टीवी, रेडियो और DTH के लिए अब होगा एक ही नियम! सरकार का क्या प्लान? जिस पर मांगे सुझाव

वार्ता, नई दिल्ली
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मामले से परिचित एक अधिकारी ने कहा कि छह अलग-अलग गाइडलाइंस की जगह अब नियमों का एक ही सेट लागू होगा। 'ग्रांट ऑफ़ परमिशन एग्रीमेंट' खत्म कर दिया गया है। समय-सीमा, फीस ढांचे और मंज़ूरी की प्रक्रियाओं को भी आसान बना दिया गया है।

टीवी, रेडियो और DTH के लिए अब होगा एक ही नियम! सरकार का क्या प्लान? जिस पर मांगे सुझाव

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने शुक्रवार को टेलीविजन चैनलों, रेडियो स्टेशनों, DTH ऑपरेटरों और अन्य ब्रॉडकास्टिंग सेवाओं को एक ही रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के दायरे में लाने के लिए नियमों का ड्राफ्ट सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी कर लोगों से सुझाव मांगे हैं। मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि सरकार द्वारा तैयार किए गए दूरसंचार (टेलीविजन, रेडियो और संबद्ध सेवाएं) नियम, 2026 का उद्देश्य प्रसारण क्षेत्र से जुड़े विभिन्न दिशानिर्देशों को एकीकृत और सरल बनाना है।

संसद ने 2023 में दूरसंचार अधिनियम पारित किया था, जिसने 1885 के पुराने भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम का स्थान लिया। नया अधिनियम दूरसंचार सेवाओं की व्यापक श्रृंखला को कवर करता है और विभिन्न सेवाओं के प्रशासन की जिम्मेदारी संबंधित मंत्रालयों को सौंपी गई है। टेलीविजन, रेडियो और संबद्ध प्रसारण सेवाओं से जुड़े प्रावधानों का संचालन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा किया जाता है।

सैटेलाइट टीवी चैनलों से जुड़े मुद्दे भी शामिल

मंत्रालय के अनुसार, नए नियमों का मसौदा टेलीविजन और रेडियो प्रसारण सेवाओं के लिए पूर्व में जारी विभिन्न नीतियों और दिशानिर्देशों को एक ही नियामक ढांचे में समाहित करने के लिए तैयार किया गया है। इसमें सैटेलाइट टीवी चैनलों की अपलिंकिंग-डाउनलिंकिंग नीति, डीटीएच सेवाओं के लाइसेंस संबंधी दिशा-निर्देश, हेडएंड-इन-द-स्काई सेवाएं, एफएम रेडियो प्रसारण, सामुदायिक रेडियो स्टेशन और आईपीटीवी सेवाओं से जुड़े नियम शामिल किए गए हैं।

कारोबार करने में सुगमता बढ़ेगी

सरकार का कहना है कि नए नियम लागू होने के बाद प्रसारण उद्योग को एक एकीकृत और सरल नियमावली उपलब्ध होगी, जिससे कारोबार करने में सुगमता बढ़ेगी और वर्तमान व्यवस्था अधिक पारदर्शी एवं सुसंगत बनेगी। मंत्रालय ने सभी हितधारकों, प्रसारण संस्थानों और आम नागरिकों से मसौदा नियमों पर सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं, ताकि अंतिम नियमों को अधिक प्रभावी और उद्योग-अनुकूल बनाया जा सके।

छह अलग-अलग गाइडलाइंस की जगह अब एक ही नियम

इन मसौदा नियमों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वेबसाइट www.mib.gov.in पर सार्वजनिक और अंतर-मंत्रालयी परामर्श के लिए प्रकाशित किया गया है। यदि कोई सुझाव, टिप्पणी या इनपुट हो तो उसे अवर सचिव (बीपी एंड एल), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, तृतीय तल, कर्तव्य भवन-द्वितीय, नई दिल्ली को ईमेल पर 27 जुलाई तक भेजा जा सकता है। मामले से वाकिफ एक अधिकारी ने कहा, "हमारा ध्यान चीज़ों को आसान बनाने और 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' (कारोबार करने में आसानी) पर है। छह अलग-अलग गाइडलाइंस की जगह अब नियमों का एक ही सेट लागू होगा। 'ग्रांट ऑफ़ परमिशन एग्रीमेंट' (GoPA) को खत्म कर दिया गया है। समय-सीमा, फ़ीस के ढांचे और मंज़ूरी की प्रक्रियाओं को भी आसान बना दिया गया है।"

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Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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