
इन देशों को पछाड़ चावल बाजार पर फिर भारत का कब्जा, बांग्लादेश सहित दुनिया भर में बढ़ी डिमांड
अधिकारी के अनुसार, नॉन-बासमती चावल का निर्यात 25% बढ़कर 15.15 मिलियन टन हो गया। वहीं बासमती चावल का निर्यात 8% की बढ़ोतरी के साथ रिकॉर्ड 6.4 मिलियन टन पर पहुंच गया।
भारत के चावल निर्यात में बीते साल तेज उछाल दर्ज किया गया है। पड़ोसी बांग्लादेश सहित पूरी दुनिया में भारतीय चावल का जलवा कायम है। सरकार और उद्योग से जुड़े अधिकारियों ने शनिवार को समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि निर्यात पर लगे सभी प्रतिबंध हटाए जाने के बाद भारत से चावल का निर्यात 19.4% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया है। इससे वैश्विक बाजार में भारतीय चावल और अधिक प्रतिस्पर्धी हो गया है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है। भारत से सप्लाई में सुधार के चलते थाइलैंड और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों का निर्यात प्रभावित हुआ है। वहीं एशियाई बाजारों में चावल की कीमतें लगभग एक दशक के सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं, जिससे अफ्रीका और अन्य गरीब देशों के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा- मार्च में निर्यात प्रतिबंध हटने के बाद भारतीय चावल की खेपों में तेजी से बढ़ोतरी हुई। रिकॉर्ड उत्पादन के कारण आपूर्ति मजबूत रही, जिससे निर्यात दोबारा रफ्तार पकड़ सका। आंकड़ों के मुताबिक, भारत का चावल निर्यात 18.05 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 21.55 मिलियन मीट्रिक टन हो गया, जो वर्ष 2022 के रिकॉर्ड 22.3 मिलियन टन के बेहद करीब है। सरकार ने 2022 और 2023 के दौरान लगाए गए सभी निर्यात प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाया था, जिसका सीधा असर निर्यात पर पड़ा।
नॉन-बासमती और बासमती दोनों में बढ़त
अधिकारी के अनुसार, नॉन-बासमती चावल का निर्यात 25% बढ़कर 15.15 मिलियन टन हो गया। वहीं बासमती चावल का निर्यात 8% की बढ़ोतरी के साथ रिकॉर्ड 6.4 मिलियन टन पर पहुंच गया। नॉन-बासमती चावल की आपूर्ति खासतौर पर बांग्लादेश, बेनिन, कैमरून, आइवरी कोस्ट और जिबूती में तेजी से बढ़ी। जबकि ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ब्रिटेन ने प्रीमियम बासमती चावल की खरीद में इजाफा किया। भारत आमतौर पर दुनिया के अगले तीन सबसे बड़े निर्यातकों- थाइलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान के संयुक्त निर्यात से भी अधिक चावल विदेश भेजता है।
भारत की कीमतों से प्रतिस्पर्धियों पर दबाव
इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दौरान ओलाम एग्री इंडिया के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा- अन्य निर्यातक देशों की तुलना में भारतीय चावल की कीमतें काफी प्रतिस्पर्धी हैं। कम दामों की वजह से भारत ने एक बार फिर अपना खोया हुआ मार्केट शेयर हासिल कर लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरेलू उत्पादन मजबूत बना रहा और वैश्विक मांग स्थिर रही, तो आने वाले महीनों में भी भारत की निर्यात स्थिति मजबूत बनी रह सकती है।





