
SIR हो या चुनाव सुधार, चर्चा कराने से पीछे नहीं सरकार; राज्यसभा में विपक्ष से रिजिजू की भी एक मांग
सदन में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं ने इस पर चर्चा कराने की मांग की। विपक्ष ने इस मांग को लेकर सदन में कुछ देर हंगामा भी किया लेकिन जब इस मुद्दे पर चर्चा शुरू नहीं हुई तो विपक्षी MPs वॉकआउट कर गए।
संसद का शीतकालीन सत्र आज (सोमवार, 1 दिसंबर) से शुरू हो गया है। इस बीच विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा कराने की मांग की है। इस पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में कहा कि सरकार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण पर चर्चा की विपक्ष की मांग पर विचार कर रही है और इस मांग को खारिज नहीं किया गया है। वहीं विपक्ष ने इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा नहीं कराए जाने पर सदन से बहिर्गमन किया।
सोमवार को जैसे ही उच्च सदन की कार्यवाही औपचारिकता निभाने के बाद शुरू हुई तो विपक्ष ने इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा कराए जाने की मांग की। इस पर रिजिजू ने विपक्ष से कहा कि वह एसआईआर, चुनाव सुधारों पर चर्चा के समय के लिए कोई शर्त नहीं रखे। उन्होंने कहा कि सरकार एसआईआर, चुनाव सुधारों सहित किसी भी विषय पर चर्चा के खिलाफ नहीं है; लेकिन उसे जवाब देने के लिए कुछ समय दिया जाए।
विपक्षी दलों का सदन से वॉकआउट
सदन में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं ने इस पर चर्चा कराने की मांग की। विपक्ष ने इस मांग को लेकर सदन में कुछ देर हंगामा भी किया लेकिन जब इस मुद्दे पर चर्चा शुरू नहीं हुई तो विपक्षी सांसद सदन से वॉकआउट कर गए।
जगदीप धनखड़ की भी चर्चा
इससे पहले, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को उपराष्ट्रपति और उच्च सदन के सभापति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत करते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित और अचानक इस्तीफे का जिक्र किया। इस पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने विरोध जताते हुए कहा कि यह अवसर ऐसा विषय उठाने के लिए उचित नहीं है। विपक्ष की ओर से खरगे ने सभापति का स्वागत करते हुए कहा कि कांग्रेस ‘संविधानिक मूल्यों और सदन की परंपराओं’ के साथ दृढ़ता से खड़ी है और कार्यवाही के सुचारू संचालन में सहयोग करेगी। उन्होंने यह भी कहा, ‘‘सदन की कार्यवाही का निष्पक्ष संचालन और प्रत्येक पार्टी के सदस्यों को समान अवसर देना इस पद की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।’’
सभापति से संतुलन बनाए रखने की अपील
खरगे ने जिक्र किया कि राधाकृष्णन तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके सी के कुप्पुस्वामी के रिश्तेदार हैं, जो कांग्रेस के सदस्य थे। उन्होंने कहा, ‘‘बेहतर होगा कि आप दोनों तरफ संतुलन बनाए रखें। मैं आपके सफल कार्यकाल की कामना करता हूं... आप जिस पृष्ठभूमि से आते हैं, उसका प्रधानमंत्री ने ज़िक्र किया, लेकिन आपको यह भी नहीं भूलना चाहिए कि आप एक कांग्रेसी परिवार से हैं।’’ खरगे ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने (संसद के) बाहर एक बयान दिया है। उन्होंने हम पर अप्रत्यक्ष हमला किया और हम उसका जवाब यहीं देंगे...।’’
विपक्ष पर भड़का सत्ता पक्ष
उन्होंने कहा कि धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था और उनका अचानक पद छोड़ना संसदीय इतिहास में असामान्य घटना है। उन्होंने कहा, “मुझे आपके पूर्ववर्ती के अचानक और अप्रत्याशित रूप से पद छोड़ने का उल्लेख करना पड़ रहा है…। मुझे निराशा है कि सदन को उन्हें विदाई देने का अवसर नहीं मिला।” उनकी इस बात पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने विरोध जताया। सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि अगर अप्रासंगिक बातें की जाएंगी तो विपक्ष को यह भी याद होना चाहिए कि उसने पूर्व उपराष्ट्रपति को कैसे अपमानित किया था और उनके खिलाफ दो-दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया था। संसदीय कार्य मंत्री रिरिजू ने इस “गंभीर अवसर” पर धनखड़ के इस्तीफे का उल्लेख करने को लेकर विपक्ष के नेता की आलोचना की। रिजिजू ने कहा कि यह “गंभीर अवसर” था और विपक्ष के नेता को इस समय इस मुद्दे का जिक्र नहीं करना चाहिए था।





