Hindi NewsIndia Newsgovernment is drawing too much meaning from Sonam Wangchuk statements why did the SC say this
सोनम वांगचुक के बयानों का बहुत ज्यादा मतलब निकाल रही है सरकार; SC ने ऐसा क्यों कहा

सोनम वांगचुक के बयानों का बहुत ज्यादा मतलब निकाल रही है सरकार; SC ने ऐसा क्यों कहा

संक्षेप:

सोनम वांगचुक को पिछले साल सितंबर में लेह में हुई हिंसा के बाद हिरासत में लिया गया था। यह हिंसा लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी।

Feb 12, 2026 09:43 am ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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सुप्रीम कोर्ट ने लद्दाख के पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत को लेकर केंद्र सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार वांगचुक के बयानों का बहुत ज्यादा मतलब निकाल रही है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान की। केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि वांगचुक ने चेतावनी दी थी कि लद्दाख में नेपाल जैसी हिंसक अशांति हो सकती है और युवा अब शांतिपूर्ण तरीकों की प्रभावशीलता पर संदेह कर रहे हैं।

इस पर पीठ ने वांगचुक के भाषण का संदर्भ देते हुए कहा कि वांगचुक इसके बजाय शांतिपूर्ण तरीके छोड़ने की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त कर रहे थे। पीठ ने कहा, "वह चिंतित हैं। हमें पूरा वाक्य देखना होगा। 'कुछ लोग गांधीवादी शांतिपूर्ण तरीके छोड़ रहे हैं। यह चिंताजनक है'... ध्यान अहिंसक तरीके से भटकाव पर है, भटकाव चिंताजनक है।"

केंद्र के वकील ने दावा किया कि वांगचुक ने अपने भाषण में हाइब्रिड अभिव्यक्ति का उपयोग किया था। इस पर अदालत ने तुरंत टिप्पणी की कि केंद्र सरकार उनके बयानों की गलत व्याख्या कर रही है।

स्वास्थ्य के आधार पर रिहाई से इनकार

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि केंद्र और लेह प्रशासन ने वांगचुक को स्वास्थ्य आधार पर रिहा करने के खिलाफ फैसला किया है। उन्होंने कहा, "वह फिट, स्वस्थ और तंदुरुस्त हैं।" मेहता ने कहा, "उन्हें पाचन संबंधी कुछ समस्याएं थीं, जिनका इलाज किया जा रहा है। चिंता की कोई बात नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ्य के आधार पर उन्हें रिहा करना उचित नहीं हो सकता है। अदालत ने पिछले हफ्ते वांगचुक के स्वास्थ्य को देखते हुए हिरासत पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था।

आपको बता दें कि सोनम वांगचुक को पिछले साल सितंबर में लेह में हुई हिंसा के बाद हिरासत में लिया गया था। यह हिंसा लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। वांगचुक की पत्नी ने अपनी याचिका में हिरासत को अवैध और लोकतांत्रिक असंतोष को दबाने वाला बताया है। मामले की सुनवाई जारी रहेगी।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

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बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


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