ईरान संकट के मद्देनजर सरकार ने बनाया मंत्रियों का अनौपचारिक समूह, IGOM में कौन-कौन?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार की शाम चुनावी राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की।

पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न मुद्दों पर गौर करने के लिए केंद्र सरकार ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में मंत्रियों का एक 'अनौपचारिक समूह' (IGOM) गठित किया है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण और हरदीप सिंह पुरी मंत्रियों के अनौपचारिक समूह के सदस्यों में शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव से उत्पन्न होने वाले मुद्दों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
अमेरिका-इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमले किए। इसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हो गया है। इस संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, जिसमें तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई हैं और कीमतें बढ़ी हैं। इसका असर देश भर के नागरिकों के जीवन पर पड़ा है।
पीएम ने मुख्यमंत्रियों संग की बैठक
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार की शाम चुनावी राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, डिजिटल माध्यम से आयोजित इस बैठक का उद्देश्य 'टीम इंडिया' की भावना के तहत समन्वय सुनिश्चित करना था। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की है।
देश में तेल और गैस के पर्याप्त भंडार
23 मार्च को लोकसभा में दिए गए बयान में प्रधानमंत्री ने कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक हालात लंबे समय तक बने रह सकते हैं और देश को एकजुट व तैयार रहने की जरूरत है, जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान रहा था। वहीं, 24 मार्च को मोदी ने संघर्ष के संभावित दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने के लिए सात अधिकार प्राप्त समूहों के गठन की घोषणा की और राज्यों से संकट को टालने के लिए एकजुट दृष्टिकोण के तहत केंद्र के साथ काम करने का आग्रह किया। इससे पहले बुधवार को सरकार ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई थी और देशवासियों को भरोसा दिया था कि देश में तेल और गैस के पर्याप्त भंडार हैं और घबराने की जरूरत नहीं है।
लेखक के बारे में
Pramod Praveenप्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।


