भारत के मालाबार तट पर पहुंचे थे और तभी से भारत में ईसाइयों की उपस्थिति है लेकिन इतने लंबे इतिहास के बावजूद भारत की संसद विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन (एफसीआरए) नियमों में ऐसे बदलाव पर विचार कर रही है, जिससे सरकार गिरजाघरों और धार्मिक परोपकारी संस्थाओं का प्रबंधन अपने हाथ में ले सकेगी।'' उन्होंने कहा, ''यह ईसाइयों पर स्पष्ट हमला है। यदि यह विधेयक इसी स्वरूप में आगे बढ़ता है तो भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों में यह गंभीर चिंता का विषय होगा।''
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